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पब्लिसिटी पर किए खर्च का ब्यौरा देने से आधार ने किया साफ इंकार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 18 Feb 2018 01:20 PM IST
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भारत के अद्वितीय पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने यह बताने से इंकार कर दिया है कि उसने पिछले आठ सालों में 12 अंक के आधार की पब्लिसिटी के लिए कितने पैसे खर्च किए हैं। अर्थशास्त्री रितिका खेड़ा ने सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत आवेदन करते हुए जानकारी मांगी थी। उन्होंने 15 नवंबर 2017 को आवेदन किया था। जिसमें उन्होंने साल 2009 में स्थापित हुए यूआईडीएआई की सभी एजेंसियों पर हर वित्त वर्ष में खर्च की गई राशि का ब्यौरा मांगा था।
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3 जनवरी, 2018 को यूआईडीएआई ने कार्यकर्ता रितिका की आरटीआई का जवाब दिया लेकिन प्रचार और विज्ञापन पर खर्च हुई राशि के बारे में किसी भी तरह की जानकारी देने से मना कर दिया। इस मामले पर जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय के आर्थिक अध्ययन और योजना केंद्र के अर्थशास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर हिमांशु ने कहा- सरकार द्वारा जानकारी साझा ना करने का कोई कारण समझ में नहीं आता है। यह राज्य का कोई सीक्रेट नहीं है जिससे कि किसी को नुकसान हो सकता है। इसके मेकओवर और ब्रांन्डिंग में लोगों का पैसा लगा है।
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यूआईडीएआई ने जानकारी ना देने का कारण तो नहीं बताया लेकिन आरटीआई की धारा (1) के अनुच्छेद डी और जे के तहत जानकारी साझा ना करने का हवाला दिया। इस धारा के अनुसार अधिकारी उस आवेदन पर जवाब नहीं दे सकते जिसमें वाणिज्यिक आत्मविश्वास, व्यापार रहस्य और बौद्धिक संपदा से संबंधित जानकारी मांगी गई हो। रितिका ने साल जुलाई 2014 की खबर के आधार पर आरटीआई दाखिल की थी। जिसके अनुसार आधार के मेकओवर के लिए यूआईडीएआई को 30 करोड़ रुपए दिए गए थे।
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