{"_id":"63bdae02be1769407621fad3","slug":"assam-illegal-immigrants-supreme-court-to-examine-validity-of-citizenship-act-section-6a","type":"story","status":"publish","title_hn":"Assam illegal Immigrants: सुप्रीम कोर्ट नागरिकता अधिनियम की धारा-6ए की वैधता की समीक्षा करेगा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Assam illegal Immigrants: सुप्रीम कोर्ट नागरिकता अधिनियम की धारा-6ए की वैधता की समीक्षा करेगा
Wed, 11 Jan 2023 12:11 AM IST
देव कश्यप
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 11 Jan 2023 12:11 AM IST
सार
नागरिकता अधिनियम की धारा-6ए विशेष प्रावधान के तहत शामिल की गई है ताकि असम समझौते के तहत आने वाले लोगों की नागरिकता से संबंधित मामलों से निपटा जा सके।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट।
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह नागरिकता अधिनियम में असम के अवैध प्रवासियों से जुड़ी धारा-6ए की संवैधानिक वैधता की समीक्षा करेगा और शिवसेना में विभाजन संबंधी याचिकाओं का निस्तारण करने के बाद इस पर सुनवाई करेगा।
विज्ञापन
धारा-6ए विशेष प्रावधान के तहत शामिल की गई
नागरिकता अधिनियम की धारा-6ए विशेष प्रावधान के तहत शामिल की गई है ताकि असम समझौते के तहत आने वाले लोगों की नागरिकता से संबंधित मामलों से निपटा जा सके। कानून के इस प्रावधान में कहा गया है कि जो लोग एक जनवरी 1966 को या इसके बाद और 25 मार्च 1971 से पहले बांग्लादेश सहित उल्लेखित इलाकों से असम आए हैं और यहां निवास कर रहे हैं उन्हें वर्ष 1985 में संशोधित नागरिकता कानून के तहत नागरिकता के लिए धारा-18 के तहत अपना पंजीकरण कराना होगा। इसका नतीजा यह है कि बांग्लादेश से असम आने वालों के लिए कानून का यह प्रावधान 25 मार्च 1971 की ‘कट ऑफ तारीख’ तय करता है।
विज्ञापन
14 फरवरी को होगी सुनवाई
प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि शिवसेना में विभाजन से महाराष्ट्र की राजनीति में उत्पन्न संकट संबंधी मामलों की सुनवाई के बाद वह 14 फरवरी को इन याचिकाओं (नागरिकता अधिनियम) पर सुनवाई करेगी। पीठ इस पर गौर करेगी कि नागरिकता कानून की धारा-6ए में संवैधानिक रूप से कोई खामी तो नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह मुख्य बिंदु होगा जिसपर फैसला सुनाया जाएगा और यह मामले से उठने वाले अन्य संवैधानिक सवालों को भी समाहित कर लेगा। पीठ ने कहा कि क्या नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए किसी संवैधानिक दुर्बलता से ग्रस्त है?
विज्ञापन
पीठ ने कहा कि एक बिंदु तय करने का अभिप्राय यह नहीं है कि पीठ को बाद में अन्य मुद्दे तय करने से रोकता है। इस पीठ में न्यायमूर्ति एम आर शाह, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी, न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा भी शामिल हैं। पीठ ने कहा कि पहले याचिकाकर्ता जिरह करेंगे और उसके बाद केंद्र सरकार अपना पक्ष रखेगी और उसके बाद हस्तक्षेपकर्ता और अन्य अपनी बात रख सकते हैं।
शीर्ष अदालत ने कहा कि आज हम सुनवाई शुरू नहीं कर सकते हैं। किसी और दिन मामले की सुनवाई करेंगे। पीठ ने कहा कि वकीलों को तीन हफ्ते के भीतर लिखित में मामले और अन्य सामग्रियों को जमा करना होगा। पीठ ने शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह मामले को लेकर दाखिल याचिकाओं की पूर्ण ऑनलाइन कॉपी मुहैया कराए। वर्ष 2009 में ‘असम पब्लिक वर्क’ द्वारा दाखिल एक याचिका सहित कुल 17 याचिकाएं इस मामले में शीर्ष अदालत के समक्ष लंबित है।
विदेशियों की पहचान कर निर्वासित करने के लिए ऑल असम स्टुडेंट्स यूनियन, असम सरकार और भारत सरकार के बीच 15 अगस्त 1985 असम संधि हुई थी और असम आने वाले लोगों को नागरिकता देने के लिए नागरिकता अधिनियम में धारा-6ए जोड़ी गई थी। गुवाहाटी स्थित एक एनजीओ ने 2012 में धारा 6ए को चुनौती दी थी और इसे मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताते हुए दावा किया था कि यह असम में अवैध प्रवासियों को नियमित करने के लिए अलग-अलग तारीखें देता रहता है। इसके बाद दो न्यायाधीशों की पीठ ने इस मामले में वर्ष 2014 में संविधान पीठ को सौंप दिया था।