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Aryan Khan Drug Case: चीन में किसी बच्चे की गलती पर अभिभावकों को भी मिलेगी सजा, क्या भारत में मान्य होगा ऐसा कानून
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आर्यन खान
- फोटो :
PTI
विस्तार
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता शाहरुख ड्रग्स केस में फंसे अपने बेटे आर्यन खान को लेकर इन दिनों काफी परेशान है। आर्यन ड्रग्स केस में गिरफ्तार हैं और उनकी जमानत अर्जी बार-बार खारिज हो रही है। आर्यन खान को मादक पदार्थ रखने, इससे संबंधित साजिश, इसके सेवन, खरीद और तस्करी करने के आरोप में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने तीन अक्तूबर को गिरफ्तार किया था।आर्यन की गिरफ्तारी और शाहरुख खान की परेशानी के बीच चीन में बनने वाले एक कानून की दुनिया भर में चर्चा हो रही है। चीन जैसा कानून बनाने की तैयारी कर रहा है, उसके मुताबिक बच्चों की गलतियों की सजा अब अभिभावकों को भी मिलेगी। चीन में बनने वाले इस कानून पर चर्चा भारत में इसलिए हो रही है क्योंकि इस समय शाहरुख खान के बेटे ड्रग्स केस में फंसे हुए हैं और बच्चों को नैतिक शिक्षा देने पर सामाजिक बहस चल रही है।
चीन में बन रहे कानून के क्या प्रावधान हैं
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘फैमिली एजुकेशन प्रमोशन लॉ’ में यह प्रावधान किया गया है कि माता-पिता को अपने बच्चों के बुरे व्यवहार के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। चीन में बनने वाले कानून में यह प्रावधान किया गया है कि अगर कोई किशोर कानून के खिलाफ काम करता है या नशाखोरी करता है इसकी सजा अभिभावकों को भी मिलेगी। संभावना है कि चीन की संसद इस सप्ताह कानून के मसौदे पर विचार करेगी। नए कानून के मुताबिक माता-पिता की यह जिम्मेदारी होगी कि वे "पार्टी, राष्ट्र, लोगों और समाजवाद से प्यार करना" सिखाएं। साथ ही माता-पिता को बच्चों में "बुजुर्गों का सम्मान करने और युवाओं का ध्यान करने" की भी भावना पैदा करनी होगी।
चीन का एक स्कूल
- फोटो :
Agency (File Photo)
अभिभावकों की गैर जिम्मेदारी किशोरों के दुर्व्यवहार का कारण
विधायी मामलों के आयोग के प्रवक्ता जांग तिवेई के हवाले से कहा गया है कि किशोरों के दुर्व्यवहार करने के पीछे पारिवारिक शिक्षा की कमी और अभिभावकों की गैर जिम्मेदारी जैसे प्रमुख वजहें हैं। इस कानून के तहत अभिभावकों अपने बच्चों के पढ़ने, खेलने-कूदने का समय तय करेगें और ऑनलाइन गेम खेलने या सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने पर उसकी निगरानी करेंगे।
क्या भारत में ऐसा कानून बन सकता है
चूंकि चीन में राज्य व्यवस्था सख्त है इसलिए इस कानून पर तत्काल अमल और असर दोनों दिखाई देगा। चीन में बनने वाले इस नए कानून से इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या भारत में भी ऐसा कानून बनाने की बात स्वीकार्य होगी? कानून के जानकार और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं की मानें तो भारत में ऐसा कानून नहीं बनाया जा सकता क्योंकि भारत की सामाजिक और पारिवारिक मान्यताएं ऐसी हैं जिसमें माता-पिता और अभिभावक बच्चों को संस्कार सिखाते हैं। इसलिए यहां बच्चों के अपराध के कारण माता-पिता को दोष नहीं ठहराया जा सकता।
क्रिमिनल लॉ में ऐसा प्रावधान नहीं हो सकता
सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश जैन कहती हैं भारत में मोटर व्हीकल एक्ट में तो प्रावधान है कि यदि आपका नाबालिक बच्चा कोई दुर्घटना करता है तो अभिभावक को सजा मिल सकती है, लेकिन क्रिमिनल लॉ में ऐसा प्रावधान नहीं किया जा सकता है। अपराधी प्रवृति वाले लोगों की माता-पिता बहुत अच्छे विचारों वाले हो सकते हैं, वे सभ्य समाज के लोग हो सकते हैं। अपराधी किस्म के लोगों का उनके माता-पिता के विचारों से कोई संबंध नहीं है। इसलिए बच्चों की किसी भी गलती की सजा अभिभावकों को नहीं दी जा सकती।
विधायी मामलों के आयोग के प्रवक्ता जांग तिवेई के हवाले से कहा गया है कि किशोरों के दुर्व्यवहार करने के पीछे पारिवारिक शिक्षा की कमी और अभिभावकों की गैर जिम्मेदारी जैसे प्रमुख वजहें हैं। इस कानून के तहत अभिभावकों अपने बच्चों के पढ़ने, खेलने-कूदने का समय तय करेगें और ऑनलाइन गेम खेलने या सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने पर उसकी निगरानी करेंगे।
क्या भारत में ऐसा कानून बन सकता है
