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'मातृभाषा के साथ दूसरी भाषा भी जानें': महाराष्ट्र से अमित शाह ने क्या संदेश दिया? नई शिक्षा नीति पर भी बोले
Mon, 14 Sep 2026 03:45 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Mon, 14 Sep 2026 03:45 PM IST
सार
हिंदी दिवस के मौके पर महाराष्ट्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मातृभाषा के साथ एक और भारतीय भाषा सीखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा सीखने से बच्चे अपनी जड़ों से जुड़ते हैं, जबकि दूसरी भारतीय भाषा सीखने से उनमें पूरे देश से जुड़ाव बढ़ता है। नई शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए शाह ने इसे 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना से जोड़ा। क्या भाषा को लेकर सरकार की दिशा अब हिंदी के साथ दूसरी भारतीय भाषाओं को भी जोड़ने की है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
- फोटो : संवाद
विस्तार
मुंबई में हिंदी दिवस के मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय भाषाओं को लेकर बड़ा संदेश दिया। नवी मुंबई के सिडको प्रदर्शनी केंद्र में हिंदी दिवस समारोह और छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए शाह ने कहा कि बच्चों को अपनी मातृभाषा के साथ एक दूसरी भारतीय भाषा भी सीखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मातृभाषा बच्चे के विकास और उसकी जड़ों से जुड़ाव के लिए जरूरी है, जबकि दूसरी भारतीय भाषा सीखने से उसका संबंध देश के दूसरे हिस्सों और वहां की संस्कृति से मजबूत होता है। शाह ने इस बात को प्रधानमंत्री मोदी की नई शिक्षा नीति से जोड़कर समझाया।
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मातृभाषा के साथ दूसरी भारतीय भाषा क्यों जरूरी बताई?
अमित शाह ने कहा कि कोई बच्चा अपनी मातृभाषा सीखे बिना पूरी तरह विकसित नहीं हो सकता। उनके मुताबिक प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा को महत्व देना नई शिक्षा नीति की अहम बात है। उन्होंने इसके साथ दूसरी भारतीय भाषा सीखने को भी जरूरी बताया। शाह ने कहा कि दूसरी भारतीय भाषा सीखने से बच्चे का जुड़ाव 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना से अपने आप बढ़ेगा। उनके अनुसार जब कोई बच्चा अपनी मातृभाषा और देश की किसी दूसरी भाषा को समझता है तो वह संकीर्ण सोच से बाहर निकलता है और पूरे भारत से जुड़ता है। उन्होंने इस व्यवस्था का विरोध करने वालों को लेकर कहा कि वे इसके महत्व को नहीं समझ रहे हैं।
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नई शिक्षा नीति में भाषा को लेकर क्या बोले शाह?
शाह ने नई शिक्षा नीति को प्रधानमंत्री मोदी की बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि इसमें प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा में सीखने को महत्व दिया गया है। उनका तर्क था कि बच्चे के शुरुआती विकास में अपनी भाषा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही दूसरी भारतीय भाषा सीखने पर जोर देकर उन्होंने भाषाई विविधता को समझने की बात कही। शाह के मुताबिक यह केवल भाषा सीखने का विषय नहीं है, बल्कि इससे बच्चे का देश के अलग-अलग हिस्सों, लोगों और संस्कृतियों से रिश्ता मजबूत होता है। इस तरह उन्होंने भाषा की शिक्षा को राष्ट्रीय एकता से जोड़कर पेश किया।
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महाराष्ट्र की बहुभाषी पहचान का शाह ने क्यों किया जिक्र?
अमित शाह ने महाराष्ट्र को देश की बहुभाषी संस्कृति का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में मराठी का सम्मान होना चाहिए और यहां मराठी के साथ कोंकणी, गुजराती, सिंधी, हिंदी और कन्नड़ समेत कई भाषाएं फलती-फूलती रही हैं। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया। उन्होंने इसे महाराष्ट्र की भाषा और संस्कृति के सम्मान से जोड़कर बताया। शाह ने कहा कि अलग-अलग भाषाओं का साथ रहना भारत की ताकत है और भाषा के विकास की दिशा इसी विविधता को ध्यान में रखकर आगे बढ़नी चाहिए।हिंदी को लेकर अमित शाह का क्या संदेश रहा?
हिंदी दिवस के कार्यक्रम में शाह ने हिंदी के विकास की चर्चा के साथ भारतीय भाषाओं की बात भी की। उन्होंने अपने गुजरात से होने का जिक्र करते हुए कहा कि वहां गुजराती बोली जाती है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्हें पूरे देश में काम करने में परेशानी नहीं हुई, क्योंकि वे हिंदी समझते और बोलते थे। उन्होंने राजभाषा हिंदी की यात्रा को भारतीय भाषाओं की यात्रा से जोड़ने की बात कही। शाह ने कहा कि देश की भाषाओं को समृद्ध करने के लिए उनके शब्दों को स्वीकार करने की जरूरत है। इसी संदर्भ में उन्होंने वीर सावरकर और 'सिंधु शब्दकोश' का भी जिक्र किया।वंदे मातरम् और भाषा को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से कैसे जोड़ा?
- शाह ने वंदे मातरम् को केवल एक गीत नहीं बल्कि भारतीय चेतना जगाने वाला प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने गुलामी के दौर में वंदे मातरम् के जरिए आजादी की भावना को मजबूत किया और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नींव रखने में भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ और हिंदी दिवस का कार्यक्रम छत्रपति शिवाजी महाराज की धरती पर होना महत्वपूर्ण है। शाह ने गणेश उत्सव का भी जिक्र किया और कहा कि लोकमान्य तिलक ने 1893 में इसे सांस्कृतिक जागरण से जोड़ा था। इस तरह उनके भाषण में भाषा, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना के तीनों पहलू एक साथ दिखाई दिए।
- अमित शाह के पूरे संबोधन में मुख्य जोर इस बात पर रहा कि भारतीय भाषाओं को एक-दूसरे के सामने खड़ा करने के बजाय उनके बीच जुड़ाव बढ़ाया जाए। उन्होंने मातृभाषा को बच्चे की शुरुआती शिक्षा और विकास से जोड़ा, जबकि दूसरी भारतीय भाषा को देश की विविधता समझने का माध्यम बताया। महाराष्ट्र की बहुभाषी संस्कृति और नई शिक्षा नीति के उदाहरणों के जरिए उन्होंने यही संदेश देने की कोशिश की कि भाषा केवल पढ़ाई का विषय नहीं है, बल्कि यह संस्कृति और देश से जुड़ने का माध्यम भी है। हिंदी दिवस के मंच से उनका जोर हिंदी के साथ दूसरी भारतीय भाषाओं को आगे बढ़ाने पर भी रहा।