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CAA: ‘धार्मिक आधार पर देश में कानून नहीं बनाया जा सकता’, असदुद्दीन ओवैसी ने सीएए का किया विरोध
Wed, 13 Mar 2024 02:50 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Wed, 13 Mar 2024 02:50 AM IST
सार
ओवैसी ने कहा कि लोगों को सीएए को अलग से नहीं देखना चाहिए। यह केंद्र सरकार द्वारा एनआरसी और एनपीआर को लागू करने की एक पहल है। यह सभी चीजें लागू होने से मुसलमानों, दलित, जनजातियों और गरीब लोगों को नुकसान होगा। हैदराबाद की जनता सीएए के खिलाफ मतदान करेंगे।
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Asaduddin Owaisi
- फोटो : ANI
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विस्तार
देश में धार्मिक आधार पर कानून नहीं बनाया जा सकता। यह केवल राजनीतिक दलों तक ही सीमित मामला नहीं है। यह देश का मामला है। क्या आप 17 करोड़ मुसलमानों को राज्यविहीन बनाना चाहते हैं। यह संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। यह कहना है हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी का। मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने देश में सीएए लागू करने के लिए भाजपा सरकार की आलोचना की। गौरतलब है कि सोमवार को केंद्र सरकार ने सीएए लागू करने की अधिसूचना जारी की थी, जिसके देश में जगह इसका विरोध हो रहा है।
हैदराबाद की जनता सीएए के खिलाफ मतदान करेगी
ओवैसी ने कहा कि लोगों को सीएए को अलग से नहीं देखना चाहिए। यह केंद्र सरकार द्वारा एनआरसी और एनपीआर को लागू करने की एक पहल है। यह सभी चीजें लागू होने से मुसलमानों, दलित, जनजातियों और गरीब लोगों को नुकसान होगा। हैदराबाद की जनता सीएए के खिलाफ मतदान करेंगे। मैं ध्रुवीकरण नहीं कर रहा हूं। केंद्र सरकार धार्मिक भेदभाव को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि असम में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एनआरसी लागू किया गया। असम में प्रशासन ने 19 लाख लोगों को संदिग्ध घोषित कर दिया। इनमें 10 से 12 लाख हिंदू हैं। अब सीएए के कार्यान्वयन से उन्हें नागरिकता मिलेगी लेकिन मुसलमानों को नागरिकता नहीं मिलेगी। यह अन्याय है।
आखिर क्या है नागरिकता संशोधन कानून?
नागरिकता संशोधन विधेयक से अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई अवैध प्रवासियों को नागरिकता के लिए पात्र बनाने के लिए नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन किया गया है। नागरिकता अधिनियम में देशीयकरण द्वारा नागरिकता का प्रावधान किया गया है। आवेदक को पिछले 12 महीनों के दौरान और पिछले 14 वर्षों में से आखिरी साल 11 महीने भारत में रहना चाहिए। कानून में छह धर्मों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) और तीन देशों (अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान) से संबंधित व्यक्तियों के लिए 11 वर्ष की जगह छह वर्ष तक का समय है।
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सीएए को लेकर यह है भ्रम
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हैदराबाद की जनता सीएए के खिलाफ मतदान करेगी
ओवैसी ने कहा कि लोगों को सीएए को अलग से नहीं देखना चाहिए। यह केंद्र सरकार द्वारा एनआरसी और एनपीआर को लागू करने की एक पहल है। यह सभी चीजें लागू होने से मुसलमानों, दलित, जनजातियों और गरीब लोगों को नुकसान होगा। हैदराबाद की जनता सीएए के खिलाफ मतदान करेंगे। मैं ध्रुवीकरण नहीं कर रहा हूं। केंद्र सरकार धार्मिक भेदभाव को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि असम में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एनआरसी लागू किया गया। असम में प्रशासन ने 19 लाख लोगों को संदिग्ध घोषित कर दिया। इनमें 10 से 12 लाख हिंदू हैं। अब सीएए के कार्यान्वयन से उन्हें नागरिकता मिलेगी लेकिन मुसलमानों को नागरिकता नहीं मिलेगी। यह अन्याय है।
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आखिर क्या है नागरिकता संशोधन कानून?
नागरिकता संशोधन विधेयक से अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई अवैध प्रवासियों को नागरिकता के लिए पात्र बनाने के लिए नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन किया गया है। नागरिकता अधिनियम में देशीयकरण द्वारा नागरिकता का प्रावधान किया गया है। आवेदक को पिछले 12 महीनों के दौरान और पिछले 14 वर्षों में से आखिरी साल 11 महीने भारत में रहना चाहिए। कानून में छह धर्मों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) और तीन देशों (अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान) से संबंधित व्यक्तियों के लिए 11 वर्ष की जगह छह वर्ष तक का समय है।
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