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Shyam Rajak: बिहार के दो बड़े दलित चेहरे NDA में, तीसरे के आने से बदलेंगे समीकरण, लालू का किला अब भी मजबूत
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श्याम रजक।
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
बिहार में इस समय दलित राजनीति के तीन सबसे बड़े चेहरे चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और श्याम रजक हैं। जीतन राम मांझी और चिराग पासवान पहले ही एनडीए के खेमे में हैं, यदि श्याम रजक भी जदयू ज्वाइन कर लेते हैं, तो इससे बिहार के तीनों सबसे बड़े दलित चेहरे एनडीए के खेमे में आ आएंगे। इससे भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए के लिए बिहार विधानसभा की चुनावी लड़ाई आसान हो सकती है। शुरुआती तौर पर इसे लालू प्रसाद यादव के लिए बड़ा झटका भी माना जा रहा है, लेकिन अपने वोट बैंक पर मजबूत पकड़ रखने वाले लालू यादव को श्याम रजक के जाने से कितना नुकसान होगा, यह कह पाना आसान नहीं है।विपक्ष के हमलों का सटीक जवाब
भाजपा इस समय जिस सबसे गंभीर संकट से जूझ रही है, वह दलितों और संविधान के मुद्दे से जुड़ा हुआ है। राहुल गांधी सहित इंडिया गठबंधन के तमाम नेता उस पर इसी मुद्दे को लेकर हमलावर हैं। राहुल गांधी के तेवर बता रहे हैं कि आगामी विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठा सकती है। ऐसी परिस्थिति में श्याम रजक जैसे नेताओं की भाजपा-एनडीए के लिए उपयोगिता बढ़ जाती है। जातीय राजनीति की प्रमुखता वाले बिहार में श्याम रजक सहित दलित नेताओं की तिकड़ी विपक्ष के हमलों का सटीक जवाब हो सकती है।
एक-एक कोना संभाल रही भाजपा
एनडीए ने जिस तरह उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भेजा है, उससे भी यही संकेत गया है कि भाजपा अपना एक-एक कोना दुरुस्त करने में जुटी है। रजक के सहारे दलित धोबी समुदाय को साधने की रणनीति कारगर हो सकती है। लेकिन श्याम रजक ने भी झारखंड के चंपई सोरेन की तरह अपने पत्ते एक सप्ताह बाद खोलने की बात कही है। दोनों नेताओं का लगभग एक समय पर अपने-अपने दलों से बाहर आना और लगभग एक सी बात कहकर मामला टालने के भी संदर्भ खोजे जा रहे हैं।
लालू के लिए कितना बड़ा झटका
श्याम रजक लालू प्रसाद यादव के लिए कितना बड़ा झटका हैं, यह कहना थोड़ा मुश्किल है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि लालू प्रसाद यादव ने बिहार के एक जातीय समीकरण पर अपनी जबरदस्त पैठ बनाई है। राजद का यह वोट बैंक अब तक बरकरार रहा है। इसमें दलितों का भी एक बड़ा हिस्सा शामिल है। लालू प्रसाद यादव के साथ दलित जाति का कोई बहुत बड़ा नेता भले न रहा हो, लेकिन लालू ने अपने करिश्मे से दलितों के एक बड़े वोट बैंक पर हमेशा अपनी दावेदारी पेश की। पिछले बिहार विधानसभा चुनाव के आंकड़े बताते हैं कि तेजस्वी यादव के रूप में इस वोट बैंक की आस अब भी राजद से बंधी हुई है। ऐसे में श्याम रजक लालू यादव को कोई बड़ा नुकसान कर पाएंगे, यह कहना मुश्किल है।
विशेषकर यह देखते हुए कि दलित नेता मल्लिकार्जुन खरगे को अध्यक्ष बनाने से कांग्रेस को लोकसभा चुनावों में लाभ हुआ है, बिहार विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस-राजद का गठजोड़ बरकरार रहने वाला है। ऐसे में राजद-कांग्रेस के परंपरागत दलित मतदाता इस गठबंधन के साथ बने रह सकते हैं। इसे देखते हुए भी माना जा रहा है कि श्याम रजक के जाने से राजद को बड़ा नुकसान नहीं होने वाला।
'अपने लिए चिंतित हैं श्याम रजक'
राजनीतिक विश्लेषक सुनील पांडेय ने अमर उजाला से कहा कि धोबी समाज का बड़ा चेहरा होने के बाद भी श्याम रजक पूरे राज्य में कोई बड़ा असर नहीं रखते, इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि वे राजद को कोई बड़ा नुकसान पहुंचा पाएंगे। बल्कि असलियत यह है कि श्याम रजक फुलवारी शरीफ की सुरक्षित सीट को अपने हिस्से में पाने के आश्वासन पर ही पाला बदल करने को तैयार हुए हैं।
इसके पहले के चुनाव में यह सीट वामपंथी दलों के पास चली गई थी और वहां से वाम दल जीतने में सफल भी रहे थे, लिहाजा इस बार एनडीए खेमे में आकर श्याम रजक अपनी सीट सुरक्षित करना चाहते हैं। हालांकि, अपने असर से वे पटना और फुलवारी शरीफ के आसपास की कुछ सीटों पर प्रभाव अवश्य डाल सकते हैं।
श्याम रजक का कद बनेगा चुनौती
लेकिन इसका यह अर्थ नहीं निकाला जा सकता कि श्याम रजक के राजद से जाने से उसे कुछ नुकसान नहीं होगा, या एनडीए को उनके आने से कोई लाभ नहीं होगा। राजनीति के जानकार मानते हैं कि बिहार में फुलवारी शरीफ और पटना के आसपास के दलित समुदाय पर श्याम रजक की पकड़ मजबूत है। धोबी समुदाय के नेता के तौर पर पूरे बिहार में उनकी अच्छी-खासी पहचान है। वे जिस भी खेमे में रहेंगे, उसे अपने दम पर कुछ लाभ अवश्य पहुंचा सकते हैं। उनके इसी कद के कारण श्याम रजक का राजद छोड़ना आज बिहार की सबसे बड़ी खबर बन गई है।
कोई नुकसान नहीं- राजद
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने अमर उजाला से कहा कि राजद का वोट बैंक केवल लालू प्रसाद यादव के नाम के साथ जुड़ा हुआ है। हर गरीब, दलित, पिछड़ा और मुसलमान राजद के साथ लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के कारण जुड़ा हुआ है। ऐसे में उनका दावा है कि श्याम रजक के पार्टी छोड़ने से उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा। उनका दावा है कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन एनडीए को कड़ी टक्कर देगा।