Aero India: सेना प्रमुख ने लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर में भरी उड़ान, भविष्य के खतरों-स्वदेशी हथियारों पर यह बोले
जनरल पांडे ने कहा, यह एक बहुत ही संतोषजनक और सार्थक अनुभव था। मैं लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) की विशेषताओं से काफी प्रभावित हूं, खासतौर पर युद्धाभ्यास और क्षमताओं के संदर्भ में, जिसकी हमें सेना में एक लड़ाकू हेलीकॉप्टर से आवश्यकता होती है।
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विस्तार
एशिया के सबसे बड़े एयरो शो में सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने सोमवार को लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) में उड़ान भरी। इस अनुभव को उन्होंने संतोषजनक और सार्थक बताया। सेना प्रमुख ने कहा कि मैं एलसीएच की खासियतों से काफी प्रभावित हुआ हूं, खासतौर पर इसकी युद्ध अभ्यास और क्षमताओं को लेकर। उन्होंने सेना में एक लड़ाकू हेलीकॉप्टर से यही जरूरत होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस एयरो शो का उद्घाटन किया। बेंगलुरु में आयोजित इस पांच दिवसीय एयरो शो में 90 से ज्यादा देश हिस्सा ले रहे हैं।
#WATCH | Indian Army chief General Manoj Pande flew in the Light Combat Helicopter at the #AeroIndia at Bengaluru, Karnataka. pic.twitter.com/hIMfHYDLgL
— ANI (@ANI) February 13, 2023विज्ञापन
मेक इन इंडिया-आत्मनिर्भर भारत से कर रहे क्षमताओं का विस्तार
'एयरो इंडिया' शो में पहली बार दो अमेरिकी एफ-35 लड़ाकू विमान हिस्सा ले रहे हैं। अमेरिकी दल में एफ-16 और एफ-18 लड़ाकू विमान भी शामिल हैं। सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने कहा, विशिष्टताओं में जाए बिना हम 'मेक इन इंडिया' या 'आत्मनिर्भर भारत' के माध्यम से अपनी सैन्य क्षमताओं का विस्तार कर रहे हैं। जनरल पांडे ने कहा, यदि टैंकों की बात करें तो हम इस तरह के टैंक को तैयार कर रहे हैं, जो रात के समय भी कार्रवाई करने में सक्षम होगा।
सटीकता में कर रहे सुधार : सेना प्रमुख जनरल पांडे
जनरल पांडे ने आगे कहा, तोपखाने के मामले में हमारे पास माउंटेड गन से सीरीज शुरू होती है। हम लक्ष्य की सटीकता में सुधार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम बहुत लंबी दूरी के लक्ष्य को निशाना बनाने में सुधार कर रहे हैं। सेना प्रमुख ने कहा कि हम यह भी देख रहे हैं कि हम तोपखाने एक सेक्टर से दूसरे सेक्टर तक पहुंचाने में कितने सक्षम हैं।
'स्वदेशी संसाधनों से भविष्य के युद्ध लड़ने में सक्षम होंगे'
हथियारों के स्वदेशीकरण को लेकर उन्होंने कहा कि इसका काम प्रगति पर है। एक निश्चित समय रेखा तय करना मुश्किल है, लेकिन हमारा रक्षा उद्योग जिस तरह के इकोसिस्टम को विकसित कर रहा है। उससे हममें उत्साह है। मुझे भरोसा है कि आने वाले आठ से दस वर्षों में हम अपने स्वदेशी संसाधनों के साथ भविष्य के युद्धों को लड़ने में सक्षम होंगे।
पंजाब और जम्मू-कश्मीर में अंतराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन तैनात
एक स्वदेशी काउंटर ड्रोन सिस्टम को पंजाब और जम्मू-कश्मीर में अंतराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर तैनात किया जा रहा है, ताकि दुश्मन के ड्रोन को भारत विरोधी गतिविधियों से रोका जा सके। इसे भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल एस चौहान द्वारा विकसित किया गया है।