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अमर उजाला शब्द सम्मान: उस्ताद शुजात हुसैन खान ने भगवान शंकर पर बंदिश गाई, कहा- शब्द संगीत को बहुत उभार देता है
Wed, 11 Feb 2026 07:32 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 11 Feb 2026 07:32 PM IST
सार
उस्ताद शुजात हुसैन खान ने अमर उजाला शब्द सम्मान कार्यक्रम में कृष्ण बिहारी नूर की गजल 'जिंदगी से बड़ी सजा ही नहीं, जुर्म क्या है पता ही नहीं' गाकर भी सभागार को झूमने पर मजबूर कर दिया।
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अमर उजाला शब्द सम्मान में उस्ताद शुजात हुसैन खान।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अमर उजाला शब्द सम्मान 2025 का बुधवार (11 फरवरी) को दिल्ली में आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान पूरी दुनिया में मशहूर सितार वादक उस्ताद शुजात हुसैन खान ने मुख्य अतिथि के तौर पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा मंच को सुशोभित किया। उन्होंने अमर उजाला शब्द सम्मान के विजेताओं को अलंकृत किया और इसके बाद अपने सितार की धुनों से कार्यक्रम में समां बांधा और दर्शकों को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में उस्ताद शुजात हुसैन खान ने भगवान शंकर पर लिखी गई बंदिश 'दर्शन देहो शंकर महादेव' को न केवल गाया, बल्कि बंदिश के सुरों को सितार के गायकी अंग के साथ पिरोया भी। उस्ताद शुजात हुसैन खान ने कृष्ण बिहारी नूर की गजल 'जिंदगी से बड़ी सजा ही नहीं, जुर्म क्या है पता ही नहीं' गाकर भी सभागार को झूमने पर मजबूर कर दिया।
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इससे पहले उन्होंने अपने संबोधन में कहा, "शब्द के बारे में मुझे ज्यादा समझ नहीं है, लेकिन मैं यह जानता हूं कि संगीत में भी वो ताकत नहीं, जो अल्फाजों में है। संगीत शब्द को और शब्द संगीत को बहुत उभार देता है।"
अमर उजाला समूह के चेयरमैन राजुल माहेश्वरी ने इस मौके पर उस्ताद शुजात हुसैन खान का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि क्या गजल, क्या शेर, क्या भजन, क्या सूफी गीत... आज शाम ऐसा कुछ नहीं बचा जो उस्ताद शुजात हुसैन के सितार और उनकी गायिकी से न निकला हो।
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कार्यक्रम में उस्ताद शुजात हुसैन खान ने भगवान शंकर पर लिखी गई बंदिश 'दर्शन देहो शंकर महादेव' को न केवल गाया, बल्कि बंदिश के सुरों को सितार के गायकी अंग के साथ पिरोया भी। उस्ताद शुजात हुसैन खान ने कृष्ण बिहारी नूर की गजल 'जिंदगी से बड़ी सजा ही नहीं, जुर्म क्या है पता ही नहीं' गाकर भी सभागार को झूमने पर मजबूर कर दिया।
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इससे पहले उन्होंने अपने संबोधन में कहा, "शब्द के बारे में मुझे ज्यादा समझ नहीं है, लेकिन मैं यह जानता हूं कि संगीत में भी वो ताकत नहीं, जो अल्फाजों में है। संगीत शब्द को और शब्द संगीत को बहुत उभार देता है।"
अमर उजाला समूह के चेयरमैन राजुल माहेश्वरी ने इस मौके पर उस्ताद शुजात हुसैन खान का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि क्या गजल, क्या शेर, क्या भजन, क्या सूफी गीत... आज शाम ऐसा कुछ नहीं बचा जो उस्ताद शुजात हुसैन के सितार और उनकी गायिकी से न निकला हो।