एमजीआर की समाधि के पास दफनाई गईं जया, राजकीय सम्मान के साथ अम्मा को विदाई
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तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता को अंतिम विदाई देने मरीना बीच पर उमड़ा जनसैलाब हिंद महासागर की लहरों पर काबू पाने की क्षमता रखता था। पूरे राजकीय सम्मान के साथ जब उन्हें उनके राजनीतिक गुरु एमजी रामचंद्रन की समाधि के बगल में दफनाया गया तो लाखों शोक-संतप्त प्रशंसकों की अश्रुपूरित आंखें छलक उठीं। तीन दशकों तक तमिलनाडु की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने वाली अन्नाद्रमुक प्रमुख अम्मा को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू, मुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, कई अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों, राज्यपाल विद्यासागर राव, द्रमुक नेता एमके स्टालिन और फिल्म अभिनेता रजनीकांत सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने राजाजी हॉल में भावभीनी श्रद्धांजलि दी जहां सुबह से गरीबों की मसीहा और 68 वर्षीया अम्मा का पार्थिव शरीर रखा गया था।
पिछले तीन दशक से जयललिता की घनिष्ठ हमराज शशिकला नटराजन पूरे दिन उनके पार्थिव शरीर के सिरहाने खड़ी रहीं और उन्होंने ही एमजीआर की कब्र के नजदीक उन्हें दफनाने की अंतिम रस्म भी निभाई। पांच बार प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं जयललिता के पार्थिव शरीर को चंदन के ताबूत में रखकर शाम 6 बजे जब दफनाया जाने लगा तो ‘अम्मा वाझगा’ (अम्मा अमर रहे) के भावुक नारों के बीच मरीना बीच की लहरें भी दब गईं।
इस मौके पर नायडू, राव, राहुल गांधी, गुलाम नबी आजाद, पनीरसेल्वम, विधानसभा अध्यक्ष धनपाल और पूर्व राज्यपाल के. रोसैय्या ने उन्हें पुष्पमालाएं अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उनके पार्थिव शरीर को उनकी पसंदीदा हरे रंग की साड़ी और चंदन की माला पहनाकर तथा तिरंगे में लपेटकर दफनाया गया।
इससे पहले उनकी शवयात्रा में सैन्य टुकड़ी के साथ शामिल हजारों प्रशंसक ‘पुरात्ची थलेवी अम्मा’ (क्रांतिकारी नेता अम्मा) अमर रहे के नारे लगाते हुए मरीना बीच पहुंचे। राजाजी हॉल से उनकी शवयात्रा मद्रास यूनिवर्सिटी से होते हुए तीन किलोमीटर का सफर तय कर ब्रिटिशकालीन पीडब्ल्यूडी भवन के कब्रिस्तान तक पहुंची।
तीनों सेनाओं के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर का सम्मान दिया
अभिनेता से करिश्माई राजनेता बनी जयललिता की बड़ी-बड़ी तस्वीरें उनके ताबूत के चारों ओर रखी गई थी ताकि लोग अपनी परमप्रिय नेता के अंतिम दर्शन करते हुए पुष्पवर्षा कर सकें। केंद्र सरकार ने राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि का आदेश जारी किया था इसलिए तीनों सेनाओं के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर का सम्मान दिया। शशिकला ने ब्राह्मण पंडित की निगरानी में अंत्येष्टि की रस्म निभाई।
आजीवन कुंवारी रहनेवाली जयललिता ने अपनी धार्मिक आस्था और पहचान कभी नहीं खोई। इस लिहाज से उनका दाह-संस्कार करने के बजाय उन्हें दफनाया जाना आश्चर्यजनक है। जयललिता से व्यक्तिगत घनिष्ठता होने के कारण प्रधानमंत्री मोदी उन्हें श्रद्धांजलि देने चेन्नई पहुंचे थे।
