आधार ने छीन ली कारगिल शहीद की विधवा की जान, थापर बोले- सेना का मनोबल गिराने वाली घटना
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कारगिल युद्ध में शहीद विजयंत थापर के पिता वीएन थापर ने इस घटना पर दुख जताया है। समाचार एजेंसी से बातचीत में उन्होंने कहा है कि, ' इस घिनौने समाचार पर हैरान हूं। इंसान के जीवन को लेकर हमें कोई फर्क नहीं पड़ता! ये ऐसी घटनाओं हैं जिनसे सेना के मनोबल पर असर पड़ता है।
Shocked at the disgusting news. We've become so indifferent to human life! These are the kind of things that hit morale of armed forces: VN Thapar,father or Kargil martyr Vijayant Thapar on death of a martyr's wife over alleged denial of treatment due to unavailability of Aadhaar pic.twitter.com/bNeDs3B1Dy
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) December 30, 2017
सोनीपत जिले के गांव महलाना निवासी कारगिल शहीद लक्ष्मण दास की वीरांगना शकुंतला को हार्ट की बीमारी थी। बेटा इलाज के लिए अस्पताल की मिन्नतें करता रहा। अस्पताल प्रबंधन आधार कार्ड जमा करवाने पर ही अड़ा रहा। अस्पताल प्रबंधन की जिद्द के चलते मां-बेटे डिस्पेंसरी से घर के चक्कर लगाते रहे। इस बीच शहीद की विधवा ने दम तोड़ दिया। शहीद के बेटे पवन ने बताया कि रविवार को मां की तेरहवीं की रस्म पूरी करने के बाद पुलिस को शिकायत देकर केस दर्ज करवाने की मांग करेंगे। वहीं सरकार और विभाग ने शहीद की विधवा की मौत के दो दिन बाद भी मामले का संज्ञान नहीं लिया। जबकि निजी अस्पताल के इस रवैये का वीडियो वायरल हो चुका है।
कारगिल युद्ध में शहीद हुए मेजर सीबी द्विवेदी की बेटी इस घटना के बाद अपने परिवार को लेकर डर गई हैं। उन्होंने कहा है कि, 'मुझे यकीन नहीं हो रहा कि ऐसी घटना हुई है। इससे मैं अपने परिवार के बारे में सोचकर डर गई हूं। ईसीएचएस के फायदे हैं लेकिन इसे आधार कार्ड से जोड़ना और इसकी एक कॉपी प्रस्तुत करना हास्यास्पद है।'
Can't imagine it happened,makes me scared for my family,hv ECHS benefits but connecting it to Aadhaar card&submitting a copy of it is ridiculous:Daughter of Kargil martyr Major CB Dwivedi on death of a martyr's wife ovr alleged denial of treatment due to unavailability of Aadhaar pic.twitter.com/zk89hL4e5Y
— ANI (@ANI) December 30, 2017
दो घंटे तक बीमार मां को लेकर घूमता रहा बेटा पवन
शहीद का बेटा मां के इलाज के लिए गिड़गिड़ाता रहा, बावजूद इसके अस्पताल प्रबंधन अपनी बात पर अड़ा रहा। पवन ने आरोप लगाया था कि उसके पास आधार कार्ड को छोड़कर सभी कागजात थे फिर भी उसकी सुनवाई नहीं हुई। इस दौरान अस्पताल में ऊंची आवाज में बोलने पर पुलिस को बुलवा लिया गया था। पुलिस ने भी उसे ही चुप रहने को कहा था, जिसके चलते उसे अपनी मां को वापस लेकर जाना पड़ा था।
दो घंटे तक मां को लेकर घूमता रहा पवन
पवन ने बताया कि वह अपनी मां को अस्पताल से लेकर वापस डिस्पेंसरी पहुंचा था। वहां से दिल्ली के लिए रेफरल कागजात तैयार कराए थे। वहां से आधार कार्ड की कॉपी लेने के लिए वह अपने घर पहुंचा। जहां पर उसकी मां की हालत ज्यादा बिगड़ चुकी थी। उसके बाद वह उसे लेकर सोनीपत के हांडा अस्पताल में पहुंचे थे। हालांकि तब तक उनकी मां मौत हो चुकी थी।
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने पूरे प्रकरण पर कहा है कि, 'राज्य सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। हमारी मंत्रालय इस मामले की जांच की जांच करेगा। केंद्र ने सभी राज्यों को 'क्लीनिकल एस्टेब्लिश्मेंट एक्ट' लागू करने को भी कहा है, जिससे ऐसी घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी।
State govt should take this matter seriously. Our ministry will conduct a probe in it. Centre has also asked all states to implement 'Clinical Establishments Act' which will help us reduce such incidents: Ashwini Kumar Choubey, MoS Health on death of Kargil martyr's wife #Sonipat pic.twitter.com/lItIwhxOsH
— ANI (@ANI) December 30, 2017