फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   anti social people in social media

जिनका काम ही है इंटरनेट पर जहर उगलना

Sun, 17 Apr 2016 07:58 PM IST
विनीत खरे/बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
विनीत खरे/बीबीसी संवाददाता, दिल्ली Updated Sun, 17 Apr 2016 07:58 PM IST
विज्ञापन
anti social people in social media
- फोटो : istock

हाल ही में एक पत्रकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छेड़छाड़ की गई एक तस्वीर ट्वीट की। इसमें नरेंद्र मोदी सऊदी राजा के पांव छूते नजर आ रहे थे।

विज्ञापन

थोड़ा सा ध्यान देने से साफ हो जाता है कि फोटो नकली और फोटोशॉप्ड है।

इस तस्वीर पर ट्विटर पर भाजपा नेता महेश गिरी ने कड़ी आपत्ति उठाते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली, सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन राठौर को टैग किया।
विज्ञापन


राठौर ने महेश गिरी को जवाब दिया कि उन्होंने मंत्रालय को ‘उल्लंघन’ की समीक्षा करने को कहा है और वह संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद की भी मदद लेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


बाद में उस पत्रकार और जिस चैनल में वह काम करते थे, दोनों ने माफी मांगी। जब ये सबकुछ हो रहा था तब एक और खबर अखबारों के कोने में दबी-दबी सी थी लेकिन सोशल मीडिया में इसकी काफी चर्चा थी।

और खबर यह कि उत्तर प्रदेश नवनिर्माण सेना नाम के संगठन का संस्थापक बनाने वाले अमित जानी ने जेएनयू छात्र कन्हैया कुमार और उमर खालिद को मीडिया साक्षात्कारों में मारने की खुलेआम धमकी दी।

सोशल मीडिया से उठे सरकार पर सवाल

anti social people in social media

आलोचकों ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए कि सरकार खामोश क्यों है और तुरंत अमित जानी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई। बीबीसी से बातचीत में भी अमित जानी ने दावा किया कि उनकी संस्था से जुड़े लोग विश्वविद्यालय में छात्र हैं और वो कन्हैया और उमर खालिद को जान से मारने को तैयार हैं।

मेरठ के रहने वाले अमित जानी खुद को उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का मित्र बताते हैं और कई भाजपा नेताओं के साथ उन्होंने तस्वीरें खिंचवा रखी हैं।

अमित जानी भारतीय सेना के बारे में कन्हैया कुमार और उमर खालिद के कथित वक्तव्यों से नाराज थे। दिल्ली पुलिस ने इस बारे में कोई प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया।

इन धमकियों पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संगठन ने वाइस चांसलर को पत्र लिखा लेकिन कन्हैया की एक सहयोगी के मुताबिक पुलिस की ओर से कन्हैया और उमर को सुरक्षा मुहैया करने के लिए उस दौरान कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि शुक्रवार को खबरें आईं कि पुलिस कन्हैया और उमर की सुरक्षा की दोबारा समीक्षा कर रही है।

यह खबर उन रिपोर्टों के बाद आई जिनमें कहा गया कि दिल्ली की एक बस में रिवॉल्वर के साथ एक चिट्ठी मिली, जिसमें कन्हैया और उमर को जान से मारने की धमकी दी गई थी।

प्रधानमंत्री की तस्वीर गलत दिखाने पर हो कार्रवाई

anti social people in social media

बीबीसी से बातचीत में भाजपा सांसद महेश गिरी ने तर्क दिया कि जेएनयू मामले में तय हुआ था कि पुलिस सीधे तौर पर कार्रवाई नहीं करेगी और ''अगर ऐसा हो तो मैं स्मृति जी (ईरानी) से बात करूंगा।''

उनके अनुसार ''देश के सर्वोच्च पद पर बैठने वाले प्रधानमंत्री को जिस तरह उस तस्वीर में पेश किया, उसके ख‌िलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।''
महेश गिरी को ऐसी तस्वीरों में कोई राजनीतिक हास्य नहीं दिखता।

सोशल मीडिया पर उन तस्वीरों की भरमार है जिनके साथ छेड़छाड़ की गई हो। लोग द्वेष, ग़ुस्से, मजाक और दूसरे कई कारणों से इन तस्वीरों का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर करते हैं और जहर उगलते हैं।

