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Hindi News ›   India News ›   Arun Shourie Moves Supreme Court Against Constitutional Validity Of Sedition Law

सुप्रीम कोर्ट: राजद्रोह कानून को पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने दी चुनौती

Fri, 16 Jul 2021 07:21 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Fri, 16 Jul 2021 07:21 AM IST
सार

  • वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से दायर इन याचिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 और 19(1)(ए) के उल्लंघन के रूप में भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा- 124ए (राजद्रोह) की वैधता को चुनौती दी गई है

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Arun Shourie Moves Supreme Court Against Constitutional Validity Of Sedition Law
पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी और गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर राजद्रोह कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से दायर इन याचिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 और 19(1)(ए) के उल्लंघन के रूप में भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा- 124ए (राजद्रोह) की वैधता को चुनौती दी गई है।

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याचिका में कहा गया है कि राजद्रोह का अपराध अस्पष्ट है और यह आपराधिक अपराध की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है। साथ ही यह भी कहा गया है कि अवमानना, घृणा और असंतोष जैसे शब्दों का इस्तेमाल विवादित धारा में किया गया है। कहा गया है कि राजद्रोह एक औपनिवेशिक कानून है जिसका इस्तेमाल भारत में स्पष्ट तौर पर अंग्रेजों द्वारा असंतोष को दबाने के लिए किया जाता था।
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याचिका में कहा गया है कि यद्यपि 1962 में केदार नाथ बनाम बिहार मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रावधान को बरकरार रखा गया था लेकिन अब कानून की स्थिति बदल गई है लिहाजा मामले पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। इस धारा के तहत अपराध के रूप में 'सार्वजनिक अव्यवस्था पैदा करने या सार्वजनिक शांति में गड़बड़ी पैदा करने की प्रवृत्ति' की जो बात कही गई है, वह व्यक्तिपरक है।
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याचिका में यह भी कहा गया है कि जब केदार नाथ मामले पर विचार किया गया था तब धारा-124 ए के दुरुपयोग के खिलाफ कुछ प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय थे जिन्हें बाद में हटा दिया गया था। इसलिए इन बदली हुई परिस्थितियों में केदार नाथ में फैसले पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है। चूंकि यह धारा अब संज्ञेय और गैर-जमानती है इसलिए निर्दोष नागरिकों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है

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