त्रिपुरा के सुनहरे संकेतों से भाजपा को दिख रही पश्चिम बंगाल में आधार बढ़ने की उम्मीद
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त्रिपुरा से भगवा परिवार को मिल रहे सुनहरे संकेतों के बीच भाजपा को पश्चिम बंगाल में भी आधार बढ़ने की उम्मीद दिख रही है। पार्टी रणनीतिकारों का कहना है कि त्रिपुरा की जीत की हवा पश्चिम बंगाल पर भी असर करेगी। इसकी वजह गिनाते हुए पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि त्रिपुरा में बंगाली मतदाताओं की भरमार है। यदि वहां भाजपा जीतती है तो इसका मनोवैज्ञानिक असर न सिर्फ सूबे के मतदाताओं पर बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं पर भी पड़ेगा।
पश्चिम बंगाल के बंगाली वोटरों के बीच भाजपा के प्रति विश्वास पैदा होगा। वैसे भी उपचुनाव के परिणामों के बाद भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं में उत्साह है। वाम दल और कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए भाजपा अब पश्चिम बंगाल में नंबर दो की पार्टी बन गई है। ममता बनर्जी से मुकाबला करने और सूबे में भाजपा को नंबर वन बनाने की कवायद में भाजपा ने कई स्तर की रणनीति बनाई है।
सूबे के राजनीतिक स्थितियों का आंकलन कर पार्टी को चेहरे का अभाव नजर आ रहा है। तो ममता के सामने मुकाबले में आने के लिए करीब 10 से 15 प्रतिशत वोट अपने पाले में करने की विशाल चुनौती भी नजर आ रही है। मगर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भरोसा है कि समय आने तक पार्टी इन चुनौतियों पर पार पा लेगी। इसके लिए भाजपा अध्यक्ष ने व्यूह रचना बना रखी है।
बताया जा रहा है कि शाह की व्यूह रचना को जमीन पर अंजाम देने की कवायद में प्रदेश प्रभारी एवं राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश दमखम से जुटे हुए हैं। शिवप्रकाश सूबे में नीचले स्तर पर संगठन की बैठकों में भाग लेकर पार्टी को मजबूत बनाने में जुटे हैं। तो विजयवर्गीय दूसरे दलों के दमदार नेताओं को साधने में जुटे हैं।
संगठन को मजबूत बनाकर 10 फीसदी वोट बढ़ाने का शाह ने रखा लक्ष्य
वाम और कांग्रेस को झटका देकर करीब 25 प्रतिशत वोट के साथ पश्चिम बंगाल की राजनीति में नंबर दो का तगमा हासिल कर चुकी भाजपा की रणनीति संगठन का विस्तार कर अपने आधार वोट में 10 प्रतिशत का इजाफा करने की है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि आधार वोटों में 10 प्रतिशत का इजाफा होते ही पार्टी सूबे में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को पटखनी देती नजर आएगी। इसे अंजाम देने के लिए अमित शाह ने सूबे के मैदान पर पार्टी के विस्तारकों (पूरे समय पार्टी का कार्य करने वाले) की फौज उतार रखी है।
सूत्र बताते हैं कि राज्य की 42 लोकसभा में से 35 पर ध्यान केंद्रित करते हुए शाह ने इन क्षेत्रों में वरिष्ठ विस्तारकों को मैदान में छोड़ रखा है। ये विस्तारक लोकसभा 2019 तक अपने आवंटित क्षेत्रों में ही कार्य करेंगे। तो विधानसभा चुनाव 2021 को ध्यान में रखते हुए अमित शाह ने सूबे की 249 विधानसभा सीटों में से 208 पर ध्यान केंद्रित कर रखा है। इन हर विधानसभा सीटों पर एक-एक विस्तारक लगाया है। इन विस्तारकों को बूथ स्तर पर पार्टी को खड़ा करने की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रदेश की राजनीति को देख रहे भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार पार्टी ने सूबे की जिन 208 विधानसभा सीटों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। उनमें 50 प्रतिशत बूथों पर 4-5 सदस्यों की बूथ कमेटी बनी हुई है। अगले 6 माह में इन बूथों पर समिति सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 10 से 11 करने की है। तो शेष बचे बूथों का भी समय तक गठन कर लिया जाएगा। पार्टी की रणनीति हर बूथ पर 10 से 11 कार्यकर्ताओं की फौज तैयार करने की है।
उधार के नेताओं से खत्म होगा चेहरे का टोटा
पश्चिम बंगाल में चेहरों का टोटा खत्म करने के लिए भाजपा ने दूसरे दलों के दमदार नेताओं पर नजर जमा रखी है। लोकसभा चुनाव 2019 से 6 माह पहले एक-एक कर इन नेताओं को भाजपा अपने दल की सदस्यता देगी। कैलाश विजयवर्गीय दसरे दलों के नेताओं से लगातार संपर्क और समन्वय बनाए हुए हैं। विधानसभा स्तर पर भी दूसरे दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को थोक में अपने पाले में करने की रणनीति है। पार्टी को इस अभियान में ममता से अगल होकर आए मुकूल राय से लाभ नजर आ रहा है।
भाजपा नेता के अनुसार अभी ममता के भय के वजह से नेता तृणमूल का साथ नहीं छोड़ रहे हैं। मगर चुनाव से 5-6 माह पहले वे थोक में भागेंगे। इससे भाजपा को कई चेहरे मिल जाएंगे। यही वजह है कि भाजपा का जोर सबसे ज्यादा अपने संगठन को मजबूत बनाने पर है। उसे मालूम है कि संगठन मजबूत हो जाए तो माहौल बनाने के लिए पीएम मोदी के चेहरे का कोई शानी नहीं है।