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AAP: मनीष सिसोदिया का SSC में धांधली का आरोप, केंद्र सरकार से की 13 अगस्त की परीक्षा टालने की मांग
Thu, 07 Aug 2025 09:46 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 07 Aug 2025 09:46 PM IST
सार
आप नेता का दावा है कि बच्चों को स्कूल या कॉलेज की पढ़ाई करने के बाद भी नौकरी की तैयारी करने के लिए उच्च स्तर की कोचिंग लेनी पड़ती है। इससे साफ है कि स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता खराब है।
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मनीष सिसोदिया।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया से गुरुवार को एसएससी विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले शिक्षकों ने मुलाकात की। आप के मुताबिक, इस दौरान शिक्षकों ने सिसोदिया को एसएससी में हो रही कथित धांधली के बारे में बताया। सिसोदिया ने कहा कि उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि 13 अगस्त से शुरू होने वाली एसएससी-सीजीएल परीक्षा में 30 लाख से ज्यादा छात्र बैठने वाले हैं। इस परीक्षा को तुरंत स्थगित किया जाए।
इसके अलावा सिसोदिया ने केंद्र से मांग की है कि परीक्षा केंद्रों के खराब रखरखाव के लिए जिम्मेदार कंपनियों और कथित तौर पर घोटालों के गंभीर आरोप झेलने वाली कंपनियों को तुरंत हटाया जाए। उन्होंने दूसरी मांग में कहा कि जो परीक्षा पहले हो चुकी है, उसे भी रद्द करके दोबारा करवाया जाए।
आप नेता का दावा है कि बच्चों को स्कूल या कॉलेज की पढ़ाई करने के बाद भी नौकरी की तैयारी करने के लिए उच्च स्तर की कोचिंग लेनी पड़ती है। इससे साफ है कि स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता खराब है। फिर जब ये शिक्षक बच्चों को पढ़ाते हैं, तो उसके बाद उन बच्चों का क्या हाल होता है, यह हम पिछले करीब 15 दिनों से देशभर में देख रहे हैं।
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मनीष सिसोदिया ने कहा कि एसएससी के अलग-अलग परीक्षाएं होती हैं। सामान्य परीक्षा, स्टेनोग्राफर और संयुक्त स्नातक स्तर (सीजीएल) की। इन सभी परीक्षाओं में करीब 70 लाख युवा शामिल होते हैं। ये युवा दो-तीन साल तक तैयारी करते हैं। फिर उन्हें परीक्षा की तारीख मिलती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन परीक्षाओं के लिए तय 'कंपनी' ने 70 लाख बच्चों के करियर को बर्बाद करने का ठेका लिया है, न कि परीक्षा कराने का। परीक्षा केंद्र कहीं के कहीं बनाए जा रहे हैं। कैसे तबेलों और निजी घरों में केंद्र बनाए गए हैं। एक गाजियाबाद का वीडियो सोशल मीडिया पर देखा, जिसमें शायद बुधवार को एसएससी की कोई परीक्षा हुई थी। उसी कंपनी ने इसे आयोजित किया। जो उम्मीदवार परीक्षा देने आया था, उसे ही निरीक्षक बना दिया गया। मतलब, एक लड़का परीक्षा देने आया और कंपनी ने उसे ही कह दिया कि तुम अपने कक्ष में निरीक्षक भी बन जाओ। यह क्या मजाक है?
मनीष सिसोदिया ने कहा कि अगर केंद्र सरकार को 70 लाख बच्चों की परीक्षा करानी है, तो देश की सबसे अच्छी कंपनी को चुनिए। लेकिन सरकार ने ऐसी घटिया कंपनी को चुना, जिसके पास न तो सुविधाएं हैं, न ही क्षमता है। कई बच्चों की शिकायतें हैं कि माउस तक काम नहीं कर रहा था। केंद्र ऐसे-ऐसे इलाकों में बनाए गए हैं, जो 500-700 किलोमीटर दूर हैं। ये बच्चे गरीब परिवारों से हैं, किसानों और मजदूरों के बच्चे हैं। वे किसी तरह कोचिंग की फीस जुटाकर, एसएससी परीक्षा की तैयारी करते हैं और सपने देखते हैं। जयपुर के बच्चे को अंडमान केंद्र दिया जाता है। बिहार के बच्चे को केरल, पंजाब के बच्चों तमिलनाडु में केंद्र दिया जाता है।
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इसके अलावा सिसोदिया ने केंद्र से मांग की है कि परीक्षा केंद्रों के खराब रखरखाव के लिए जिम्मेदार कंपनियों और कथित तौर पर घोटालों के गंभीर आरोप झेलने वाली कंपनियों को तुरंत हटाया जाए। उन्होंने दूसरी मांग में कहा कि जो परीक्षा पहले हो चुकी है, उसे भी रद्द करके दोबारा करवाया जाए।
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आप नेता का दावा है कि बच्चों को स्कूल या कॉलेज की पढ़ाई करने के बाद भी नौकरी की तैयारी करने के लिए उच्च स्तर की कोचिंग लेनी पड़ती है। इससे साफ है कि स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता खराब है। फिर जब ये शिक्षक बच्चों को पढ़ाते हैं, तो उसके बाद उन बच्चों का क्या हाल होता है, यह हम पिछले करीब 15 दिनों से देशभर में देख रहे हैं।
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मनीष सिसोदिया ने कहा कि एसएससी के अलग-अलग परीक्षाएं होती हैं। सामान्य परीक्षा, स्टेनोग्राफर और संयुक्त स्नातक स्तर (सीजीएल) की। इन सभी परीक्षाओं में करीब 70 लाख युवा शामिल होते हैं। ये युवा दो-तीन साल तक तैयारी करते हैं। फिर उन्हें परीक्षा की तारीख मिलती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन परीक्षाओं के लिए तय 'कंपनी' ने 70 लाख बच्चों के करियर को बर्बाद करने का ठेका लिया है, न कि परीक्षा कराने का। परीक्षा केंद्र कहीं के कहीं बनाए जा रहे हैं। कैसे तबेलों और निजी घरों में केंद्र बनाए गए हैं। एक गाजियाबाद का वीडियो सोशल मीडिया पर देखा, जिसमें शायद बुधवार को एसएससी की कोई परीक्षा हुई थी। उसी कंपनी ने इसे आयोजित किया। जो उम्मीदवार परीक्षा देने आया था, उसे ही निरीक्षक बना दिया गया। मतलब, एक लड़का परीक्षा देने आया और कंपनी ने उसे ही कह दिया कि तुम अपने कक्ष में निरीक्षक भी बन जाओ। यह क्या मजाक है?
मनीष सिसोदिया ने कहा कि अगर केंद्र सरकार को 70 लाख बच्चों की परीक्षा करानी है, तो देश की सबसे अच्छी कंपनी को चुनिए। लेकिन सरकार ने ऐसी घटिया कंपनी को चुना, जिसके पास न तो सुविधाएं हैं, न ही क्षमता है। कई बच्चों की शिकायतें हैं कि माउस तक काम नहीं कर रहा था। केंद्र ऐसे-ऐसे इलाकों में बनाए गए हैं, जो 500-700 किलोमीटर दूर हैं। ये बच्चे गरीब परिवारों से हैं, किसानों और मजदूरों के बच्चे हैं। वे किसी तरह कोचिंग की फीस जुटाकर, एसएससी परीक्षा की तैयारी करते हैं और सपने देखते हैं। जयपुर के बच्चे को अंडमान केंद्र दिया जाता है। बिहार के बच्चे को केरल, पंजाब के बच्चों तमिलनाडु में केंद्र दिया जाता है।