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टोल प्लाजा से सेना हटी, ममता अब भी सचिवालय में जमाए हैं 'डेरा'

Fri, 02 Dec 2016 04:56 AM IST
एजेंसी/ कोलकाता
एजेंसी/ कोलकाता Updated Fri, 02 Dec 2016 04:56 AM IST
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Army deployed in West Bengal secretariat
- फोटो : pti

पश्चिम बंगाल के कुछ टोल प्लाजा और सचिवालय के सामने सेना की तैनाती मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अपना लिया है। राज्य सरकार को सूचित किए बिना तैनात की गई सेना को वापस बुलाए जाने तक उन्होंने अपना दफ्तर छोड़ने से इनकार कर दिया। वह बृहस्पतिवार देर रात तक दफ्तर में ही मौजूद थीं, लेकिन सचिवालय भवन ‘नबाना’ के पास दूसरे हुगली ब्रिज टोल प्लाजा से सेना के हट जाने की सूचना आ रही थी। हालांकि खबर लिखे जाने तक ममता बनर्जी सचिवालय में ही थीं।

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उधर, सेना का कहना है कि चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। यह द्विवार्षिक अभ्यास का हिस्सा है, जिसका मकसद वाहनों की आवाजाही के बारे में आंकड़े इकट्ठा करना है। सेना ऐसा अभ्यास पूरे देश में करती है। राज्य सचिवालय में पत्रकारों से उन्होंने कहा, ‘सेना के जवान यहां क्यों तैनात किए गए हैं।
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पुलिस आयुक्त ने उनसे हटने को कहा, लेकिन वे अभी भी टोल प्लाजा पर मौजूद हैं। मैं पूरी स्थिति का अवलोकन कर रही हूं। मैं अपने लोगों की रक्षक हूं और सेना के यहां मौजूद रहने तक सचिवालय से नहीं जाऊंगी।’ मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार को सूचना दिए बगैर सेना की तैनाती की गई है।

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केंद्र ने राज्य को बिना सूचित किए भेज दी सेना

Army deployed in West Bengal secretariat

​यह एक अप्रत्याशित और बेहद गंभीर मसला है। सचिवालय एक संवेदनशील जोन है। टोल प्लाजा भी संवेदनशील है। यहां सेना क्यों है। वे जो भी कारण बता रहे हैं वे गलत हैं। वे झूठ बोल रहे हैं। वे समय-समय पर अपना बयान बदल रहे हैं। ममता ने कहा कि मौजूदा समय में हालात आपातकाल से भी बदतर हो गए हैं।

केंद्र सरकार संघीय ढांचे पर हमला कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव ने इस बारे में केंद्र को पत्र लिखकर जानकारी मांगी है। सीएम ने कहा कि वह इस मुद्दे पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से बातचीत करेंगी। उन्होंने सवाल किया कि क्या देश में बगैर घोषणा के आपातकाल लागू कर दिया गया है।

ममता ने कहा कि सेना हमारी संपत्ति है और हमें उस पर गर्व है। सीएम ने कहा कि आपदा और सांप्रदायिक तनाव की स्थिति में राज्य सेना की मदद मांगते हैं, लेकिन इस समय ऐसा क्या हो गया है कि सैनिकों को तैनात करने की जरूरत पड़ी। उन्होंने कहा कि मॉक ड्रिल के लिए पहले राज्य सरकार को सूचित किया जाता है, लेकिन केंद्र ने ऐसा कुछ नहीं किया है।

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