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पर्यावरण संरक्षण के लिए बायो फ्यूल एयरक्राफ्ट की ओर बढ़ रही वायुसेना: एयरचीफ मार्शल भदौरिया
Tue, 08 Oct 2019 01:58 PM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Tue, 08 Oct 2019 01:58 PM IST
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राकेश कुमार सिंह भदौरिया
- फोटो : IAF Twitter
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वायुसेना की 87वीं वर्षगांठ पर हिण्डन एयरफोर्स स्टेशन पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वायुसेना दिवस के कार्यक्रम के दौरान आज हमारे जवानों ने लड़ाकू विमानों के साथ हवा में अद्भुत करतब दिखाए।
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भारतीय वायुसेना की स्थापना 8 अक्तूबर 1932 को हुई थी। हर साल की तरह इस बार भी हिंडन एयरबेस पर स्थापना दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया गया। नित नई चुनौतियों का सामना करने वाली वायुसेना का सम्मान बढ़ाने के लिए आज नौसेना अध्यक्ष करमवीर सिंह और थल सेना अध्यक्ष बिपिन रावत भी कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। दोनों अध्यक्षों का जनरल सैल्यूट के साथ स्वागत किया गया। ग्रुप कैप्टन सचिन तेंदुलकर भी कार्यक्रम में पहुंचे।
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वहीं, वायुसेना की वर्षगांठ पर वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने कहा कि भारतीय वायुसेना भविष्य में आने वाली चुनौतियों के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने कहा कि वायुसेना अब बायो फ्यूल एयरक्राफ्ट को विकसित करने की तैयारी में लग गई है। इसके साथ ही मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए भारतीय फर्मों को प्राथमिकता दी जा रही है।
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वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने वायुसेना की 87वीं वर्षगांठ के अवसर पर गाजियाबाद के हिण्डन एयरफोर्स स्टेशन में यह बात कही। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि पिछला एक साल वायुसेना के लिए गौरवशाली रहा है। बालाकोट एयर स्ट्राइक ने दुनिया को भारतीय वायुसेना की ताकत को दिखाया।
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि वायुसेना किसी भी परिस्थिति के लिए हमेशा तैयार है। उन्होंने कहा कि अब समय है भारतीय वायुसेना भविष्य की ओर देखें। ऐसे में वायुसेना बायो फ्यूल एयरक्राफ्ट को विकसित करने का प्रयास कर रही है। इससे पर्यावरण को संरक्षण में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि रोहिणी रडार, स्पाइडर रडार सिस्टम इंडिजिनस तकनीक का उदाहरण है। इसी तरह अब मेक इन इंडिया के तहत जल्द ही कई हल्के हेलिकॉप्टर और रडार विकसित किए जाएंगे।