तीन तलाक: सजा के प्रावधान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने तीन तलाक को अपराध करार देने वाले कानून के खिलाफ सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। एआईएमपीएलबी और कमाल फारुकी की तरफ से दायर याचिका में कहा गया कि यह कानून मुसलमानों की जिंदगी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर गलत प्रभाव डाल रहा है।
All India Muslim Personal Law Board (AIMPLB) today filed a writ petition at the Supreme Court, challenging Triple Talaq Act, criminalising the act of 'talaq-e-biddat'. Petition was filed, on their behalf, by MR Shamshad, Advocate on Record (AOR) and Supreme Court lawyer.
— ANI (@ANI) October 21, 2019
याचिका में इस आधार पर कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है कि यह मनमाना कानून है और संविधान के अनुच्छेद 14,15,20 और 21 को प्रभावित करता है। उनका कहना है कि यह हनफी के मुसलमानों पर लागू होने वाली मुस्लिम पर्सनल लॉ की गलत व्याख्या करता है।
मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 तलाक-ए-बिद्दत या तलाक के ऐसे ही किसी अन्य रूप, जिसमें मुस्लिम पति तत्काल तलाक देता है, को निरर्थक और अवैध करार देता है। यह कानून बोलकर, लिखकर, एसएमएस अथवा वाट्सऐप या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से एक बार में तीन तलाक को अवैध करार देता है। इसमें कहा गया कि ऐसा करने पर दोषी पति को तीन साल की कैद हो सकती है या उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।