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Akshaya Tritiya: अक्षय तृतीया पर आप भी खरीदने जा रहे सोना तो समझ लें ये खास बातें, होगा फायदा
Tue, 29 Apr 2025 01:56 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Tue, 29 Apr 2025 01:56 PM IST
सार
वैश्विक अर्थव्यवस्था में लगातार बन रही अनिश्चितताओं के बीच सोने का दाम आसमान पर पहुंच गया है। अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए लोग सोने में निवेश कर रहे हैं, इससे भी सोने के मूल्य में तेजी आई है।
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Akshaya Tritiya 2024 Vaastu Tips
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इस वर्ष अक्षय तृतीया की तिथि 29 अप्रैल को रात 11:47 से शुरू होगी और अगले दिन यानी 30 अप्रैल को रात 9:37 तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, अक्षय तृतीया का त्योहार 30 अप्रैल को मनाया जाएगा। अक्षय तृतीया को सोना खरीदने को शुभ माना जाता है, यही कारण है कि लोग इस दिन सोना खरीदते हैं। सोना केवल आभूषण के लिए नहीं, बल्कि निवेश की दृष्टि से भी बहुत अच्छा माना जाता है, लिहाजा लोग सोने में निवेश कर बेहतर लाभ कमाने की उम्मीद करते हैं।
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वैश्विक अर्थव्यवस्था में लगातार बन रही अनिश्चितताओं के बीच सोने का दाम आसमान पर पहुंच गया है। अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए लोग सोने में निवेश कर रहे हैं, इससे भी सोने के मूल्य में तेजी आई है। दिल्ली के सर्राफा बाजार में अक्षय तृतीया के एक दिन पहले यानी मंगलवार को 24 कैरेट सोने का मूल्य 9812 रुपये प्रति एक ग्राम है। यानी दस ग्राम सोने का मूल्य 98,120 रुपये के करीब है। अक्षय तृतीया को मांग बढ़ने पर इसमें कुछ तेजी आ सकती है।
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बहुत तेजी की उम्मीद नहीं
स्वर्ण आभूषणों के व्यापारी मुन्ना लाल वर्मा ने अमर उजाला को बताया कि इस समय सोने के दाम अपने सर्वोच्च स्तर पर हैं। यह पहले ही लोगों की खरीद क्षमता से बाहर जा चुका है। ऐसे में अक्षय तृतीया पर सोने के सिक्कों और आभूषणों की बिक्री सीमित ही रहने के अनुमान हैं। इस वर्ष अक्षय तृतीया को विवाह का शुभ मुहूर्त भी नहीं बन पाया है, सोने की मांग में कमी होने का यह भी एक कारण हो सकता है।
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इस समय सोने में तेजी का सबसे बड़ा कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में आई अनिश्चितता है। अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ वॉर, रूस-यूक्रेन युद्ध और पेट्रोल कीमतों में आ रही तेजी के कारण सोने को लोग सुरक्षित निवेश की तरह देख रहे हैं। भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में निवेशकों ने सोने में पैसा लगाया है। यही कारण है कि सोने की मांग लगातार तेज बनी हुई है।
बाजार ने क्यों दिखाई तेजी?
आर्थिक मामलों के जानकार डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि अमेरिका के टैरिफ वॉर ने दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी थीं। लेकिन अब यह समझ आ रहा है कि अमेरिका ने इसे एक रणनीतिक कदम की तरह इस्तेमाल किया था। पहले भारत और अमेरिका ने आपसी बातचीत से टैरिफ वॉर को कम करते हुए एक उचित हल पर निकालने के लिए काम किया था। अब चीन और अमेरिका के बीच भी बातचीत बढ़ाने और टैरिफ वॉर का एक उचित हल निकालने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि यदि निवेशकों को इस बात का भरोसा होता है कि अमेरिका का टैरिफ वॉर ज्यादा खराब स्थिति में नहीं जाएगा और इसका उचित हल निकाल लिया जाएगा तो निवेशक बाजार में वापसी कर सकते हैं। सोमवार-मंगलवार को शेयर बाजार में आई तेजी इसी बात का संकेत दे रही है। अब दुनिया के सभी प्रमुख बाजारों समेत भारत के बीएसई और एनएसई भी बेहतर करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इससे यह साबित होता है कि निवेशकों का बाजार पर भरोसा लौट रहा है।
लेकिन यह खबर सोने में निवेश को प्रोत्साहित नहीं करेगी। यदि निवेशकों को सोने की बजाय बाजार में निवेश करने पर ज्यादा लाभ की उम्मीद बनेगी तो वे शेयर बाजार को प्राथमिकता देंगे। ऐसे में सोने की चमक बहुत तेजी से आगे नहीं बढ़ेगी। इसका यह आशय नहीं कि यह कमजोर पड़ेगी, लेकिन इसकी तेजी में कमी आ सकती है।
तनाव बढ़ा तो बढ़ सकती है कीमत
आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति ज्यादा बढ़ती है तो इससे महंगाई बढ़ने के आसार बन सकते हैं। इसमें रुपये के और अधिक कमजोर होने की संभावना भी बन सकती है। यदि लोग इस मानसिकता को देखते हुए सुरक्षित निवेश की ओर जाने की कोशिश करेंगे तो इस परिस्थिति में सोने की मांग और इसके मूल्य में वृद्धि हो सकती है।