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Maratha Quota Stir: 'आंदोलन पर हाईकोर्ट के निर्देशों को करेंगे लागू', आरक्षण पर जानें क्या बोले सीएम फडणवीस

Mon, 01 Sep 2025 05:50 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: हिमांशु चंदेल Updated Mon, 01 Sep 2025 05:50 PM IST
सार

मराठा आरक्षण आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उपमुख्यमंत्री शिंदे और अजित पवार संग हालात की समीक्षा की। इसके बाद सीएम ने कहा सरकार हाईकोर्ट के निर्देशों को लागू करेगी। वहीं, सुप्रिया सुले ने आरोप लगाया कि सरकार जरांगे की अनदेखी कर रही है और आंदोलन संभालने में नाकाम रही।

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Maratha Quota Stir Fadnavis situation review Eknath Shinde Ajit Pawar Opposition alleges Govt ignoring Jarange
देवेंद्र फडणवीस, सीएम, महाराष्ट्र - फोटो : ANI

विस्तार

मुंबई के आजाद मैदान पर मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे का अनशन चौथे दिन भी जारी रहा। इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार के साथ हालात की समीक्षा की। सरकार ने कहा कि वह कानूनी रूप से टिकाऊ समाधान तलाश रही है। वहीं विपक्ष ने आंदोलन को लेकर सरकार पर निशाना साधा है।
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कानूनी विकल्पों पर कर रहे विचार- सीएम फडणवीस
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि मनोज जरांगे के नेतृत्व में चल रहे मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों को प्रशासन लागू करेगा। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस मुद्दे का स्थायी हल निकालने के लिए कानूनी विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रही है। सीएम फडणवीस का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि जरांगे और उनके समर्थकों ने आंदोलन से जुड़े नियमों और शर्तों का उल्लंघन किया है।
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न्यायमूर्ति रविंद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंकलद की खंडपीठ ने कहा कि आंदोलनकारियों के पास प्रदर्शन जारी रखने की वैध अनुमति नहीं है। इसलिए सरकार को कानून में दिए गए प्रावधानों के अनुसार कदम उठाने चाहिए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जरांगे के दावे के अनुसार आगे से नए प्रदर्शनकारियों को मुंबई में प्रवेश न करने दिया जाए।
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'कानून-व्यवस्था के कमजोर होने के दावे गलत'
पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा, 'सरकार हाईकोर्ट के निर्देश लागू करेगी। राज्य में कानून-व्यवस्था चरमराने का आरोप सही नहीं है। आंदोलन से जुड़े कुछ छिटपुट घटनाक्रम हुए थे, जिन्हें पुलिस ने तुरंत नियंत्रण में ले लिया।' उन्होंने कहा कि अदालत ने मुंबई में दिए गए अनुमति पत्रों के उल्लंघन को लेकर नाराजगी जताई है। सीएम फडणवीस ने आगे कहा, 'बातचीत माइक्रोफोन पर नहीं हो सकती। हमें यह पता होना चाहिए कि वार्ता किससे की जाए। सरकार हठी नहीं है।' सीएम फडणवीस ने यह भी खारिज किया कि प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को भोजन न मिले इसलिए आजाद मैदान के पास की दुकानों को बंद करवाया। उन्होंने कहा, 'दुकानदारों ने खुद ही उपद्रव की वजह से दुकानें बंद की थीं। अब पुलिस सुरक्षा देकर उन्हें दुकानें खोलने को कहा गया है।'

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जरांगे की हड़ताल और सरकार की समिति
जरांगे 29 अगस्त से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी मुख्य मांग है कि मराठा समाज को कुनबी दर्जा दिया जाए, ताकि वे ओबीसी वर्ग में शामिल होकर आरक्षण का लाभ ले सकें। इस मुद्दे पर सरकार ने कैबिनेट उपसमिति और एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है। कैबिनेट उपसमिति की अध्यक्षता मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल कर रहे हैं, जबकि रिटायर्ड हाईकोर्ट जज संदीप शिंदे की अध्यक्षता में समिति कुनबी रिकॉर्ड की जांच कर रही है। विखे पाटिल ने कहा कि अदालतों के कई फैसले यह साफ करते हैं कि मराठा समाज सामाजिक रूप से पिछड़ा नहीं माना जा सकता और उसे सीधे कुनबी कहना संभव नहीं है। सरकार इन फैसलों और पुराने गजट नोटिफिकेशनों का अध्ययन कर रही है, ताकि कोर्ट में भी यह फैसला टिक सके।

अनदेखी कर रही सरकार- विपक्ष
वहीं विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा। राकांपा (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने आरोप लगाया कि सरकार को पता था कि जरांगे मुंबई आ रहे हैं, फिर भी उसने कोई ठोस कदम नहीं उठाए। सुले ने कहा कि जरांगे रविवार से बिना पानी के अनशन कर रहे हैं, लेकिन सोमवार तक उनसे सरकार का कोई प्रतिनिधि मिलने नहीं गया। उन्होंने कहा कि सरकार को सभी दलों की बैठक बुलाकर इस पर निर्णय लेना चाहिए।


आरक्षण पर कैबिनेट में फैसला हो- सुप्रिया सुले
सुले ने कहा कि मराठा आरक्षण का फैसला कैबिनेट और विधानसभा में होना चाहिए। अगर सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा हटाने के लिए संविधान संशोधन की जरूरत है तो राज्य सरकार को केंद्र को प्रस्ताव भेजना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि फडणवीस ने 2018 में विधानसभा में आरक्षण देने का रास्ता बताया था, अब वही लागू करें।



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पवार पर राजनीति और भाजपा की आलोचना
सुले ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि सरकार में शामिल दल शरद पवार की आलोचना करते हैं, लेकिन जब राज्य में इतना बड़ा आंदोलन होता है तो उसी पवार साहब को जिम्मेदार ठहराने लगते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा-शिंदे-पवार की सरकार के पास 250 से ज्यादा विधायक हैं, फिर भी समाधान निकालने की बजाय आरोप-प्रत्यारोप में समय गंवाया जा रहा है।
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