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Assam: नगांव में ध्वस्त किए गए घरों के पीड़ितों को मिला मुआवजा, सरकार ने गौहाटी हाईकोर्ट को दी जानकारी

Thu, 23 May 2024 03:51 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 23 May 2024 03:51 AM IST
सार

वकील जुनैद खालिद ने कहा कि राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय को सूचित किया कि मुआवजे में कुल 30 लाख रुपये दिए जाएंगे। पांच लोगों को भुगतान कर दिया गया है, जबकि एक का भुगतान अभी भी लंबित है। सरकार ने दो पक्के घरों के लिए प्रत्येक को 10 लाख और पांच कच्चे घरों के लिए 2.5 लाख रुपये का भुगतान किया।

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Assam government told Gauhati High Court given compensation to victims of Nagaon demolition
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा - फोटो : एएनआई

विस्तार

असम सरकार ने गौहाटी उच्च न्यायालय को सूचित किया कि उसने दो साल पहले नगांव के बटाद्रवा में प्रशासन द्वारा ध्वस्त किए गए घरों के पीड़ितों को मुआवजा दे दिया है। एक मछली व्यापारी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद गुस्साए लोगों ने थाने को आग लगा दी थी, जिसके बाद प्रशासन ने घरों को ध्वस्त करने का कदम उठाया था। वहीं, अदालत ने सरकार को विध्वंस से पीड़ित लोगों को मुआवजा देने का निर्देश दिया था।  

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पीड़ितों के वकील जुनैद खालिद ने कहा कि राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय को सूचित किया कि मुआवजे में कुल 30 लाख रुपये दिए जाएंगे। पांच लोगों को भुगतान कर दिया गया है, जबकि एक का भुगतान अभी भी लंबित है। सरकार ने दो पक्के घरों के लिए प्रत्येक को 10 लाख और पांच कच्चे घरों के लिए 2.5 लाख रुपये का भुगतान किया। मुआवजा पाने वालों में इनामुल हक, हिफजुर रहमान, मोजिबुर रहमान, रफीकुल इस्लाम, अक्कास अली और मृतक सफीकुल इस्लाम के कानूनी उत्तराधिकारी शामिल हैं।सफीकुल की पत्नी को अभी तक कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं हुआ है, इसलिए दस्तावेज जारी होने तक उसका भुगतान रोक दिया गया है। 

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21 मई 2022 को हुई थी घटना 
21 मई, 2022 को मछली व्यापारी सफीकुल इस्लाम (39) की पुलिस हिरासत में मौत होने के बाद आक्रोशित भीड़ ने बटाद्रवा पुलिस स्टेशन को फूंक दिया था। घटना के एक दिन बाद जिला प्रशासन के अधिकारियों ने घरों के नीचे छिपे हथियारों और दवाओं की तलाश में सफीकुल और उसके रिश्तेदारों सहित सात घरों पर बुलडोजर चला दिया था।  

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न्यायाधीश ने घर ध्वस्त करने की कार्रवाई पर जताया था आश्चर्य 
नवंबर 2022 में, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश आरएम छाया ने प्रशासन की कार्रवाई पर असम सरकार की खिंचाई की थी। आश्चर्य जताते हुए टिप्पणी की थी कि अगर कल आपको कुछ चाहिए होगा, तो आप मेरा कोर्ट रूम खोद देंगे। अगर आप जांच की आड़ में किसी का घर घिरा देते हैं तो कोई भी सुरक्षित नहीं है। साथ ही अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी आपराधिक कानून के तहत किसी घर पर बुलडोजर चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। भले ही कोई एजेंसी बहुत ही गंभीर मामले की जांच ही क्यों न कर रही हो।  

गृह विभाग को दिए थे जांच के निर्देश 
न्यायमूर्ति छाया ने घरों पर बुलडोजर चलाने को गैंगवार की कार्रवाई के बराबर बताया था। गृह विभाग से अपनी जांच करने के बेहतर तरीके खोजने को कहा था। जनवरी 2023 में, असम सरकार ने उच्च न्यायालय को सूचित किया था कि आरोपियों के घरों को ध्वस्त करने के लिए दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। जिसके बाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को पीड़ित व्यक्तियों को मुआवजा देने के निर्देश दिए थे।  

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