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Ajay Kumar Bhalla: मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को नगालैंड की भी मिली जिम्मेदारी, संभाला अतिरिक्त प्रभार
Mon, 25 Aug 2025 02:01 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोहिमा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोहिमा
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Mon, 25 Aug 2025 02:01 PM IST
सार
मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने नगालैंड के 22वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। उन्हें यह प्रभार ला गणेशन के निधन के बाद मिला। शपथ समारोह में मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो और कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। हालांकि, पांच प्रमुख जनजातियों ने आरक्षण नीति की समीक्षा की मांग पूरी न होने पर कार्यक्रम का बहिष्कार किया।
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अजय कुमार भल्ला (मणिपुर और नगालैंड के राज्यपाल)
- फोटो : ANI
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विस्तार
मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने सोमवार को नगालैंड के 22वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। उन्हें यह अतिरिक्त प्रभार राज्यपाल ला गणेशन के निधन के बाद दिया गया। शपथ ग्रहण समारोह कोहिमा स्थित राजभवन में आयोजित हुआ, जहां गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अशुतोष कुमार ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
शपथ ग्रहण समारोह में नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो, उपमुख्यमंत्री टी.आर. जेलियांग और वाई. पैटन, राज्य के मंत्री, विधायक, वरिष्ठ नौकरशाह और अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए। शपथ लेने के बाद भल्ला ने मुख्यमंत्री रियो और राज्य मंत्रिमंडल से मुलाकात की। उन्होंने समारोह के हिस्से के रूप में गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण भी किया।
राजनीतिक-सामाजिक प्रतिनिधियों का स्वागत
शपथ ग्रहण कार्यक्रम नगालैंड के मुख्य सचिव सेंतियेंगर इमचेन की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इसके बाद राजभवन में स्वागत समारोह हुआ जिसमें राजनीतिक नेताओं, जनजातीय संगठनों, चर्च प्रतिनिधियों और सिविल सोसायटी के सदस्यों ने नए राज्यपाल को शुभकामनाएं दीं। यह अवसर नगालैंड की राजनीतिक और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बना।
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ये भी पढ़ें- अपने ही कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची महाराष्ट्र सरकार, जुडपी जंगल से जुड़ा मामला
जनजातीय संगठनों का बहिष्कार
हालांकि इस समारोह से पांच प्रमुख जनजातियों के प्रतिनिधि अनुपस्थित रहे। आरक्षण नीति की समीक्षा समिति के सदस्य आओ, अंगामी, लोथा, रेंगमा और सुमी जनजातियों के प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम का बहिष्कार किया। वे चार दशक पुरानी आरक्षण नीति में संशोधन की मांग कर रहे हैं। इन जनजातियों ने स्वतंत्रता दिवस समारोह का भी बहिष्कार किया था।
ये भी पढ़ें- 'दिव्यांगों का मजाक उड़ाने पर अल्लाहबादिया और समय मांगें माफी'; सरकार को गाइडलाइन बनाने का 'सुप्रीम' आदेश
आरक्षण नीति पर टकराव बरकरार
सरकार ने आरक्षण नीति की समीक्षा के लिए एक आयोग के गठन की घोषणा की है, लेकिन समिति ने इसे ठुकरा दिया। उनका कहना है कि इस आयोग में जनजातीय संगठनों और सिविल सोसायटी को भी शामिल किया जाना चाहिए। समिति ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे किसी भी सरकारी कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेंगे। यह मुद्दा आने वाले समय में नगालैंड की राजनीति और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
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शपथ ग्रहण समारोह में नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो, उपमुख्यमंत्री टी.आर. जेलियांग और वाई. पैटन, राज्य के मंत्री, विधायक, वरिष्ठ नौकरशाह और अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए। शपथ लेने के बाद भल्ला ने मुख्यमंत्री रियो और राज्य मंत्रिमंडल से मुलाकात की। उन्होंने समारोह के हिस्से के रूप में गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण भी किया।
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राजनीतिक-सामाजिक प्रतिनिधियों का स्वागत
शपथ ग्रहण कार्यक्रम नगालैंड के मुख्य सचिव सेंतियेंगर इमचेन की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इसके बाद राजभवन में स्वागत समारोह हुआ जिसमें राजनीतिक नेताओं, जनजातीय संगठनों, चर्च प्रतिनिधियों और सिविल सोसायटी के सदस्यों ने नए राज्यपाल को शुभकामनाएं दीं। यह अवसर नगालैंड की राजनीतिक और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बना।
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जनजातीय संगठनों का बहिष्कार
हालांकि इस समारोह से पांच प्रमुख जनजातियों के प्रतिनिधि अनुपस्थित रहे। आरक्षण नीति की समीक्षा समिति के सदस्य आओ, अंगामी, लोथा, रेंगमा और सुमी जनजातियों के प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम का बहिष्कार किया। वे चार दशक पुरानी आरक्षण नीति में संशोधन की मांग कर रहे हैं। इन जनजातियों ने स्वतंत्रता दिवस समारोह का भी बहिष्कार किया था।
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आरक्षण नीति पर टकराव बरकरार
सरकार ने आरक्षण नीति की समीक्षा के लिए एक आयोग के गठन की घोषणा की है, लेकिन समिति ने इसे ठुकरा दिया। उनका कहना है कि इस आयोग में जनजातीय संगठनों और सिविल सोसायटी को भी शामिल किया जाना चाहिए। समिति ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे किसी भी सरकारी कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेंगे। यह मुद्दा आने वाले समय में नगालैंड की राजनीति और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
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