{"_id":"68b59d8916c1cd5fb70a8af7","slug":"afghanistan-earthquake-silence-prevail-delhi-afghan-refugees-anxiety-increase-due-to-communication-failure-2025-09-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Afghanistan Earthquake: दिल्ली की अफगान बस्ती में पसरा सन्नाटा, संचार ठप होने से शरणार्थियों की चिंता बढ़ी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Afghanistan Earthquake: दिल्ली की अफगान बस्ती में पसरा सन्नाटा, संचार ठप होने से शरणार्थियों की चिंता बढ़ी
Mon, 01 Sep 2025 06:50 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Mon, 01 Sep 2025 06:50 PM IST
सार
अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से में आए 6.0 तीव्रता के भूकंप ने 610 से ज्यादा लोगों की जान ले ली और 1,300 से अधिक घायल हुए। दिल्ली में रह रहे अफगान नागरिक लगातार अपने परिवारों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फोन लाइनों के ठप होने से चिंता और बढ़ गई है।
विज्ञापन
अफगानिस्तान में आए भीषण भूकंप की तस्वीर।
- फोटो : ANI
विस्तार
पूर्वी अफगानिस्तान में आए भीषण भूकंप ने 600 से ज्यादा लोगों की जान ले ली और हजार से अधिक घायल हो गए। इस आपदा ने दिल्ली में रह रहे अफगान शरणार्थियों और प्रवासियों की रातों की नींद छीन ली है। अपने छोटे-छोटे कमरों और दुकानों में बैठे वे लगातार फोन मिलाते रहे, ताकि घर से किसी परिचित आवाज की झलक सुन सकें, लेकिन टेलीफोन लाइनें खामोश रहीं।
दिल्ली के केंद्र में सूखे मेवे बेचने वाले 20 वर्षीय आसिम की आवाज थोड़ी गुमसुम थी। उनका परिवार जलालाबाद में रहता है, जो सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक है। आसिम ने बताया कि उन्होंने आखिरी बार माता-पिता से दो हफ्ते पहले बात की थी। भूकंप की खबर मिलते ही वे लगातार कॉल कर रहे हैं, लेकिन फोन नहीं लग रहा। वह बस दुआ कर रहे हैं कि उनकी दादी सुरक्षित हों।
मौजूदगी नहीं, बस इंतजार
तालिबान सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता 6.0 मापी गई थी। कुनार प्रांत और नंगरहार के पास गांव तबाह हो गए। 610 लोग मारे गए और 1,300 से ज्यादा घायल हैं। दिल्ली में रह रहे अफगान लोग अपने परिवारों की सलामती को लेकर परेशान हैं। 24 वर्षीय फरजान, जो आसिम के साथ काम करता है, ने कहा कि उसने अब तक सौ से ज्यादा बार फोन मिलाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इस बेचैनी ने उनके काम और खाने-पीने तक की दिनचर्या बिगाड़ दी है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- बंगलूरू में मंदिर से लौट रही महिला को पेट्रोल डालकर जिंदा जलाया, पूर्व साथी ने पार की सारी हैवानियत
पुराने जख्म भी हरे हुए
दिल्ली में एक रेस्तरां में काम कर रहे 35 वर्षीय नासिर खान ने कहा कि उनके दादा-दादी और चचेरे भाई-बहन अभी भी काबुल में रहते हैं। उन्होंने कहा कि जब ऐसी खबर आती है तो अहसास होता है कि दूर रहना कितना बेबस कर देता है। कुछ साल पहले भी ऐसा हादसा हुआ था, तब मैंने अपने एक चचेरे भाई को खो दिया था।
करीम, जो दिल्ली में वेटर है, ने कहा कि अफगानिस्तान से संपर्क पहले भी आसान नहीं था, लेकिन भूकंप ने हालात और मुश्किल कर दिए। उनका मामा उसी क्षेत्र में रहते हैं, लेकिन वे उनसे बात नहीं कर पा रहे। अब केवल समाचार ही सूचना का स्रोत है। करीम ने कहा कि हम सिर्फ उम्मीद कर सकते हैं कि हालात बेहतर हों।
ये भी पढ़ें- 'आंदोलन पर हाईकोर्ट के निर्देशों को करेंगे लागू', आरक्षण पर जानें क्या बोले सीएम फडणवीस
