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स्वास्थ्य: अब गांवों में ANM भी कर सकेंगी मुंह के कैंसर की स्क्रीनिंग, हर साल 75 हजार लोगों की होती है मौत

Wed, 07 Jun 2023 05:57 AM IST
देव कश्यप परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Wed, 07 Jun 2023 05:57 AM IST
सार

केंद्र सरकार ने मुंह के कैंसर की रोकथाम के लिए नई निगरानी नीति पर विचार करने से पहले वैज्ञानिक तथ्य एकत्रित करने का फैसला लिया। इसकी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान के जन स्वास्थ्य विभाग को सौंपी गई, जहां के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन के बाद पारंपरिक मौखिक परीक्षण को कैंसर जांच के लिए सबसे किफायती रणनीति बताया।

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ANMs will also be able to screening for oral cancer in villages, 75 thousand people die every year in India
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

देश में मुंह का कैंसर दूसरा सबसे आम कैंसर है। हर साल 1.30 लाख लोग इसकी चपेट में आते हैं। इस बीमारी की समय पर पहचान करने के लिए जल्द ही देश में नई निगरानी नीति लागू की जाएगी, जिसके तहत गांवों में एएनएम यानी सहायक नर्स मिडवाइफ कर्मचारी भी मुंह के कैंसर की स्क्रीनिंग कर सकेगीं। यह दुनिया में अपनी तरह का पहला प्रयोग होगा।

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दरअसल, केंद्र सरकार ने मुंह के कैंसर की रोकथाम के लिए नई निगरानी नीति पर विचार करने से पहले वैज्ञानिक तथ्य एकत्रित करने का फैसला लिया। इसकी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान के जन स्वास्थ्य विभाग को सौंपी गई, जहां के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन के बाद पारंपरिक मौखिक परीक्षण को कैंसर जांच के लिए सबसे किफायती रणनीति बताया। यह अध्ययन मेडिकल जर्नल द लैंसेट साउथ ईस्ट एशिया में भी प्रकाशित हुआ है।
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शोधकर्ता डॉ. अतुल लोहिया ने बताया कि हमें पूरे देश की आबादी की जांच करने की जरूरत नहीं है, जो लोग उच्च जोखिम वाले समूह से जुड़े हैं उनकी जांच पहले होनी चाहिए। यानी जिस भी 30 साल या उससे अधिक आयु के व्यक्ति ने अपने जीवन में कम से कम एक बार गुटखा, बीड़ी, सिगरेट या शराब का सेवन किया है उन्हें उच्च जोखिम श्रेणी में रखा जा सकता है।
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स्वास्थ्य मंत्रालय, नीति आयोग ने स्वीकारा अध्ययन
सहायक प्रोफेसर डॉ. आयुष लोहिया ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग की तकनीकी मूल्यांकन समिति के सामने अध्ययन के परिणाम प्रस्तुत किए। इसके बाद, नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर वीके पॉल की अध्यक्षता में मेडिकल टेक्नोलॉजी असेसमेंट बोर्ड (एमटीएबी) ने भी अध्ययन की सिफारिशों को स्वीकार किया। डॉ. पॉल ने कहा है कि जल्द ही इन सिफारिशों को देश के बाकी राज्य और केंद्रीय अस्पतालों    को साझा किए जाएंगें।

भारत में हर साल 75 हजार लोगों की होती है मौत

  • भारत में हर साल कैंसर के 13 लाख से ज्यादा मामले सामने आते हैं, जिनमें 1.3 लाख मरीज मुंह के कैंसर से ग्रस्त होते हैं। इसकी वजह से सालाना 75 हजार लोगों की मौत हो रही है।
  • उत्तर प्रदेश में हर साल दो लाख से ज्यादा कैंसर मरीज मिल रहे हैं, जिनमें 25 से 30 हजार मुंह के कैंसर से ग्रस्त होते हैं और 12 से 15 हजार की मौत हो रही है।
  • तंबाकू यानी गुटखा चबाने वाले लोगों में इस गंभीर कैंसर के होने का जोखिम अन्य लोगों की तुलना में अधिक देखा गया है।
  • 2018 में पीजीआई चंडीगढ़ के एक अध्ययन में पता चला कि अस्पताल आने वाले मरीजों में 1.60 फीसदी मुंह के कैंसर की परेशानी को लेकर पहुंच रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा मुंह के कैंसर के रोगी दक्षिण एशिया में है, जहां मृत्यु दर 4.5 फीसदी से अधिक है।
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