वेबसाइट कोरा पर किसी ने एक सवाल उठाया कि इंटरनेट पर इतने सारे भारतीय आख़िरकार इतना ज़हर क्यों उगलते हैं, क्यों वो अभद्र भाषा इस्तेमाल करते हैं। चिराग जैन के अनुसार सोशल साइट्स पर द्वेष का कारण ‘राजनीतिक घृणा’ है।

वे कहते हैं, 'ये वो लोग हैं जो राजनीतिक और धार्मिक नेताओं के बहकावे में आकर जहर उगलते हैं। वो इसका ख्याल नहीं रखते कि उनके शब्दों से भारत की छवि खराब होती है। और इसके लिए सरकार भी ज‌िम्मेदार है, जो सांप्रदायिक सद्भाव लाने का वायदा तो करती है पर उसके अनुयायी जहर फैलाते हैं।'

एडी यादव कोरा पर लिखते हैं कि जहर उगलने वाले बहुत से लोग पेड सोशल मीडिया टीमों से संबद्ध हैं और वो अपना काम कर रहे हैं। यादव सोशल मीडिया पर डराने धमकाने को एक समस्या बताते हैं।

..तो पुलिस के खिलाफ भी होगी कार्रवाई

anti social people in social media

उनका कहना है, 'दूसरा वर्ग उन चिरकालिक अतिवादियों का है, जो निजी कारणों और पेशेवर कारणों से अंधे हो जाते हैं। उन्हें पैसे नहीं दिए जाते पर वो अपनी सोच का बचाव करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।'

दलित लेखक कंवल भारती ने दुर्गा नागपाल मामले पर उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना की थी तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। वह फोटोशॉप्ड तस्वीरों के विरोधी हैं, लेकिन पुलिस कार्रवाइयों को वो अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला मानते हैं जहां 'विरोधियों से ज़्यादा निपटा जा रहा है और समर्थकों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।'

भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 35 करोड़ के नजदीक है। ये संख्या 2017 में 50 करोड़ के पार चली जाएगी। कानूनन किसी को जान से मारने की धमकी देना अपराध है।

वकील प्रशांत मनचंदा के अनुसार अमित जानी मामले में पुलिस की ज़िम्मेदारी है कि वह जांच करे, कार्रवाई करे और अपराध होने से रोके।
प्रशांत कहते हैं कि अगर किसी को इंटरनेट पर कोई धमकी देता है तो उस व्यक्ति को तुरंत पुलिस के पास जाकर शिकायत दर्ज करनी चाहिए।

उनके मुताबिक़ अगर कोई महिला पुलिस के पास इंटरनेट पर बलात्कार की धमकी जैसे मामले में शिकायत लेकर जाती है तो पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ेगी और पुलिस कार्रवाई नहीं करती तो पुलिसकर्मी के ख‌िलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

कई महिला पत्रकारों को मिल चुकी हैं धमकियां

anti social people in social media
social media - फोटो : AFP

याद रहे कई महिला पत्रकारों को ट्विटर पर उनके विचारों को लेकर धमकियां मिल चुकी हैं। उधर, सरकार के आलोचक ये कह रहे हैं कि छेड़छाड़ किए गए वीडियो, तस्वीरें तो सोशल मीडिया पर आम हैं तो सरकार कितने लोगों के ख‌िलाफ कार्रवाई कर सकती है।

याद रहे, एक नकली ट्विटर अकाउंट के आधार पर दिल्ली पुलिस और राजनाथ सिंह के बयान आए थे। पीआईबी ने प्रधानमंत्री मोदी की फ़ोटोशॉप्ड तस्वीर जारी की थी, पर वह मामला आगे नहीं बढ़ा।

2014 के लोकसभा चुनाव अभियान को याद करें तो गुजरात के विकास और नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को दर्शाती कई फोटोशॉप्ड तस्वीरें जहन में आती हैं।
उधर, कंवल भारती के अनुसार फोटोशॉप्ड तस्वीरों के मामले में कोई भी पार्टी दाग से परे नहीं और कई बार कार्रवाई इस पर निर्भर होती है कि सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed