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18 साल में पहली बार 12 बजे रात तक चली कार्यवाही, रेल अनुदान पर हुई लोकसभा में चर्चा

Thu, 11 Jul 2019 09:05 PM IST
Gaurav Pandey हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Thu, 11 Jul 2019 09:05 PM IST
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After chaos in MPs to speak, All night discussions on railway grants
संसद (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

लोकसभा ने गुरुवार को वर्ष 2019-20 के लिए रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर देर रात तक बैठकर चर्चा पूरी की। निचले सदन में रात्रि 11 बजकर 58 मिनट तक चर्चा हुई और करीब 100 सदस्यों ने इसमें हिस्सा लिया तथा अपने अपने क्षेत्रों से जुड़े विषयों को उठाया।

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संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने देर रात तक सदन की कार्यवाही चलाने की पहल के लिए लोकसभा अध्यक्ष के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि यह करीब 18 वर्षों में पहली बार ऐसी घटना है कि सदन ने देर रात तक इस तरह से बैठकर चर्चा की।
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चर्चा के दौरान कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया कि आम बजट में रेलवे में सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी), निगमीकरण और विनिवेश पर जोर देने की आड़ में इसे निजीकरण के रास्ते पर ले जाया जा रहा है।
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विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार को बड़े वादे करने की बजाए रेलवे की वित्तीय स्थिति सुधारना चाहिए तथा सुविधा, सुरक्षा एवं सामाजिक जवाबदेही का निर्वहन सुनिश्चित करना चाहिए। सत्तारूढ़ भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि रेलवे रोजाना नए प्रतिमान और कीर्तिमान गढ़ रहा है तथा पिछले पांच वर्षो में साफ-सफाई, सुगमता, सुविधाएं, समय की बचत और सुरक्षा आदि हर क्षेत्र में सुधार हुआ है। अब सरकार का जोर रेलवे में वित्तीय अनुशासन लाने पर है।

 

जहां तक लोकसभा में रेल बजट पर सबसे लंबी चर्चा के कीर्तिमान का सवाल है तो योह पीए संगमा के स्पीकर और रामविलास पासवान के रेल मंत्री रहने केदौरान वर्ष 1996 में बना। तब बजट पर चर्चा 25 जुलाई को शुरू हुई जो 26 जून को तड़के 7.17 मिनट तक चली। इस दौरान 111 सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया। 

इसके बाद वर्ष 1998 में भी जीएमसी बालयोगी के स्पीकर और नीतीश कुमार केरेल मंत्री रहते रेल बजट पर लंबी चर्चा हुई। तब 8 जून केशुरू हुई चर्चा 9 जून को सुबह 6.04 बजे तक चली।  इस दौरान 90 सांसदों ने चर्चा में हिस्सा लिया। हालांकि रेल मंत्री नीतीश ने 9 जून को दोपहर 2 बजे चर्चा का जवाब दिया। जबकि वर्ष 1996 में रेल मंत्री पासवान ने चर्चा का उसी दौरान जवाब दिया। इससे पहले वर्ष 1993 में रेल बजट पर सुबह 6.25 बजे तक चर्चा हुई और इसमें 69 सांसदों ने हिस्सा लिया।

स्वर्ण जयंती वर्ष पर नया कीर्तिमान

सदन के सबसे लंबा बैठने का कीर्तिमान आजादी के स्वर्ण जयंती वर्ष पर बना। साल 1997 में 27 अगस्त को शुरू हुई चर्चा 28 अगस्त को सुबह 5.39 मिनट तक चली। फिर एक दिन के अवकाश के बाद सदन 29 अगस्त से शुरू  हो कर 30 जून को 8.24 बजे सुबह तक जारी रहा।

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