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CAA: असदुद्दीन ओवैसी ने सीएए के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका, मांग- कानून लागू करने पर लगे रोक

Sat, 16 Mar 2024 04:48 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Sat, 16 Mar 2024 04:48 PM IST
सार

याचिका में ओवैसी ने नागरिकता संशोधन कानून को लागू करने पर रोक लगाने की मांग की है। ओवैसी ने याचिका में मांग की है कि सीएए कानून के तहत किसी को भी नागरिकता न दी जाए। 

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Aimim chief asaduddin owaisi file plea in supreme court against caa demand stay on implementation
एआईएमआईएम चीफ ओवैसी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में ओवैसी ने नागरिकता संशोधन कानून को लागू करने पर रोक लगाने की मांग की है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने भी सीएए के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की हुई है। हाल ही में सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर देशभर में सीएए लागू कर दिया है। 
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क्या बोले असदुद्दीन ओवैसी
सीएए के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने पर ओवैसी ने कहा कि 'हमारा मामला सुप्रीम कोर्ट में है। सरकार ने कहा है कि नोटिफिकेशन जारी हो गया है, ऐसे में हमारे लिए सुप्रीम कोर्ट जाना जरूरी हो गया है। अगर सरकार ने इस असंवैधानिक कानून के आधार पर नागरिकता देनी शुरू कर दी तो यह नुकसानदायक हो सकता है। सरकार का कहना है कि अगर आप इस्लाम को मानने वाले हैं तो हम आपको नागरिकता नहीं देंगे। हम इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए हैं। सरकार ने 2019 में कानून पास किया था और सरकार ने इसे ऐसे ही रखा और जब चुनाव का एलान होने वाला था तो चुनाव को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इसे लागू कर दिया। भाजपा सरकार चाहती है कि गरीब और मुसलमान बिना किसी देश के रहें। किसी को भी सीएए को एनपीआर और एनआरसी से अलग करके नहीं देखना चाहिए। गृह मंत्री को बताना चाहिए कि क्या उन्होंने नहीं कहा था कि सीएए के बाद एनआरसी लागू होगा?'
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सीएए के खिलाफ शीर्ष अदालत में दायर हैं 200 से ज्यादा याचिकाएं
सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में असदुद्दीन ओवैसी ने मांग की है कि सीएए कानून के तहत सरकार किसी को भी नागरिकता संशोधन कानून की धारा 6बी के तहत नागरिकता प्रदान न करे। सीएए के खिलाफ दायर याचिकाओं में सीएए कानून को संविधान के खिलाफ और भेदभावपूर्ण बताया गया है। शीर्ष अदालत में नागरिकता संशोधन कानून 2019 के खिलाफ 200 से ज्यादा याचिकाएं दायर हुई हैं। सीएए कानून को साल 2019 में ही संसद से मंजूरी मिली थी और उसके बाद से ही इस कानून का विरोध हो रहा है। 


क्यों हो रहा है सीएए का विरोध
नागरिकता संशोधन कानून 2019 के तहत सरकार पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होकर 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आने वाले शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। इस कानून के तहत हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान है, लेकिन इस कानून से मुस्लिम वर्ग को बाहर रखा गया है। इसी वजह से इस कानून का विरोध हो रहा है। कानून का विरोध करने वाले लोगों का आरोप है कि इसमें धर्म के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है, जो कि भारतीय संविधान के खिलाफ है। हालांकि सरकार का तर्क है कि सीएए में किसी की नागरिकता छीनने का प्रावधान नहीं है और सरकार ने साफ कहा है कि सीएए कानून वापस नहीं होगा। 
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