उन्होंने शोक-संतप्त शशिकला के सिर पर हाथ रखकर उन्हें सांत्वना दी। दफनाए जाने से पहले कब्र को रेत और गीली मिट्टी के साथ ही फूलों से भरा गया और उनके ताबूत को अन्नाद्रमुक के झंडे से भी लपेटा गया।
अंत्येष्टि में 2000 किलो फूल बरसाए
जयललिता की शवयात्रा के लिए इस्तेमाल किए गए आर्मी ट्रक और गन कैरिज को सजाने के लिए 2000 किलो से ज्यादा फूलों का इस्तेमाल किया गया। इन ट्रकों को दो तरह के फूलों से सजाया गया था। सजावटी फूलों के तौर पर जेबरा प्लांट, डेजी आदि का इस्तेमाल किया गया था जबकि पारंपरिक फूलों के तौर पर गुलाब और सफेद गेंदे लगाए गए थे।
लगभग 40 कारीगरों ने बेहद फुर्ती के साथ 2000 किलो से ज्यादा फूलों का इस्तेमाल कर उनकी अंतिम यात्रा में इस्तेमाल ट्रक को सजाया था। लगभग 40 लोग तड़के तीन बजे से ही फूलों को सजाने और शवयात्रा की गाड़ी को सजाने में लग गए थे।
सदमे में तीन की मौत
जयललिता की तबीयत बिगड़ने की खबर फैलते ही कोयंबटूर में सदमे से दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दो लोगों ने आत्महत्या की कोशिश की। टेलीविजन पर जयललिता की तबीयत बिगड़ने की खबर देखते हुए सिंगानल्लुर के 65 वर्षीय पेंटर को सीने में दर्द हुआ।
उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया। इसी तरह पलानीअम्मल में एक व्यक्ति की मौत टीवी पर जयललिता की तबीयत बिगड़ने की खबर देखने के बाद हो गई। इरोड में न्यूज चैनल पर जयललिता की बीमारी की खबर के बाद एक 38 वर्षीय शख्स की मौत कुर्सी पर बैठे-बैठे हो गई।
इस बीच कुनियामुथुर में एक शख्स ने 50 फीट ऊंचे मोबाइल टावर से नीचे कूद कर जान देने की कोशिश की। अन्नूर के पास अन्नाद्रमुक के एक कार्यकर्ता ने जान देने की कोशिश की।
क्यों दफनाया गया जयललिता का शव
अयंगर ब्राह्मण होते हुए भी जयललिता के शव को जलाया नहीं दफनाया गया। इसकी कई वजहें हो सकती हैं। एक तो वह द्रविड़ आंदोलन की विरासत वाली नेता थीं। द्रविड़ राजनीति के सभी बड़े नेताओं- पेरियार, अन्नादुरई और एमजी रामचंद्रन को मौत के बाद दफनाया गया था। द्रविड़ आंदोलन के नेता नास्तिक होते हैं। वे ईश्वर की सत्ता और उसके प्रतीकों को नहीं मानते हैं।
दूसरी वजह पार्टी कार्यकर्ताओं का वह विश्वास है जिसके तहत वे अम्मा को जातीय और धार्मिक पहचान से परे समझते थे। लिहाजा अन्य दूसरे नेताओं की तरह ही उन्हें भी चंदन की लकड़ी और गुलाब जल के साथ दफनाया गया। अन्नाद्रमुक के एक सदस्य के मुताबिक पार्टी में किसी नेता की मौत के बाद उसके शव को जलाए जाने का कोई उदाहरण नहीं है।
तीसरी वजह यह हो सकती है कि अंतिम संस्कार के लिए किसी निकट संबंधी का होना जरूरी है। दीपा जयकुमार (जयललिता के भाई की बेटी) ही एकमात्र रिश्तेदार हैं जो यह काम कर सकती थीं। लेकिन शशिकला नटराजन दीपा को नजदीक लाना नहीं चाहती होंगी क्योंकि उन्हें उनसे चुनौती महसूस हो सकती है।
पूरे देश में एक दिन का राजकीय शोक
केंद्र सरकार ने मंगलवार को पूरे देश में एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। इस मौके पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत सभी राज्यों की राजधानियों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहा। केंद्र की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जयललिता के सम्मान में एक दिन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा।