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मोदी Vs केजरीवाल: भाजपा के यूपी मॉडल और आप के पंजाब मॉडल में होगी लड़ाई, कौन जीतेगा जनता का दिल?

Fri, 25 Mar 2022 07:09 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Fri, 25 Mar 2022 07:09 PM IST
सार

आम आदमी पार्टी को आने वाले दिनों में भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि अगले लोकसभा चुनाव में दोनों के बीच कई राज्यों में मजबूत लड़ाई हो सकती है। इसे देखते हुए दोनों ही दल अपनी कमर कसते हुए दिखाई पड़ रहे हैं...

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Aam Aadmi Party become a big challenge for the BJP in the coming days
BJP Vs AAP: प्रधानमंत्री मोदी और अरविंद केजरीवाल - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

योगी आदित्यनाथ ने अपने 51 मंत्रियों के साथ शुक्रवार को लखनऊ के इकाना स्टेडियम में शपथ ग्रहण किया। उनके शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने हिस्सा लिया। योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल में समाज के सभी क्षेत्रों, वर्गों के लोगों को शामिल कर भाजपा ने एक बड़ा संकेत देने की कोशिश की है। मंत्रिमंडल में बेहद सामान्य परिवारों से आए कार्यकर्ताओं को भी शामिल कर पार्टी के गरीबों के साथ खड़ा होने का संकेत भी दिया गया है। इसे उसकी 2024 की लड़ाई की तैयारी से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

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इसके पहले भगवंत मान के मंत्रिमंडल की खूब चर्चा हुई थी। आम आदमी पार्टी ने भगवंत मान के मंत्रिमंडल में ऐसे सामान्य चेहरों को जगह दी है, जो बेहद निम्न तबकों से आते हें। पढ़े-लिखे और योग्य लोगों को साथ लेकर पार्टी ने जहां यह संकेत देने की कोशिश की थी कि वह एक बेहतर सरकार चलाने के लिए तैयार है तो वहीं सामान्य चेहरों के जरिए मंत्रिमंडल में गरीब लोगों की भागीदारी को भी दिखाने की कोशिश की गई।
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आम आदमी पार्टी को आने वाले दिनों में भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि अगले लोकसभा चुनाव में दोनों के बीच कई राज्यों में मजबूत लड़ाई हो सकती है। इसे देखते हुए दोनों ही दल अपनी कमर कसते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। ऐसे में दोनों ही पार्टियां अपनी इन सरकारों को एक मॉडल के रूप में पेश कर अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश कर सकती हैं।
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भाजपा योगी आदित्यनाथ सरकार के सहारे बेहतर कामकाज और जनहितैषी योजनाओं का एक मॉडल पेश करने की कोशिश करेगी, तो अरविंद केजरीवाल मान सरकार के सहारे शिक्षा-स्वास्थ्य के राजनीति की एक नई पारी खेलने की कोशिश करेंगे। दोनों ही राजनीतिक दल अपनी उपलब्धियों को आम गरीबों के साथ जोड़कर खुद को बेहतर साबित करने की कोशिश करेंगे।

प्रचार तंत्र में माहिर खिलाड़ी

राजनीति की लड़ाई को परसेप्शन का खेल माना जाता है। जनता के मन में परसेप्शन बनाने के खेल में मीडिया का बेहतर इस्तेमाल करते हुए अपनी उपलब्धियों को बेहतर ढंग के साथ पेश करने के साथ ही विपक्ष पर हमला करना भी शामिल माना जाता है। इससे ही जनता के बीच किसी पार्टी या सरकार को लेकर सकारात्मक या नकारात्मक छवि बनती है। चूंकि भाजपा और अरविंद केजरीवाल दोनों ही दल इस मैदान के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं, दोनों ही दल अपनी सरकारों को बेहतर बताने की कोशिश करेंगे।

राष्ट्रवाद-लोकहितैषी योजनाएं दोनों का हथियार

राजनीतिक पंडित दोनों दलों में कई समानताएं भी देखते हैं। दोनों के पास नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल के रूप में पार्टी से बड़ा चेहरा मौजूद है जो उनके लिए ब्रांड के तौर पर काम करता है। दोनों ही राष्ट्रवाद के जरिए युवाओं को लुभे की कोशिश करते हैं तो जनहितैषी योजनाएं लागू कर गरीबों के साथ खुद को खड़ा दिखाने की कोशिश भी करते हैं। ऐसे में यह देखना काफी दिलचस्प रहेगा कि जनता इनमें से किसके दावे पर भरोसा करती है और यूपी, दिल्ली, पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों में दोनों के बीच किस तरह की लड़ाई देखने को मिलती है।

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