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Antibodies: कोरोना के बाद बच्चों में वयस्कों से दोगुना बन रहीं एंटीबॉडी, म्यूटेशन के बाद भी नहीं दिखा कोई असर

Mon, 17 Apr 2023 06:30 AM IST
देव कश्यप परीक्षित निर्भय,नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय,नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Mon, 17 Apr 2023 06:30 AM IST
सार

इस अध्ययन पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राजीव जयदेवन का कहना है कि कोरोना महामारी की शुरुआत से बच्चों में इसके प्रभाव काफी कमजोर देखे गए हैं, लेकिन कुछ मामले इसके अपवाद भी रहे।

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Antibodies are being made twice in children as much in adults after covid
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : iStock

विस्तार

कोरोना को लेकर पहली बार बच्चों और वयस्कों के बीच तुलनात्मक अध्ययन सामने आया है। इसके अनुसार, कोरोना के बाद बच्चों में वयस्कों से दोगुना ज्यादा एंटीबॉडी बन रही हैं। वायरस में भले ही अलग-अलग म्यूटेशन की जानकारियां मिल रही हों, लेकिन बीते दो वर्षों के दौरान शोधार्थियों ने इनका बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर कोई खास असर नहीं दर्ज किया।

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इस अध्ययन पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राजीव जयदेवन का कहना है कि कोरोना महामारी की शुरुआत से बच्चों में इसके प्रभाव काफी कमजोर देखे गए हैं, लेकिन कुछ मामले इसके अपवाद भी रहे। बड़ी संख्या को लेकर अगर बात करें तो बच्चे अभी भी कोरोना संक्रमण को लेकर काफी सुरक्षित स्थिति में है, लेकिन अगर किसी में लक्षण रहते हैं तो उसे समय पर आइसोलेट रखते हुए विशेष सावधानियां बरतने की आवश्यकता भी होनी चाहिए।
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मेडिकल जर्नल मेडरेक्सिव पर प्रकाशित जॉर्जिया के एमोरी यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों ने 23 से ज्यादा बच्चों पर संक्रमण से पहले और बाद की स्थिति का विश्लेषण किया है। पाया कि बच्चों में कोरोना से रिकवरी होने के 500 दिन बाद तक एंटीबॉडी पर्याप्त मात्रा में दर्ज की गई हैं जो वायरस के म्यूटेशन से उनका बचाव कर रही हैं। वहीं, वयस्कों में एंटीबॉडी का स्तर तीन से छह माह के बीच कम होता दिखाई दे रहा है। साथ ही, विभिन्न म्यूटेशन भी उन्हें अलग-अलग समय में प्रभावित कर रहे हैं। शोधार्थियों का मानना है कि ये निष्कर्ष छोटे बच्चों और वयस्कों में प्रतिरक्षा अंतर के बारे में महत्वपूर्ण प्रश्न उठाते हैं और इस आयु वर्ग में टीकाकरण और बूस्टर रणनीतियों के लिए व्यापक प्रभाव पड़ सकते हैं।

बेहतर निष्कर्ष के लिए बड़े स्तर पर अध्ययन जरूरी
नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स के डॉ. आनंद बताते हैं कि बच्चों में कोरोना संक्रमण के प्रभाव वयस्कों की तुलना में कम है, लेकिन इस तरह के अध्ययन को बड़े स्तर पर किया जाना चाहिए, ताकि और बेहतर निष्कर्ष दुनिया को मिल सकें। यह अध्ययन अप्रैल 2020 से जनवरी 2022 के बीच संक्रमित बच्चों पर किया गया, जबकि इसके बाद से दुनिया ओमिक्रॉन स्वरूप के अलग-अलग उप स्वरूप का सामना कर रही है, जिनके बारे में भी जानकारी लेना अहम है।


लगातार चौथे दिन 10 हजार से ज्यादा केस, 19 की मौत
कोरोना संक्रमण के मामलों में फिलहाल कमी नहीं आ रही है। स्थिति यह है कि शनिवार को लगातार चौथे दिन देश में 10 हजार से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित मिले हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार को कोरोना के 10,093 नए मामले दर्ज हुए, जिसके चलते उपचाराधीन रोगियों की संख्या बढ़कर 57,542 तक पहुंच गई है। वहीं, बीते दिन 19 लोगों की संक्रमण से मौत भी हुई है। बीते दिन 6,248 मरीज कोरोना से ठीक हुए हैं, जिससे कुल स्वस्थ होने वालों की संख्या 4,42,29,459 हो गई है।

मरीजों के ठीक होने की दर 98.68 फीसदी है। शनिवार को 10,753 मामले सामने आए थे जबकि शुक्रवार को ये आंकड़ा 11,109 तक आ पहुंचा था। इससे एक दिन पहले, बृहस्पतिवार को 10,158 मामले दर्ज हुए थे। अब तक देश में कोरोना संक्रमण से पांच लाख 31 हजार 114 लोगों की मौत हुई है। शनिवार को देश में 1.79 लाख नमूनों की जांच हुई थी, जिसमें से 5.61 फीसदी नमूने पॉजिटिव मिले। फिलहाल देश में कोरोना की साप्ताहिक संक्रमण दर 4.78 फीसदी है।

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