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हर 10 में से एक बुजुर्ग की मौत फ्रेक्चर से, एम्स ने किया अपनी रिपोर्ट में खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Fri, 07 Sep 2018 04:24 AM IST
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युवा भारत के बुजुर्ग स्वास्थ्य के लिहाज से खतरे में हैं। 65 वर्ष की उम्र से ऊपर के वरिष्ठ नागरिकों को किसी न किसी फ्रेक्चर की परेशानी से जूझना पड़ रहा है। दिल और दिमाग की तरह ये फ्रेक्चर भी इन बुजुर्गों की मौत का कारण बन रहे हैं। यह खुलासा देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स के डॉक्टरों ने किया है।
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बुजुर्गों को कूल्हा, घुटना और कलाई के फ्रेक्चर से बचाने के लिए एम्स ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को एक प्रस्ताव भेजा है। इसके तहत डॉक्टरों ने साल 2050 तक भारत में हर 3 में से एक बुजुर्ग मरीज की मौत फ्रैक्चर से होने का दावा किया है। अभी यह स्थिति 10 में से एक बताई गई है।
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एम्स ने प्रस्ताव में मांग की है कि सरकार बुजुर्गों में फ्रैक्चर को लेकर जागरूकता लाए। फ्रैक्चर होने के बाद 48 घंटे अहम होते हैं, लेकिन कई बार मरीज देरी से अस्पताल पहुंचता है। इसलिए जिला स्तर पर अस्पतालों को भी इस दिशा में प्रशिक्षित करने और सुविधाओं से युक्त करने की जरूरत है। देश के हर राज्य में बुजुर्गों के लिए एम्स की तरह अस्पताल बनाया जाए।
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