चूंकि चीन में राज्य व्यवस्था सख्त है इसलिए इस कानून पर तत्काल अमल और असर दोनों दिखाई देगा। चीन में बनने वाले इस नए कानून से इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या भारत में भी ऐसा कानून बनाने की बात स्वीकार्य होगी? कानून के जानकार और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं की मानें तो भारत में ऐसा कानून नहीं बनाया जा सकता क्योंकि भारत की सामाजिक और पारिवारिक मान्यताएं ऐसी हैं जिसमें माता-पिता और अभिभावक बच्चों को संस्कार सिखाते हैं। इसलिए यहां बच्चों के अपराध के कारण माता-पिता को दोष नहीं ठहराया जा सकता।
क्रिमिनल लॉ में ऐसा प्रावधान नहीं हो सकता
सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश जैन कहती हैं भारत में मोटर व्हीकल एक्ट में तो प्रावधान है कि यदि आपका नाबालिक बच्चा कोई दुर्घटना करता है तो अभिभावक को सजा मिल सकती है, लेकिन क्रिमिनल लॉ में ऐसा प्रावधान नहीं किया जा सकता है। अपराधी प्रवृति वाले लोगों की माता-पिता बहुत अच्छे विचारों वाले हो सकते हैं, वे सभ्य समाज के लोग हो सकते हैं। अपराधी किस्म के लोगों का उनके माता-पिता के विचारों से कोई संबंध नहीं है। इसलिए बच्चों की किसी भी गलती की सजा अभिभावकों को नहीं दी जा सकती।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो :
अमर उजाला
जो करेगा सो भरेगा
कमलेश जैन के मुताबिक यह संपत्ति या कर्ज का मामला नहीं है जिसमें उत्तरदायित्व या जिम्मेदारी परिवार के किसी और सदस्य में बंट जाएगी। क्रिमिनल लॉ पर्सनल लॉ है। बच्चा यदि कुछ गलत करता है तो इसमें अभिभावकों की कोई गलती नहीं है। जो करेगा सो भरेगा। हां माता-पिता की यह जिम्मेदारी जरुर बनती है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें।
माता-पिता ही खाते हैं पहला धोखा
बाल आयोग की पूर्व सदस्य संध्या बजाज का मानना है किशोरों के नशा करने का मामला हो या दुष्कर्म या कोई और अपराध। इसमें सबसे पहला धोखा तो माता-पिता के साथ ही होता है। अक्सर माता-पिता को यह पता ही नहीं चलता कि उनके बच्चे ने नशा करना या अपराध करना कब शुरु कर दिया। बच्चे यह कहते हैं यह मेरा कमरा है, यह मेरे दोस्त हैं और वे अपनी गतिविधियां अपने माता-पिता से छुपा कर रखते हैं। कोई बच्चा ड्रग्स ले रहा है तो उसके साथियो को दोष दो, माफियाओं को पकड़ो, उसके माहौल को दोष दो, माता-पिता इसमें सजा नहीं दी जा सकती।
भारत में ऐसा कानून कामयाब नहीं हो सकता
उनके मुताबिक भारत में यह कानून कामयाब नहीं हो सकता। भारतीय समाज के संस्कार ऐसे हैं कि अधिकांश माता-पिता अपने बच्चों को दुर्गुणों से बचाने कर रखना चाहते हैं। बच्चों के किसी अपराध के लिए माता-पिता को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। माता-पिता अपने बच्चों को शुरु से सही-गलत का फर्क समझा सकते हैं और खुद भी ऐसा आचरण रख सकते हैं जिससे बच्चे किसी गलत दिशा में न भटकें। इसके लिए किसी सरकारी दबाव या कानून की जरूरत नहीं है।
कमलेश जैन के मुताबिक यह संपत्ति या कर्ज का मामला नहीं है जिसमें उत्तरदायित्व या जिम्मेदारी परिवार के किसी और सदस्य में बंट जाएगी। क्रिमिनल लॉ पर्सनल लॉ है। बच्चा यदि कुछ गलत करता है तो इसमें अभिभावकों की कोई गलती नहीं है। जो करेगा सो भरेगा। हां माता-पिता की यह जिम्मेदारी जरुर बनती है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें।
माता-पिता ही खाते हैं पहला धोखा
बाल आयोग की पूर्व सदस्य संध्या बजाज का मानना है किशोरों के नशा करने का मामला हो या दुष्कर्म या कोई और अपराध। इसमें सबसे पहला धोखा तो माता-पिता के साथ ही होता है। अक्सर माता-पिता को यह पता ही नहीं चलता कि उनके बच्चे ने नशा करना या अपराध करना कब शुरु कर दिया। बच्चे यह कहते हैं यह मेरा कमरा है, यह मेरे दोस्त हैं और वे अपनी गतिविधियां अपने माता-पिता से छुपा कर रखते हैं। कोई बच्चा ड्रग्स ले रहा है तो उसके साथियो को दोष दो, माफियाओं को पकड़ो, उसके माहौल को दोष दो, माता-पिता इसमें सजा नहीं दी जा सकती।
भारत में ऐसा कानून कामयाब नहीं हो सकता
उनके मुताबिक भारत में यह कानून कामयाब नहीं हो सकता। भारतीय समाज के संस्कार ऐसे हैं कि अधिकांश माता-पिता अपने बच्चों को दुर्गुणों से बचाने कर रखना चाहते हैं। बच्चों के किसी अपराध के लिए माता-पिता को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। माता-पिता अपने बच्चों को शुरु से सही-गलत का फर्क समझा सकते हैं और खुद भी ऐसा आचरण रख सकते हैं जिससे बच्चे किसी गलत दिशा में न भटकें। इसके लिए किसी सरकारी दबाव या कानून की जरूरत नहीं है।