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Army: दुनियाभर में खुलेंगे भारत के 90 से ज्यादा डिफेंस विंग; सैन्य कूटनीति का विस्तार करने में जुटीं सेनाएं
Fri, 02 Jan 2026 05:03 AM IST
शिवम गर्ग
आशुतोष भाटिया, नई दिल्ली
आशुतोष भाटिया, नई दिल्ली
Published by: शिवम गर्ग
Updated Fri, 02 Jan 2026 05:03 AM IST
सार
भारत सैन्य कूटनीति को मजबूत करने के लिए 2032 तक 90 से ज्यादा देशों में डिफेंस विंग खोलेगा। इससे रक्षा सहयोग और 30,000 करोड़ के रक्षा निर्यात लक्ष्य को बढ़ावा मिलेगा।
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भारतीय सेना (फाइल)
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
तेजी से बदलते भू-रणनीतिक हालात में सैन्य कूटनीति का बढ़ता महत्व देख भारत ने दुनिया भर में अपने डिफेंस विंग की संख्या बढ़ाने का फैसला किया है। सेना से मिली जानकारी के अनुसार, साल 2024 तक कुल 45 देशों में भारत के डिफेंस विंग थे। वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 52 हो गई है। साल 2032 तक 90 से ज्यादा देशों में डिफेंस विंग खोलने का लक्ष्य रखा गया है।
विभिन्न देशों में भारतीय दूतावासों या उच्चायोगों में खुली डिफेंस विंग में डिफेंस अताशे तैनात होते हैं, जो तीनों में से किसी भी सेना के बड़े अफसर हो सकते हैं। बड़े देशों में जरूरत के मुताबिक एक से ज्यादा डिफेंस अताशे भी रखे जा सकते हैं। सेना के मुताबिक इस मुहिम का उद्देश्य सैन्य गठबंधन करना नहीं है, बल्कि रक्षा सहयोग बढ़ाना है क्योंकि युद्ध के अलावा मानवीय सहायता, आपदा राहत, शांति सेना, आतंकरोधी सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी सेना का महत्व बढ़ रहा है।
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क्या है डिफेंस अताशे
किसी अन्य देश में तैनात ये अधिकारी राजनयिक स्तर पर अपने देश के सैन्य हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं। विएना कन्वेंशन के तहत उन्हें राजनयिकों के समान विशेषाधिकार और इम्युनिटी मिलती है। डिफेंस अताशे अपने देश की सैन्य नीतियां, दृष्टिकोण और प्राथमिकता साझा करते हैं। साझा सैन्य अभ्यासों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, रक्षा उपकरणों से जुड़े समझौतों में योगदान देते हैं। साथ ही सैन्य सुरक्षा से जुड़ी ऐसी रणनीतिक जानकारी भी जुटाते हैं, जो भारत की विदेश नीति और रक्षा निर्णयों में मदद करे। आमतौर पर ब्रिगेडियर, कर्नल या उससे उच्च रैंक वाले सैन्य अधिकारी इस पद के लिए चुने जाते हैं, ताकि वे सैन्य मामलों के साथ ही कूटनीतिक मामलों को भी समझ सकें।
रक्षा निर्यात को मिलेगा बढ़ावा 2026 तक 30,000 करोड़ का लक्ष्य
मित्र देशों से सैन्य सहयोग मजबूत करने के अलावा इस मुहिम का एक लक्ष्य भारत का रक्षा निर्यात बढ़ाना भी है, जो फिलहाल 100 से अधिक देशों तक पहुंच चुका है। यह मुहिम स्वदेशी हथियारों के लिए नया बाजार उपलब्ध कराने की दृष्टि से भी अहम साबित होगी। भारत ने मार्च 2026 तक 30,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा है।
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विभिन्न देशों में भारतीय दूतावासों या उच्चायोगों में खुली डिफेंस विंग में डिफेंस अताशे तैनात होते हैं, जो तीनों में से किसी भी सेना के बड़े अफसर हो सकते हैं। बड़े देशों में जरूरत के मुताबिक एक से ज्यादा डिफेंस अताशे भी रखे जा सकते हैं। सेना के मुताबिक इस मुहिम का उद्देश्य सैन्य गठबंधन करना नहीं है, बल्कि रक्षा सहयोग बढ़ाना है क्योंकि युद्ध के अलावा मानवीय सहायता, आपदा राहत, शांति सेना, आतंकरोधी सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी सेना का महत्व बढ़ रहा है।
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क्या है डिफेंस अताशे
किसी अन्य देश में तैनात ये अधिकारी राजनयिक स्तर पर अपने देश के सैन्य हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं। विएना कन्वेंशन के तहत उन्हें राजनयिकों के समान विशेषाधिकार और इम्युनिटी मिलती है। डिफेंस अताशे अपने देश की सैन्य नीतियां, दृष्टिकोण और प्राथमिकता साझा करते हैं। साझा सैन्य अभ्यासों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, रक्षा उपकरणों से जुड़े समझौतों में योगदान देते हैं। साथ ही सैन्य सुरक्षा से जुड़ी ऐसी रणनीतिक जानकारी भी जुटाते हैं, जो भारत की विदेश नीति और रक्षा निर्णयों में मदद करे। आमतौर पर ब्रिगेडियर, कर्नल या उससे उच्च रैंक वाले सैन्य अधिकारी इस पद के लिए चुने जाते हैं, ताकि वे सैन्य मामलों के साथ ही कूटनीतिक मामलों को भी समझ सकें।
रक्षा निर्यात को मिलेगा बढ़ावा 2026 तक 30,000 करोड़ का लक्ष्य
मित्र देशों से सैन्य सहयोग मजबूत करने के अलावा इस मुहिम का एक लक्ष्य भारत का रक्षा निर्यात बढ़ाना भी है, जो फिलहाल 100 से अधिक देशों तक पहुंच चुका है। यह मुहिम स्वदेशी हथियारों के लिए नया बाजार उपलब्ध कराने की दृष्टि से भी अहम साबित होगी। भारत ने मार्च 2026 तक 30,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा है।
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