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गरीबों को समय से कानूनी मदद नहीं मिलने से खत्म हो रही है विश्वसनीयताः CJI
amarujala.com - Presented By: अनंत पालीवाल
Updated Sat, 29 Apr 2017 08:04 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जे एस केहर ने कहा कि गरीबों को जब समय पर कानूनी मदद नहीं मिलती है, तो उनका न्याय प्रक्रिया के प्रति विश्वास खत्म हो जाता है।
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पैरा लीगल वोलेंटियर के दो द्विसीय सेमिनार का उद्धाटन करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इन लोगों की मदद करना बहुत जरुरी है और इस काम में पैरा लीगल वोलेंटियर काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि समय पर मदद मिलने के आभाव में लोगों का न्याय प्रक्रिया और कानून काफी दिक्कतों में आ जाता है।
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शनिवार को शुरू हुए पारा लीगल वोलेंटियर के राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर चीफ जस्टिस ने कहा कि गांव केस्तर पर काम कर रहे पारा लीगल वोलेंटियर के कार्यों का आकलन होना चाहिए, जिससे कि विधिक सेवा अथॉरिटी वोलेंटियर को और प्रभावी तरीके से काम करने को लेकर सुझाव दे सकें।
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उन्होंने कहा कि दूर-दराज केइलाकों में रहने वाले लोग वकीलों की सेवा से महरूम रहते हैं और ऐसे में पारा लीगल वोलेंटियर उन लोगों को कानूनी सहायता प्रदान करते हैं।
चीफ जस्टिस ने कहा कि मेरा मानना है कि अब समय आ गया है जब इस संबंध में प्रभावी योजना बनाई जाए। जिसके तहत वोलेंटियर को अपनी कार्य योजना तैयार करनी चाहिए और उनके द्वारा विधिक सेवा अथॉरिटी द्वारा मुहैया की गई डायरी में रोजाना किए कार्यों को दर्ज किया जाना चाहिए।
इस डायरी की जांच विधिक सेवा अथॉरिटी द्वारा की जानी चाहिए जिससे कि अथॉरिटी वोलेंटियर को प्रभावी तरीके से काम को अंजाम देने का सुझाव दे सके। साथ ही चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि गरीब और अशिक्षितों को समय पर न्याय न मिलने से लीगल सिस्टम प्रभावित होता है।
इस अवसर पर कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने हाशिये पर रह रहे लोगों को त्वरित न्याय दिलाने में डिजिटल माध्यम को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देशभर में राष्ट्रीय विधिक सेवा अथॉरिटी(नालसा) के करीब दो लाख कॉमन सर्विस सेंटर हैं।
गरीबों को न्यायिक सहायता पहुंचाने वाले वोलेंटियर इन सेंटरों से संपर्क कर सकते हैं। दो दिवसीय इस सम्मेलन का आयोजन नालसा द्वारा किया जा रहा है।