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एएन-32: जंगल में जहरीले सांप और कीड़ों के बीच फंसी शवों को निकालने वाली रेस्क्यू टीम

Sat, 29 Jun 2019 10:18 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लीपो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लीपो Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 29 Jun 2019 10:18 AM IST
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AN-32 Aircraft crash: rescue team is still stranding in thick forest region
एएन 32 विमान इसी स्थान पर दुर्घधटनाग्रस्त हुआ था - फोटो : ANI

भारतीय वायुसेना का विमान एएन-32 तीन जून को दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। इस हादसे में शहीद हुए जवानों के शव को निकालने के लिए गए बचावकर्मी अभी तक वापस नहीं लौट पाए हैं। यह दल अरुणाचल के घने जंगलों से घिरे बेहद दुर्गम इलाके में पैदल चलकर घटनास्थल तक पहुंचे जहां पर विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था।

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इस इलाके में मौसम लगातार बिगड़ता जा रहा है। जिसकी वजह से बचाव दल को एयरलिफ्ट करने के लिए मौसम में सुधार आने का इंतजार किया जा रहा है। तीन जून को विमान ने असम के जोरहाट से उड़ान भरी थी और अरुणाचल प्रदेश में मेनचुका के पास लापता हो गया था। यह स्थान चीन सीमा के पास है।
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विमान में आठ क्रू मेंबर सहित 13 लोग सवार थे। सभी के शव 20 जून को लिपो से 13 किलोमीटर उत्तर समुद्रतल से 12,000 फीट की ऊंचाई पर बरामद हुए थे। विमान के मलबे की तलाश के लिए वायुसेना ने ऑपरेशन चलाया था। कड़ी मशक्कत के बाद विमान का मलबा अरुणाचल की घाटियों में जंगल में दिखाई दिया था।
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इसके बाद बचाव दल की 12 सदस्यीय टीम को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया था। ताकि शहीदों के शव और विमान के ब्लैक बॉक्स की बरामदगी की जा सके। जिस स्थान पर विमान का मलबा दिखाई दिया वहां पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं था। जिसके कारण बचाव दल को विमान के जरिए घटनास्थल के नजदीक पहुंचाया गया।

दुर्गम प्राकृतिक संरचना वाले इस क्षेत्र से जवानों के पार्थिव शरीर की बरामदगी के लिए पर्वतारोहियों की मदद लेनी पड़ी थी। इस अभियान के दौरान कई बार खराब मौसम ने व्यवधान उत्पन्न किया। खराब मौसम के कारण कई बार तलाशी अभियान रोका गया। बचाव कार्य में चीता और एएलएच हेलिकॉप्टर्स शामिल थे।

बारिश, जहरीले सांप और कीड़ों का कर रहे सामना

यहां बचावकर्मी लगातार हो रही बारिश, जहरीले सांप और कीड़ों का सामना कर रहे हैं। 15 दिन बीतने के बाद भी उन्हें वापस नहीं लाया जा सका है। इस बचाव दल में नौ वायु सैन्यकर्मी एक एवरेस्ट पर्वतारोही और दो लोकल हंटर शामिल हैं। शुक्रवार को रक्षा प्रवक्ता ने बताया, 'सभी लोग साइट पर हैं। वायुसेना उन्हें जल्द से जल्द एयरलिफ्ट करने की कोशिश कर रही है। इस मौसम में पहाड़ों से खुद उतरना मुश्किल है।'

बचाव दल के पास खत्म हो रहा है राशन

पश्चिमी सियांग जिले के जिला सूचना और जनसंपर्क अधिकारी जीजुम ताली ने बताया, एक्स्ट्रा बैटरी युक्त एक मोबाइल फिलहाल काम कर रहा है लेकिन वहां बमुश्किल सिग्नल मिल रहे हैं। सिग्नल मिलने के लिए उन्हें और अधिक ऊंचाई पर जाना होगा। बहुत जरूरी होने पर ही उनसे संपर्क किया जाता है। सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि बचावकर्मियों के पास मौजूद राशन खत्म हो रहा है।

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