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अरुण जेटली ने कहा- कैग करेगा राफेल की जांच, हम रिपोर्ट का करेंगे इंतजार

Mon, 24 Sep 2018 09:25 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 24 Sep 2018 09:25 AM IST
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Arun jaitley said CAG would study the pricing of Rafale Deal and we will wait for the report
अरुण जेटली

राफेल डील जहां वर्तमान सरकार के गले की फांस बन गया है। वहीं विपक्ष को सरकार को घेरने का एक बहुत अच्छा मुद्दा मिल गया है जिसे वह लोकसभा चुनाव और आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान भुनाने की तैयारी में है। विपक्ष ने इस सौदे को घोटाला बताया है। वहीं रविवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राहुल गांधी के ट्वीट पर सवाल उठाया था। उन्होंने पूछा था कि फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांक्वा ओलांद का बयान आने से पहले राहुल को उनके आने वाले बयान के बारे में कैसे पता था। उन्होंने कहा था कि मेरे पास इस जुगलबंदी का कोई सबूत नहीं हैं लेकिन इससे मन में सवाल खड़े होते हैं।

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अरुण जेटली ने कहा कि नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) राफेल सौदे की कीमत की जांच करेगा। वह देखेगा कि एनडीए सरकार की डील ज्यादा अच्छी है या यूपीए का समझौता। सरकार सभी तथ्यों और आंकड़ों को कैग के सामने पेश करेगी। उसके बाद कैग ही फैसला करेगा। हम कैग की रिपोर्ट का इंतजार करेंगे। उन्होंने राहुल द्वारा ओलांद को स्टार बनाने पर सवाल उठाए और इस बात का खंडन किया कि अनिल अंबानी का नाम भारत सरकार ने प्रस्तावित किया था।
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उन्होंने कहा रिलायंस ने दसॉल्ट एविएशन के साथ एमओयू पर फरवरी 2012 को हस्ताक्षर किए थे। उस समय यूपीए इस सौदे को लेकर बातचीत कर रही थी। राहुल डील को लेकर जो आलोचना कर रहे हैं वह 2012 में हुए एमओयू पर भी समान रूप से लागू होती है। 
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वित्त मंत्री ने कहा कि हालांकि उनके पास इसके कोई सबूत नहीं है, मगर सवाल तो उठता ही है कि 29 सितंबर को राहुल ट्वीट के जरिए राफेल मामले में पेरिस में बम धमाके की घोषणा की और इसके तत्काल बाद ओलांद कहते हैं कि राफेल करार में रिलायंस का नाम सरकार ने सुझाया। उन्होंने कहा कि राफेल बनाने वाली कंपनी और फ्रांस सरकार दोनों ने ओलांद के दावे का खंडन किया है। 


वित्त मंत्री ने पूछा कि आखिर 20 दिन पहले राहुल को इसके बारे में कैसे पता था। जेटली ने अंबानी को कांट्रैक्ट दिलाने में सरकार की किसी भी तरह की भूमिका होने से इंकार किया। उन्होंने कहा कि रिलायंस समूह 2012 से इस डील का हिस्सा था लेकिन उसे रक्षा उत्पादन से बाहर कर दिया गया था। उन्होंने कहा, 'दूसरा रिलायंस  समूह पहले से ही रक्षा उत्पादन में था। (इस डील में रिलायंस के दोनों ही समूहों के साथ दसॉल्ट ने साझेदारी की है।) उनका भारत सरकार या फ्रांस की सरकार से कोई कांट्रैक्ट नहीं है। उन्हें किसी भी सरकार ने ऑफसेट साझेदार के तौर पर नहीं चुना है। अब ओलांद का कहना है कि दसॉल्ट ने खुद रिलायंस को चुना था। जो उनके पहले बयान पर सवाल खड़े करता है। जिसका कि फ्रांस सरकार और दसॉल्ट पहले ही खंडन कर चुके हैं।' 

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