Women Reservation Law: महिला आरक्षण कानून में संशोधन में हो सकती है देरी, समय से पहले खत्म हो सकता है सत्र
महिला आरक्षण कानून में बदलाव से जुड़ा विधेयक मौजूदा संसद सत्र में लाए जाने की संभावना कम है। सूत्रों के अनुसार, सरकार फिलहाल इस पर आगे बढ़ने से पहले सभी राजनीतिक दलों से और चर्चा करना चाहती है। इसके साथ ही संसद सत्र को समय से पहले स्थगित किया जा सकता है।
विस्तार
केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा की सीट को बढ़ाकर 816 करने के लिए तत्काल विधेयक लाने की संभावना नहीं है, क्योंकि संसद का मौजूदा सत्र निर्धारित अवधि से पहले ही स्थगित हो सकता है, लेकिन सत्रावसान नहीं किया जाएगा ताकि अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद इसे फिर से बुलाये जाने का विकल्प खुला रहे। सूत्रों ने यह जानकारी दी। लोकसभा में सीट की संख्या बढ़ाने का उद्देश्य 273 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित करना है।
सूत्रों ने बताया कि लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने और उनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक अगले कुछ दिनों में पेश होने की संभावना बहुत कम है। मंगलवार शाम तक इस विधेयक के मसौदे को केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखने का कोई प्रस्ताव नहीं था। बताया गया है कि इस मुद्दे पर अभी सभी दलों के साथ पूरी तरह बातचीत नहीं हुई है।
गृह मंत्री अमित शाह ने कुछ दलों के नेताओं से चर्चा की है, लेकिन कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के साथ अभी बातचीत बाकी है। सूत्रों के अनुसार, मौजूदा बजट सत्र 2 अप्रैल से पहले ही स्थगित किया जा सकता है। हालांकि, सत्र को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर इसे दोबारा बुलाया जा सके। सरकार अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद सत्र फिर से बुलाने के विकल्प पर विचार कर रही है। इन चुनावों के नतीजे 4 मई को आएंगे।
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2023 में इस कानून को मिली थी मंजूरी
महिला आरक्षण का प्रावधान 2023 में संविधान संशोधन के जरिये लाया गया था, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है। यह व्यवस्था सीमांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू होगी। प्रस्ताव के अनुसार, लोकसभा की कुल सीटें बढ़ाकर 816 की जा सकती हैं और इनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं को आरक्षण दिया जाएगा। नए सीमांकन का आधार 2011 की जनगणना होगी और राज्यों की विधानसभाओं में भी इसी तरह सीटों का बंटवारा किया जाएगा। संसद से मंजूरी मिलने के बाद ये बदलाव 31 मार्च 2029 से लागू हो सकते हैं। सितंबर 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इस कानून को मंजूरी दी थी।
संसद और राज्यसभा में कितनी बढ़ेगी महिलाओं की संख्या?
अगर महिला आरक्षण लागू होता है तो संसद में महिलाओं की संख्या काफी बढ़ जाएगी। अभी लोकसभा में 543 सांसदों में से 78 महिलाएं हैं। आरक्षण लागू होने के बाद यह संख्या करीब 181 हो सकती है। वहीं राज्यसभा में 245 सदस्यों में अभी 32 महिला सांसद हैं, जो बढ़कर करीब 80 तक पहुंच सकती हैं।
क्या 2027 के विधानसभा चुनावों में लागू होगा महिला आरक्षण?
सरकार की योजना है कि 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों में महिला आरक्षण लागू हो जाए। अगर ऐसा होता है तो इन राज्यों की विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इससे 2029 के लोकसभा चुनाव में भी महिला आरक्षण लागू करने का रास्ता साफ हो सकता है।
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