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Hindi News ›   India News ›   Wolf Supermoon 2026: Brighter and Bigger Moon to Light Up the Sky on January 3

Supermoon 2026: नए साल की शुरुआत वुल्फ सुपरमून की रोशनी के साथ; तीन जनवरी को दिखेगा 30% ज्यादा चमकीला और बड़ा

Fri, 02 Jan 2026 12:12 AM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Fri, 02 Jan 2026 12:12 AM IST
सार

सुपरमून 2026 में 3 जनवरी को वुल्फ सुपरमून दिखाई देगा। यह चांद आम दिनों की तुलना में 30 फीसदी ज्यादा चमकीला और 14 फीसदी बड़ा नजर आएगा। जानें वजह और भारत में इसे देखने का सही समय...

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Wolf Supermoon 2026: Brighter and Bigger Moon to Light Up the Sky on January 3
सुपरमून - फोटो : एएनआई

विस्तार

साल 2026 की शुरुआत आसमान में एक खास नजारे के साथ होने जा रही है। 3 जनवरी 2026 को भारत समेत दुनिया भर में वुल्फ सुपरमून दिखाई देगा, जब चांद आम दिनों की तुलना में ज्यादा बड़ा और कहीं अधिक चमकीला नजर आएगा। खगोल प्रेमियों के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी यह नजारा बेहद खास होगा।

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साल 2026 का पहला सुपरमून
जनवरी का यह वुल्फ सुपरमून, साल 2026 में आने वाले तीन सुपरमूनों में पहला होगा। सबसे बड़ा और नजदीकी सुपरमून 24 दिसंबर 2026 को दिखाई देगा। जनवरी की साफ सर्द रातों में यह खगोलीय घटना आसमान प्रेमियों के लिए एक यादगार अनुभव साबित होगी।
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भारत में सुपरमून देखने का सबसे अच्छा समय
भारत में चंद्रमा तकनीकी रूप से 3 जनवरी की दोपहर में पूर्णिमा पर होगा, लेकिन इसका असली सौंदर्य शाम को चंद्रोदय के समय दिखेगा। अनुमानित तौर पर शाम 5:45 बजे (IST) के आसपास चांद पूर्व दिशा में उगते हुए बेहद विशाल नजर आएगा। इस दौरान मून इल्यूजन के कारण चांद इमारतों, पेड़ों और पहाड़ियों के पास और भी बड़ा दिखाई देता है। इसे देखने के लिए किसी दूरबीन या टेलिस्कोप की जरूरत नहीं है। बस खुला आसमान और शहर की रोशनी से दूर जगह सबसे बेहतर रहेगी।
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क्या है वुल्फ सुपरमून और क्यों होता है खास?
चंद्रमा की कक्षा गोल नहीं बल्कि अंडाकार होती है, इसलिए पृथ्वी से उसकी दूरी घटती-बढ़ती रहती है। जब पूर्णिमा के समय चंद्रमा पृथ्वी से करीब 3,56,500 किलोमीटर की दूरी पर होता है, तो उसे सुपरमून कहा जाता है। जनवरी की पूर्णिमा को परंपरागत रूप से वुल्फ मून कहा जाता है। माना जाता है कि सर्दियों की चरम अवधि में भेड़ियों के ज्यादा हुआं-हुआं करने की लोककथाओं से इसका नाम जुड़ा है। 2026 में यह घटना और भी खास है क्योंकि इसी समय पृथ्वी सूर्य के सबसे नजदीकी बिंदु पेरीहेलियन के पास होती है, जिससे समुद्री इलाकों में ज्वार-भाटे का असर थोड़ा ज्यादा देखा जा सकता है।

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