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Railways: रेलवे के किचन में चूहे-कॉकरोच की खैर नहीं, AI तुरंत भेजेगा शिकायत, यहां से होगी 800 किचन पर नजर
Sat, 26 Oct 2024 05:16 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Sat, 26 Oct 2024 05:16 PM IST
सार
Indian Railway: देश भर में रेलवे के ऐसे 800 से ज्यादा किचन है। जिनमें चूहे और कॉकरोच की शिकायत आए दिन सामने आती रहती है। कई बार रेलवे और आईआरसीटीसी को यह भी शिकायत मिली की ट्रेनों में खाना बनाने वाले कर्मचारी हाथों में दस्ताने नहीं पहनते है।
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भारतीय रेल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारतीय रेलवे पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल रेल यात्रियों के खाने की गुणवत्ता और साफ सफाई को बनाए रखने के लिए करने जा रहा है। त्योहारी सीजन में ट्रेनों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे ने अपने 297 किचन में एआई का प्रयोग शुरू कर दिया है।
दरअसल, देश भर में रेलवे के ऐसे 800 से ज्यादा किचन है। जिनमें चूहे और कॉकरोच की शिकायत आए दिन सामने आती रहती है। कई बार रेलवे और आईआरसीटीसी को यह भी शिकायत मिली की ट्रेनों में खाना बनाने वाले कर्मचारी हाथों में दस्ताने नहीं पहनते है। वहीं किचन कैप पहनने से हुए नजर नहीं आते हैं। लेकिन रेलवे और आईआरसीटीसी अब ऐसे मामले में सख्ती बरतने जा रहा है। स्टेशनों के रसाई घरो में सभी नियमों का पालन हर वक्त हो इसलिए रेलवे ने इसके लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लिया है।
आईआरसीटीसी के वरिष्ठ अधिकारी आनंद झा का कहना है कि, एआई के प्रयोग के लिए सबसे पहले आईआरसीटीसी के दिल्ली स्थित हेड ऑफिस में एक वॉर रूम बनाया गया। इस वॉर रूम में कई बड़ी बड़ी स्क्रीनें लगाई गई है। एक-एक स्क्रीन में एक साथ 12, 24 या 48 किचन रियल टाइम में दिख सकते हैं। वॉर रूम की इन स्क्रीनों से देश भर के 297 किचन को लाईव जोड़ दिया गया। ऐसे में इन रसोई घरों में क्या हो रहा है ये रियल टाइम में आईआरसीटीसी हेड क्वार्टर में बैठे कर्मचारी दिन रात देखा करते है। वहीं, अब अगर किचन में कोई कर्मचारी बिना किचन कैप या बिना ग्लव्स के प्रवेश करेगा तो उसके इंचार्ज को ऑटोमेटिक सिस्टम के माध्यम से शिकायत पहुंच जाएगी। इस तरह की और भी लापरवाही होती है तो एआई तुरंत शिकायत कर देगा। इससे रेलवे के साथ साथ आम यात्रियों को भी फायदा मिलेगा।
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एआई ऐसे करेगा निगरानी
अधिकारियों के अनुसार, रेलवे के कई सारे बेस किचन है। सभी में फोन कर शिकायत दर्ज करना आसान नहीं था। इसलिए रेलवे और आईआरसीटीसी ने एआई का प्रयोग शुरू किया है। अब एआई जैसे ही किसी किचन में चूहा देखता है वैसे ही वो संबंधित किचन को शिकायत का एक टिकट भेज देता है। इस शिकायती टिकट में शिकायत का समय तारीख सभी डीटेल्स मौजूद होता है। वहीं जब बेस किचन में कॉकरोच दिखाई देता है तो भी एआई इसी तरह की प्रक्रिया अपनाता है।
यही नहीं अगर किसी किचन में झाड़ू तो लग गई और पोंछा नहीं लगा तब भी एआई शिकायती टिकट भेज देता है। अगर निर्धारित समय पर झाड़ू पोछा नहीं हुआ या डीप क्लीनिंग नहीं हुई तो भी एआई अपनी नाराजगी जाहिर कर देता है। नियम के अनुसार संबंधित रसोई इंचार्ज को शिकायत का रेक्टीफिकेशन करना और हेड क्वार्टर को लापरवाही के लिए जवाब भेजना पड़ता है।
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दरअसल, देश भर में रेलवे के ऐसे 800 से ज्यादा किचन है। जिनमें चूहे और कॉकरोच की शिकायत आए दिन सामने आती रहती है। कई बार रेलवे और आईआरसीटीसी को यह भी शिकायत मिली की ट्रेनों में खाना बनाने वाले कर्मचारी हाथों में दस्ताने नहीं पहनते है। वहीं किचन कैप पहनने से हुए नजर नहीं आते हैं। लेकिन रेलवे और आईआरसीटीसी अब ऐसे मामले में सख्ती बरतने जा रहा है। स्टेशनों के रसाई घरो में सभी नियमों का पालन हर वक्त हो इसलिए रेलवे ने इसके लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लिया है।
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आईआरसीटीसी के वरिष्ठ अधिकारी आनंद झा का कहना है कि, एआई के प्रयोग के लिए सबसे पहले आईआरसीटीसी के दिल्ली स्थित हेड ऑफिस में एक वॉर रूम बनाया गया। इस वॉर रूम में कई बड़ी बड़ी स्क्रीनें लगाई गई है। एक-एक स्क्रीन में एक साथ 12, 24 या 48 किचन रियल टाइम में दिख सकते हैं। वॉर रूम की इन स्क्रीनों से देश भर के 297 किचन को लाईव जोड़ दिया गया। ऐसे में इन रसोई घरों में क्या हो रहा है ये रियल टाइम में आईआरसीटीसी हेड क्वार्टर में बैठे कर्मचारी दिन रात देखा करते है। वहीं, अब अगर किचन में कोई कर्मचारी बिना किचन कैप या बिना ग्लव्स के प्रवेश करेगा तो उसके इंचार्ज को ऑटोमेटिक सिस्टम के माध्यम से शिकायत पहुंच जाएगी। इस तरह की और भी लापरवाही होती है तो एआई तुरंत शिकायत कर देगा। इससे रेलवे के साथ साथ आम यात्रियों को भी फायदा मिलेगा।
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एआई ऐसे करेगा निगरानी
अधिकारियों के अनुसार, रेलवे के कई सारे बेस किचन है। सभी में फोन कर शिकायत दर्ज करना आसान नहीं था। इसलिए रेलवे और आईआरसीटीसी ने एआई का प्रयोग शुरू किया है। अब एआई जैसे ही किसी किचन में चूहा देखता है वैसे ही वो संबंधित किचन को शिकायत का एक टिकट भेज देता है। इस शिकायती टिकट में शिकायत का समय तारीख सभी डीटेल्स मौजूद होता है। वहीं जब बेस किचन में कॉकरोच दिखाई देता है तो भी एआई इसी तरह की प्रक्रिया अपनाता है।
यही नहीं अगर किसी किचन में झाड़ू तो लग गई और पोंछा नहीं लगा तब भी एआई शिकायती टिकट भेज देता है। अगर निर्धारित समय पर झाड़ू पोछा नहीं हुआ या डीप क्लीनिंग नहीं हुई तो भी एआई अपनी नाराजगी जाहिर कर देता है। नियम के अनुसार संबंधित रसोई इंचार्ज को शिकायत का रेक्टीफिकेशन करना और हेड क्वार्टर को लापरवाही के लिए जवाब भेजना पड़ता है।