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Mumbai court: अपनी मर्जी से सेक्स वर्क करना अपराध नहीं, पर सार्वजनिक स्थान पर…

Tue, 23 May 2023 02:23 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: काव्या मिश्रा Updated Tue, 23 May 2023 02:23 PM IST
सार

फरवरी में एक 34 साल की महिला को एक रेड के दौरान गिरफ्तार किया गया था। तब से वह सरकारी आश्रय में ही रह रही है। कहा जा रहा है कि जब महिला को गिरफ्तार किया था, तब उसके बालिग होने की बात सामने आई थी। 

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as per rule, sex work offence only in public; allows woman to be set free from shelter home: Mumbai court
court order - फोटो : amar ujala

विस्तार

मुंबई की एक सत्र अदालत ने 34 साल की एक महिला सेक्स वर्कर की अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा कि सेक्स वर्क को अपराध नहीं माना जा सकता है। अगर कोई अपनी मर्जी से सेक्स करता है तो यह अपराध नहीं है। हालांकि, सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह का काम करना अपराध की श्रेणी में आएगा। अदालत ने आगे कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को इस तरह के काम से दिक्कत हो सकती है, इसलिए वहां अगर कोई सेक्स वर्क करता है तो इसे अपराध माना जाएगा। 

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दरअसल, फरवरी में एक 34 साल की महिला को एक रेड के दौरान गिरफ्तार किया गया था। तब से वह सरकारी आश्रय में ही रह रही है। कहा जा रहा है कि जब महिला को गिरफ्तार किया था, तब उसके बालिग होने की बात सामने आई थी। इसलिए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस साल 15 मार्च को तक उसकी सुरक्षा और आश्रय को लेकर हिरासत में रखने का आदेश दिया था। 

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महिला ने इस आदेश के खिलाफ सत्र अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इस पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सीवी पाटिल ने पिछले महीने मजिस्ट्रेट अदालत के दिए गए आदेश को रद्द कर दिया।  न्यायाधीश ने कहा कि अनुच्छेद 19 के तहत देश के किसी कोने में आना-जाना और रहना मौलिक आधिकार का हिस्सा है। इसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता है। इसका विस्तृत आदेश हाल ही में उपलब्ध कराया गया है।

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इसमें कहा गया है कि पीड़िता इस देश की नागरिक है। अगर बेवजह उसे हिरासत में लिया गया है तो यह गलत है। पुलिस को इस बात की जांच करनी चाहिए थी कि क्या वह सार्वजनिक स्थान पर भी सेक्स वर्क कर रही है। अगर ऐसा नहीं था तो यह अपराध नहीं है। अदालत ने कहा कि पीड़िता को कहीं भी आने-जाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। उसके दो बच्चे भी हैं और उन्हें अपनी मां की जरूरत है।

सत्र न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि वैश्यालय चलाना और जबरन सेक्स वर्क करवाना अपराध है। हालांकि अगर कोई अपने मन से यह काम कर रहा है तो यह अपराध नहीं है। 

वहीं, पुलिस का कहना था कि जानकारी मिली थी कि एक होटल मालिक जबरदस्ती महिलाओं से वेश्यावृत्ति करवाता है। इसके बाद नकली ग्राहक बनकर धर पकड़ की गई थी। 

 

 

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