प्राग में अमर उजाला की मुहिम को सराहा गया
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मिर्गी को लेकर भारत में नहीं यूरोप के देशों में भी काफी भ्रम फैला है। रूस जैसे देश में बीते 5 साल में मिर्गी के 60 मरीजों ने आत्महत्या कर ली। उन्हें ऐसा लगता था कि वो अब कभी ठीक नहीं जो पाएंगे। रूस के जाने माने न्यूरोलॉजिस्ट डॉ फर्नर ने प्राग में आयोजित चार दिवसीय (11-15 सितम्बर)यूरोपियन कॉन्फ्रेंस ऑन एप्टोलॉजी में विश्व भर से आए न्यूरोलॉजी के डॉक्टरों को यह जानकारी दी। डॉक्टरों में मिर्गी के प्रति विश्वव्यापी जन जागरूकता मुहीम चलाने को लेकर सहमति बनी। सरकार और सामाजिक संगठनों की भी मदद ली जायेगी।
कांफ्रेंस में आयोजक मंडल के सदस्य डॉ वर्मी ने मंच से अमर उजाला का नाम लेकर अमर उजाला की मुहिम को सराहा। अमर उजाला ने 'बाकला दाल से ठीक हो रही काँपने (पार्किन्सन )की बीमारी' खबर को बीएचयू के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ विजय नाथ मिश्र द्वारा किये गए शोध के आधार पर छापा था। खबर छपने के बाद उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के सैकड़ों लोग डॉ विजय नाथ मिश्र के पास पहुँचे। इन मरीजों को दवा के साथ बाकला दाल खाने की सलाह दी गई। इसमें करीब 70% मरीजों को बाकला दाल के सेवन से लाभ हुआ।
कॉफ्रेंस में बीएचयू के डॉ विजय नाथ मिश्रा, डॉ आर एन चौरसिया के साथ बाकला दाल से जुड़ी खबर लिखने वाले अमर उजाला के रिपोर्टर अजीत कुमार सिंह भी कांफ्रेंस में शामिल हुए। डॉ विजय नाथ मिश्र ने कॉन्फ्रेंस में कहा कि न्यूरोलॉजिस्ट को अपना दायरा बढ़ाना चाहिए। मरीजों की अन्य दिक्कतों को भी समझ कर उसे दूर करना चाहिए। हमें उनकी कॉउंसलिंग करनी चाहिए।
मिर्गी के मरीजों के साथ छुआ छूत जैसा बर्ताव किया जाता है। उनकी शादियां नहीं हो रही हैं। डिप्रेशन में वह जान दे रहे हैं। हमें उनतक यह सन्देश पहुँचाना होगा की मिर्गी छुआ छूत नहीं है। यह नियमित दवा से ठीक होने वाली बीमारी है। 2017 में वियेना में प्रस्तावित कॉन्फ्रेंस की अगली कड़ी में मिलने का वादा कर डॉक्टरों ने एक-दूसरे से विदा ली।