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सेमीकॉन 2.0: भारत में अब चिप डिजाइन और डीप टेक स्टार्टअप्स पर होगा जोर, अश्विनी वैष्णव ने पेश किया नया विजन

Sun, 01 Mar 2026 03:42 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर Published by: अमन तिवारी Updated Sun, 01 Mar 2026 03:42 PM IST
सार

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सेमीकॉन 2.0 मिशन का एलान किया है। इस दौरान उन्होंने कहा भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब डिजाइन इकोसिस्टम और डीप टेक स्टार्टअप्स पर केंद्रित होगा। 

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अश्विनी वैष्णव, रेल मंत्री - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को 'गुजरात सेमीकनेक्ट कॉन्फ्रेंस 2026' में देश के भविष्य को लेकर बड़ा रोडमैप पेश किया। उन्होंने कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब अपने दूसरे चरण यानी 'सेमीकॉन 2.0' में प्रवेश कर रहा है। इस नए चरण का मुख्य फोकस डीप टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना और देश में एक मजबूत डिजाइन इकोसिस्टम तैयार करना है।
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अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सेमीकॉन 1.0 का मुख्य लक्ष्य भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाना था। सरकार को इसमें बड़ी सफलता मिली है। अब देश में कुल 10 प्लांट हैं। इनमें से पहले प्लांट ने कल से कमर्शियल उत्पादन शुरू कर दिया है और दूसरा प्लांट भी बहुत जल्द काम शुरू कर देगा।
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मंत्री ने कहा कि सेमीकॉन 2.0 पिछले चरण से काफी अलग होगा। अब सरकार चाहती है कि भारतीय स्टार्टअप्स दुनिया की दिग्गज कंपनियों जैसे क्वालकॉम, ब्रॉडकॉम और एनवीडिया की तरह पहचान बनाएं। उन्होंने स्वीकार किया कि यह सफर चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सरकार इसके लिए पूरी तरह तैयार और व्यावहारिक है।
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अगले चरण में सरकार का जोर सिर्फ चिप बनाने पर ही नहीं, बल्कि इसके लिए जरूरी मशीनों और उपकरणों के निर्माण पर भी होगा। भारत में ही टेस्टिंग और वैलिडेशन की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मंत्री के अनुसार, अगले 20 साल की मजबूत नींव रखने के लिए देश में ही मटेरियल और मशीनों का इकोसिस्टम बनाना बहुत जरूरी है।


टैलेंट के मुद्दे पर वैष्णव ने खुशी जताई कि सेमीकॉन 1.0 के तहत 10 साल में 85,000 इंजीनियरों को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य था। भारत ने यह लक्ष्य महज 4 साल में ही हासिल कर लिया है। अब सेमीकॉन 2.0 में भी युवाओं की ट्रेनिंग सबसे बड़ी प्राथमिकता रहेगी।

दुनिया भर में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है और जल्द ही यह 1 ट्रिलियन डॉलर की इंडस्ट्री बन जाएगी। इस विस्तार के कारण बाजार में 20 लाख कुशल लोगों की कमी होगी। यह भारतीय छात्रों के लिए एक सुनहरा मौका है। इस मांग को पूरा करने के लिए सरकार इस मिशन से जुड़ी यूनिवर्सिटी की संख्या 350 से बढ़ाकर 500 करेगी। अब हर राज्य के कॉलेजों में छात्रों को चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और टेस्टिंग की ट्रेनिंग मिल सकेगी।

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