भूकंप से दूर रहने वाले भी सहमे
कुछ अफगान नागरिकों के परिवार सीधे भूकंप क्षेत्र में नहीं थे, लेकिन डर सबमें था। मोहम्मद वसीम, जो दिल्ली में ड्राइवर हैं, बोले कि मैं काबुल से चार साल पहले यहां आया था। जहां मैं रहता था, वह जगह भूकंप के केंद्र से महज एक घंटे की दूरी पर है। जब हादसा इतना पास हो, तो झटका गहरा लगता है।
दिल्ली की अफगान बस्ती में चिंता का माहौल
दिल्ली में रह रहे अफगान समुदाय के लिए यह त्रासदी केवल एक खबर नहीं, बल्कि परिवार की चिंता का दूसरा नाम बन गई है। हर कोई फोन से चिपका बैठा है, लेकिन नेटवर्क की खामोशी ने बेचैनी और बढ़ा दी है। सबकी निगाहें सिर्फ एक कॉल, एक संदेश और एक सुरक्षित खबर पर टिकी हैं।
विज्ञापन
दिल्ली के केंद्र में सूखे मेवे बेचने वाले 20 वर्षीय आसिम की आवाज थोड़ी गुमसुम थी। उनका परिवार जलालाबाद में रहता है, जो सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक है। आसिम ने बताया कि उन्होंने आखिरी बार माता-पिता से दो हफ्ते पहले बात की थी। भूकंप की खबर मिलते ही वे लगातार कॉल कर रहे हैं, लेकिन फोन नहीं लग रहा। वह बस दुआ कर रहे हैं कि उनकी दादी सुरक्षित हों।
विज्ञापन
मौजूदगी नहीं, बस इंतजार
तालिबान सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता 6.0 मापी गई थी। कुनार प्रांत और नंगरहार के पास गांव तबाह हो गए। 610 लोग मारे गए और 1,300 से ज्यादा घायल हैं। दिल्ली में रह रहे अफगान लोग अपने परिवारों की सलामती को लेकर परेशान हैं। 24 वर्षीय फरजान, जो आसिम के साथ काम करता है, ने कहा कि उसने अब तक सौ से ज्यादा बार फोन मिलाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इस बेचैनी ने उनके काम और खाने-पीने तक की दिनचर्या बिगाड़ दी है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- बंगलूरू में मंदिर से लौट रही महिला को पेट्रोल डालकर जिंदा जलाया, पूर्व साथी ने पार की सारी हैवानियत
पुराने जख्म भी हरे हुए
दिल्ली में एक रेस्तरां में काम कर रहे 35 वर्षीय नासिर खान ने कहा कि उनके दादा-दादी और चचेरे भाई-बहन अभी भी काबुल में रहते हैं। उन्होंने कहा कि जब ऐसी खबर आती है तो अहसास होता है कि दूर रहना कितना बेबस कर देता है। कुछ साल पहले भी ऐसा हादसा हुआ था, तब मैंने अपने एक चचेरे भाई को खो दिया था।
करीम, जो दिल्ली में वेटर है, ने कहा कि अफगानिस्तान से संपर्क पहले भी आसान नहीं था, लेकिन भूकंप ने हालात और मुश्किल कर दिए। उनका मामा उसी क्षेत्र में रहते हैं, लेकिन वे उनसे बात नहीं कर पा रहे। अब केवल समाचार ही सूचना का स्रोत है। करीम ने कहा कि हम सिर्फ उम्मीद कर सकते हैं कि हालात बेहतर हों।
ये भी पढ़ें- 'आंदोलन पर हाईकोर्ट के निर्देशों को करेंगे लागू', आरक्षण पर जानें क्या बोले सीएम फडणवीस
भूकंप से दूर रहने वाले भी सहमे
कुछ अफगान नागरिकों के परिवार सीधे भूकंप क्षेत्र में नहीं थे, लेकिन डर सबमें था। मोहम्मद वसीम, जो दिल्ली में ड्राइवर हैं, बोले कि मैं काबुल से चार साल पहले यहां आया था। जहां मैं रहता था, वह जगह भूकंप के केंद्र से महज एक घंटे की दूरी पर है। जब हादसा इतना पास हो, तो झटका गहरा लगता है।
दिल्ली की अफगान बस्ती में चिंता का माहौल
दिल्ली में रह रहे अफगान समुदाय के लिए यह त्रासदी केवल एक खबर नहीं, बल्कि परिवार की चिंता का दूसरा नाम बन गई है। हर कोई फोन से चिपका बैठा है, लेकिन नेटवर्क की खामोशी ने बेचैनी और बढ़ा दी है। सबकी निगाहें सिर्फ एक कॉल, एक संदेश और एक सुरक्षित खबर पर टिकी हैं।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन