बिपिन रावत ने कहा- भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय संबंधों में रचनात्मक भूमिका निभाई है
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भारतीय सेना के अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत का कहना है कि भारत-प्रशांत क्षेत्र में विकसित होती भू-राजनीति को देखते हुए यह साल काफी घटनापूर्ण रहा है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों की परिवर्तनकारी और विघटनकारी प्रकृति स्पष्ट है। भारत-प्रशांत के विकसित भू-राजनीति को विभिन्न राज्यों के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों और गलत व्यापार लाइनों के जरिए विशेषता दी गई। इसके बीच दुनिया के प्रमुख भागीदारों, कोरियाई प्रायद्वीप में शांतिपूर्ण बातचीत और आईएसआईएस द्वारा अपने एक भूखंड का नुकसान होना प्रमुख रहा।
जनरल बिपिन रावत ने कहा कि भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय संबंधों में रचनात्मक भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, 'भारत-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक शक्ति संतुलन जारी है और यह आने वाले भविष्य में भी लगातार ऐसा रहने वाला है। कई हितधारकों को देखते हुए एक सतत संघर्ष जारी है। एक भारतीय परिप्रेक्ष्य से यदि देखा जाए तो हमने हमेशा अंतरराष्ट्रीय संबंधों में रचनात्मक भूमिका निभाई है।'
सेनाध्यक्ष ने कहा कि हमारा लक्ष्य एक अनुकूल आंतरिक और बाहरी सुरक्षा वातावरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा, 'हमारी सुरक्षा नीति 2 बेसिक आधारभूतों पर काम करती है। हमें किसी क्षेत्र को अपने क्षेत्र में शामिल करने की कोई महत्वकांक्षा नहीं है और हम अपने विचारों को दूसरों पर थोपना नहीं चाहते। हमारा लक्ष्य एक अनुकूल आंतरिक और बाहरी सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है। जिससे कि अबाधित रूप से सामाजिक प्रगति और सामाजिक-राजनीतिक विकास हो सके।'
Our security policy flows from 2 basic cardinals-we've no extra territorial ambitions&no desire to transplant our ideologies on others. Our aim is to ensure a conducive internal&external security environment for unhindered economic progress&socio-political development: Army Chief pic.twitter.com/RVRmUF8snE
— ANI (@ANI) November 1, 2018