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India-France: गोवा में हुआ 'चार्ल्स डी गॉल' का ठहराव, हिंद-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र-स्थिर बनाना है उद्देश्य

Sat, 04 Jan 2025 11:55 PM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी (गोवा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी (गोवा) Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 04 Jan 2025 11:55 PM IST
सार

फ्रांसीसी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (सीएसजी) के कमांडर रियर एडमिरल जैक्स मैलार्ड ने कहा कि उनका देश क्षेत्र के सभी भागीदारों के साथ एक स्वतंत्र, खुला और स्थिर हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देना चाहता है। उन्होंने कहा कि मिशन का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के सहयोगियों के साथ आपसी संचालन की क्षमता को बढ़ाना है।

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Aircraft carrier Charles de Gaulle stopped Goa officials says French Navy wants stable Indo-Pacific region
गोवा के मोरमुगाओ पोर्ट पर रुका फ्रांसीसी नौसेना का विमानवाहक पोत चार्ल्स डी गॉल - फोटो : वीडियो ग्रैब/एएनआई

विस्तार

 फ्रांस का परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विमानवाहक पोत चार्ल्स डी गॉल गोवा के मोरमुगाओ पोर्ट पर रुका हुआ है। इसके साथ राफेल मरीन लड़ाकू विमान भी हैं। आगामी कुछ दिनों में, यह विमान भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों के साथ अभ्यास करेंगे। इसके बाद, चार्ल्स डी गॉल प्रशांत महासागर से लौटते समय द्विपक्षीय वरुण अभ्यास का 42वां संस्करण आयोजित करेगा, जिसमें कई सहयोगी देशों के साथ अभ्यास शामिल होंगे। 

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फ्रांसीसी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (सीएसजी) के कमांडर रियर एडमिरल जैक्स मैलार्ड ने कहा कि उनका देश क्षेत्र के सभी भागीदारों के साथ एक स्वतंत्र, खुला और स्थिर हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देना चाहता है। उन्होंने कहा कि मिशन का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के सहयोगियों के साथ आपसी संचालन की क्षमता को बढ़ाना है। उन्होंने कहा, 'आपसी संचालन का मतलब है साझेदारी, और साझेदारी का मतलब है सुरक्षा।' 
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जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा मजबूत करना उद्देश्य
उनका कहना था कि फ्रांसीसी नौसेना का लक्ष्य प्रमुख जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना है। इसके अलावा, उनका स्थायी उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में फ्रांसीसी नागरिकों और हितों की सुरक्षा करना भी है। मैलार्ड ने बताया कि फ्रांसीसी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप यूरोप में एक खास सैन्य संपत्ति है, जो फ्रांस को अपने क्षेत्र और नागरिकों की रक्षा करने में मदद करता है। यह समूह विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे संकट प्रबंधन और युद्ध।
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जैक्स ने आगे कहा, 'एक ही तरह के विमानों के साथ मिलकर काम करने का मतलब है कि हम एक-दूसरे के साथ एक जैसे सबक और प्रक्रियाएं साझा कर सकते हैं। इससे हम एक ही उपकरण का बेहतर इस्तेमाल करना सीखेंगे। जब दोनों नौसेनाएं एक ही विमान पर काम करेंगी, तो यह उन्हें और करीब लाएगा।' 

छठी पीढ़ी का विमान सिर्फ कागजों पर: गिलियूम डेनिस
इसके अलावा, चीनी छठी पीढ़ी के विमानों और राफेल के बारे में पूछे जाने पर, फ्रांसीसी नौसेना के कैरियर एयर विंग कमांडर गिलियूम डेनिस ने कहा, 'छठी पीढ़ी का विमान अभी भी एक सपना है, लेकिन जब हम 5वीं पीढ़ी की बात करते हैं, तो राफेल एक खास मामला है। राफेल पूरी तरह से स्टेल्थी नहीं है, लेकिन इसे बिल्कुल नए तरीके से बनाया गया है। यह एक ही समय में सभी प्रकार के मिशन करने में सक्षम है, जो 5वीं पीढ़ी के विमानों की खासियत है। हम इसे हर दो साल में अपडेट करने में सक्षम हैं। राफेल की मेटियोर मिसाइल, जो हवा से हवा में मार करती है, शायद दुनिया की सबसे अच्छी मिसाइलों में से एक है। अभी छठी पीढ़ी का विमान सिर्फ कागजों पर है।'

यह है चार्ल्स डी गॉल विमान वाहक पोत
फ्रांस का परमाणु ऊर्जा से संचालित विमान वाहक पोत चार्ल्स डी गॉल और इसका पूरा कैरियर स्ट्राइक (सीएसजी) ग्रुप (सीएसजी) एक विशाल नौसैनिक बेड़ा है। इस विमानवाहक पोत में बड़ी संख्या में विध्वंसक, फ्रिगेट और अन्य जहाज होते हैं।

फ्रांस का प्रमुख साझेदार रहा है भारत
फ्रांसीसी दूतावास ने कहा कि भारत 1998 से फ्रांस का सबसे प्रमुख रणनीतिक साझेदार रहा है और उत्कृष्ट भारत-फ्रांस सैन्य सहयोग की विशेषता कई द्विपक्षीय अभ्यास जैसे कि जमीन पर शक्ति, समुद्र में वरुण और हवा में गरुड़ हैं। भारत ने फ्रांसीसी नौसेना के जहाजों द्वारा किए गए कई परिचालन स्टॉपओवर की मेजबानी भी  की है। यह 2022 से 16 बंदरगाह कॉल हैं।  हिंद महासागर से जुड़े राष्ट्रों के रूप में फ्रांस और भारत नियमित रूप से समुद्री सुरक्षा में योगदान देने के लिए सहयोग करते हैं।

हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी का सदस्य है फ्रांस
दूतावस ने यह भी कि 2008 से फ्रांस हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (IONS) का सदस्य रहा है। इसकी शुरुआत भारत ने की थी और यह हिंद महासागर के देशों की 25 नौसेनाओं को एक साथ लाता है। इस मंच का उद्देश्य समुद्री मुद्दों की एक श्रृंखला से निपटने में सामूहिक प्रभावशीलता को बढ़ाना है। इसका उद्देश्य अवैध तस्करी, अवैध मछली पकड़ना, समुद्र में खोज और बचाव शामिल है।


फ्रांस ने 2021 से 2023 तक फोरम की अध्यक्षता संभाली। वहीं हिंद महासागर में फ्रांस कई मिशनों में सक्रिय रूप से शामिल है। इसमें समुद्री डकैती और मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए यूरोपीय अटलांटा ऑपरेशन, अवैध तस्करी से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक गठबंधन संयुक्त टास्क फोर्स 150, और स्वेज से होर्मुज तक समुद्री सुरक्षा और नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए यूरोपीय संघ (ईयू) का एस्पाइड्स ऑपरेशन। ऑपरेशन अटलांटा यूरोपीय संघ की साझा सुरक्षा और रक्षा नीति (सीएसडीपी) के तहत एक महत्वपूर्ण समुद्री सुरक्षा अभियान है।



 

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