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Indian Army Day: ओडिशा के कलाकार ने माचिस की तीलियों से बनाया टैंक, बनाने में लगे 6 दिन
Fri, 15 Jan 2021 12:49 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुरी
Published by: Sneha Baluni
Updated Fri, 15 Jan 2021 12:49 PM IST
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भारतीय सेना दिवस 2021: माचिस की तीलियों से बना टैंक
- फोटो : ANI
सेना दिवस के अवसर पर एक कलाकार ने शुक्रवार को 2,256 माचिस की तीलियों का उपयोग करके भारतीय सेना के टैंक का एक मॉडल तैयार किया है। उन्हें इसे बनाने में छह दिन का समय लगा। उनका कहना है कि इसके जरिए उन्होंने भारतीय सेना के वीरों को अपनी तरफ से श्रद्धांजलि दी है।
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समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए ओडिशा के कलाकार शाश्वत रंजन साहू ने कहा, 'मैंने सेना दिवस के अवसर को चिह्नित करने के लिए 2,256 माचिस की तीलियों का उपयोग करके भारतीय सेना के टैंक का एक मॉडल बनाया है। इस मॉडल को बनाने में मुझे 6 दिन लगे जिनकी लंबाई 9 इंच और चौड़ाई 8 इंच है।'
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ओडिशा: पुरी के कलाकार शाश्वत रंजन साहू ने माचिस की तीलियों से भारतीय सेना का टैंक बनाया। उन्होंने बताया, "इसे बनाने में मुझे 6 दिन लगे। इसमें 2,256 माचिस की तीलियों का उपयोग किया गया है। मैंने इसे भारतीय सेना का अभिनंदन करने के लिए बनाया है। इसकी ऊंचाई 9 इंच और चौड़ाई 8 इंच है।" pic.twitter.com/X66MdlF53l
विज्ञापन विज्ञापन— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 15, 2021
साहू ने कहा, मैंने इस टैंक को हमारे असली नायकों को श्रद्धांजलि देने के लिए बनाया है जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया। इस मॉडल को बनाकर, मैं भारतीय सेना को अपनी तरफ से श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। बता दें कि हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है।
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15 जनवरी 1949 के दिन ही भारतीय सेना पूरी तरह से ब्रिटिश थल सेना से मुक्त हुई थी। साथ ही आज ही के दिन जनरल केएम करिअप्पा को भारतीय थल सेना का कमांडर इन चीफ बनाया गया था। इस तरह लेफ्टिनेंट करिअप्पा लोकतांत्रिक भारत के पहले सेना प्रमुख बने थे। केएम करिअप्पा ‘किप्पर’ नाम से काफी मशहूर थे।
दरअसल 15 अगस्त 1947 को देश के आजाद होने के बाद ब्रिटिश इंडियन आर्मी दो हिस्से में बंट गई थी। एक पाकिस्तान आर्मी और दूसरा हिस्सा इंडियन आर्मी बनी थी। 28 जनवरी 1899 को कर्नाटक के कुर्ग में जन्मे करिअप्पा फील्ड मार्शल के पद पर पहुंचने वाले इकलौते भारतीय हैं। फील्ड मार्शल सैम मानेकशा दूसरे ऐसे अधिकारी थे, जिन्हें फील्ड मार्शल का रैंक दिया गया था।
करिअप्पा ने 1947 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में अदम्य साहस और दमदार नेतृत्व का परिचय दिया था। पाकिस्तान के युद्ध के समय उन्हें पश्चिमी कमान का जीओसी-इन-सी बनाया गया था। उनके नेतृत्व में भारत ने जोजीला, द्रास और करगिल पर पाकिस्तानी सेना को हराया था।