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India G20: भारत के जी20 की अध्यक्षता ग्रहण करने से पहले 40 से अधिक मिशन प्रमुखों ने अंडमान का किया दौरा
Fri, 25 Nov 2022 11:41 PM IST
Jeet Kumar
एएनआई, पोर्ट ब्लेयर
एएनआई, पोर्ट ब्लेयर
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 25 Nov 2022 11:41 PM IST
सार
जी-20 शेरपा अमिताभ कांत बोले हमने अपनी यात्रा अंडमान से शुरू की है, क्योंकि यहां गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं, जो भारत की सेल्युलर जेल में कैद थे और इसलिए, हमने सोचा कि वीर सावरकर सहित हमारे कई स्वतंत्रता सेनानी, जो यहां कैद थे हमें अपने स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियां लोगों को सुनानी चाहिए।
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मिशन प्रमुखों ने अंडमान का किया दौरा
- फोटो : ANI
विस्तार
भारत एक दिसंबर को जी20 की अध्यक्षता ग्रहण करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इससे पहले शुक्रवार को 40 से अधिक मिशन प्रमुखों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों ने जी20 कार्यक्रम के लिए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का दौरा किया। वहीं इस दौरान प्रतिनिधियों ने सेल्युलर जेल का दौरा किया जहां लेखक और विचारक वीर सावरकर को अंग्रेजों ने कैद कर रखा था।
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हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा कि अंडमान बहुत महत्वपूर्ण है
जी20 के भारत समन्वयक, हर्षवर्धन श्रृंगला और अमिताभ कांत दौरे के दौरान प्रतिनिधियों के साथ थे। जी20 सम्मेलन के लिए अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का चयन किया गया है। इस पर हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा कि अंडमान बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि आपको याद है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी20 शिखर सम्मेलन के लिए बाली में थे, तो उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति से कहा था कि हम 90 समुद्री मील करीब हैं, दूर नहीं। अंडमान इंडोनेशिया के सबसे करीब है।
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स्वतंत्रता सेनानियों की लोगों को कहानियां सुनानी चाहिए
भारत की ओर से नीति आयोग के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत जी-20 शेरपा हैं। उन्होंने कहा कि हमने अपनी यात्रा अंडमान से शुरू की है, क्योंकि यहां गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं, जो भारत की सेल्युलर जेल में कैद थे और इसलिए, हमने सोचा कि वीर सावरकर सहित हमारे कई स्वतंत्रता सेनानी, जो यहां कैद थे। सभी विदेशियों और राजदूतों के साथ-साथ प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों और सभी आमंत्रित लोगों को उनकी कहानियां सुनानी चाहिए।
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भारत के राजदूत के रूप में काम करें,ताकि बन सके आम सहमति
अमिताभ कांत ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह के एक रिसॉर्ट में आयोजित विशेष सत्र में भाग लेने वाले देशों के राजनयिकों और प्रतिनिधियों को 'भारत के दृष्टिकोण के बारे में जानकारी' दी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधिमंडलों से आग्रह किया कि वे अपने देश के राजदूत के रूप में नहीं बल्कि भारत के राजदूत के रूप में काम करें। ताकि इस आयोजन के लिए नीतिगत एजेंडे पर आम सहमति बन सके।
उन्होंने कहा, यहां अंडमान में चालीस से ज्यादा राजदूत हैं। हमने उन्हें सभी कार्य समूहों (वर्क ग्रुप्स) पर एक प्रस्तुति (प्रेजेंटेशन) दी है कि भारत की क्या प्राथमिकताएं हैं। हमने अनुरोध किया है कि उन्हें अपने देश के राजदूत के रूप में काम नहीं करना चाहिए बल्कि उन्हें हमारे राजदूत के रूप में काम करना चाहिए।
भारत अलग दृष्टिकोण के साथ काम करेगा
इस बीच, भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त एलेक्स एलिस ने कहा कि भारत इस समय G20 की अध्यक्षता करने के लिए सही देश है क्योंकि यह इस कठिन समय में अन्य देशों को एक साथ ला सकता है जब दुनिया असंख्य चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि सेल्युलर जेल, पोर्ट ब्लेयर एक अतीत का हिस्सा है। मेरी स्थिति में किसी के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह गवाह बने और वहां किए गए कुछ शर्मनाक कृत्यों को स्वीकार करे। यह एक ऐसी जगह है, जिसके प्रति मैं सम्मान और समझ दिखाता हूं।