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Suspension: निलंबित सांसदों ने संसद परिसर में जमाया डेरा, विशेषाधिकार समिति के पास भेजा गया डेरेक का मामला
Thu, 14 Dec 2023 05:35 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Thu, 14 Dec 2023 05:35 PM IST
सार
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने अपने राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन को निलंबित करने के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना की। साथ ही संसद की सुरक्षा में बड़ी चूक के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के तत्काल इस्तीफे की मांग की।
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टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
संसद की सुरक्षा में चूक के मामले में हंगामा करना और सदन की गरिमा की अवहेलना को लेकर लोकसभा और राज्यसभा के कुल 15 सांसदों को निलंबित कर दिया गया। इनमें निचले सदन के 14 और उच्च सदन के एक सांसद शामिल हैं। हालांकि, बाद में लोकसभा के एक सांसउ का नाम निलंबित सांसदों की सूची से हटा लिया गया।
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इसके बाद राज्यसभा में टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन और सभापति जगदीप धनखड़ के बीच तीखी नोकझोंक हुई। जिसके बाद बाद मामले को विशेषाधिकार समिति के पास जांच के लिए भेज दिया गया। इस दौरान धनखड़ ने कहा कि डेरेक का सदन में बने रहना आदेश का गंभीर उल्लंघन और जानबूझकर की गई अवहेलना है। वहीं, अपने निलंबन को लेकर टीएमसी सांसद सहित सभी निलंबित सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया है।
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राज्यसभा ने डेरेक ओ'ब्रायन का मामला विशेषाधिकार समिति के पास भेजा
सदन से निलंबन के बाद उनके खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें उनके आचरण को जांच के लिए विशेषाधिकार समिति को भेजने की मांग की गई थी। दरअसल, डेरेक के निलंबन को लेकर शुरू हुए विपक्ष के हंगामे के कारण सदन को कुछ देर के लिए स्थगित कर दिया गया था। जब शाम चार बजे राज्यसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो सभापति जगदीप धनखड़ ने निलंबित सदस्य ओ'ब्रायन को पारित आदेश के अनुपालन में सदन छोड़ने के लिए कहा। बावजूद इसके जब वे सदन से बाहर नहीं गए।
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तब धनखड़ ने कहा कहा कि ओ'ब्रायन का सदन में बने रहना आदेश का गंभीर उल्लंघन और जानबूझकर की गई अवहेलना है। इसके बाद, सदन के नेता पीयूष गोयल ने इस मुद्दे को राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजने के लिए नियम 192 के तहत एक प्रस्ताव पेश किया। जिसे सभापति ने तुरंत स्वीकार कर लिया और ध्वनि मत से पारित कर दिया। इसके बाद सभापति धनखड़ ने डेरेक ओ ब्रायन के मामले को जांच करने के लिए राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजे जाने की घोषणा की। उन्होंने समिति को रिपोर्ट के लिए तीन महीने का वक्त भी दिया है। बता दें कि सदन से निलंबन और प्रस्ताव पारित करने के बाद भी ओ'ब्रायन ने सदन नहीं छोड़ा तब सभापति ने उनसे दोबारा आग्रह किया। लेकिन जब वह न माने तो सदन को शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
टीएमसी ने डेरेक ओ'ब्रायन के निलंबन की निंदा की
वहीं, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने अपने राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन को निलंबित करने के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना की। साथ ही संसद की सुरक्षा में बड़ी चूक के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के तत्काल इस्तीफे की मांग की।
पीएम मोदी को देना चाहिए जवाब
टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि पंद्रह सांसदों को निलंबित कर दिया गया, जबकि घुसपैठियों को पास जारी करने वाले भाजपा सांसद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। क्या यह न्याय है? गृह मंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को संसद में आना चाहिए और सदन के पटल पर बयान देना चाहिए।