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पश्चिम बंगाल: सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल, 50 साल से मस्जिद की देखभाल कर रहा हिंदू परिवार
Sat, 19 Feb 2022 10:36 PM IST
Amit Mandal
एएनआई, नॉर्थ 24 परगना, प. बंगाल
एएनआई, नॉर्थ 24 परगना, प. बंगाल
Published by: Amit Mandal
Updated Sat, 19 Feb 2022 10:36 PM IST
सार
बोस परिवार ने अमानती मस्जिद नाम की मस्जिद का जीर्णोद्धार किया है और पिछले 50 वर्षों से दीपक बोस एक केयरटेकर के रूप में हर दिन मस्जिद का दौरा करते हैं।
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Hindu family takes care of mosque
- फोटो : ANI
विस्तार
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना में सांप्रदायिक सद्भाव की बयां करने एक कहानी में एक हिंदू परिवार पिछले 50 वर्षों से बारासात में अमानती मस्जिद देखभाल कर रहा है। उत्तर 24 परगना के बारासात के वरिष्ठ नागरिक दीपक कुमार बोस और उनके बेटे पार्थ सारथी बोस आज हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल कायम कर रहे हैं।
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अमानती मस्जिद का किया जीर्णोद्धार
बोस परिवार ने अमानती मस्जिद नाम की मस्जिद का जीर्णोद्धार किया है और पिछले 50 वर्षों से दीपक बोस एक केयरटेकर के रूप में हर दिन मस्जिद का दौरा करते हैं और इसके गलियारों को साफ करते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मुस्लिम समुदाय के लोग अपनी प्रार्थना के दौरान आराम से रहें। अमानती मस्जिद नबोपल्ली इलाके में स्थित है जहां हिंदुओं का वर्चस्व है।
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1964 में बोस परिवार ने उत्तर 24 परगना की भूमि के साथ खुलना (अब बांग्लादेश) में संपत्ति का आदान-प्रदान किया था। उन्होंने देखा कि उस जमीन पर एक छोटी सी मस्जिद थी। जबकि कई लोगों ने इसे तोड़ने और नया भवन बनाने का सुझाव दिया, लेकिन बोस परिवार ने इसका विरोध किया क्योंकि यह एक धार्मिक स्थल था।
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इमाम भी नियुक्त किया
मस्जिद के केयरटेकर दीपक कुमार बोस ने एएनआई को बताया कि हमने इसे पुनर्निर्मित करने का फैसला किया और तब से हम इस मस्जिद की देखभाल कर रहे हैं। विभिन्न इलाकों से मुस्लिम समुदाय के लोग यहां आते हैं और प्रार्थना करते हैं। हमने दैनिक अज़ान के लिए एक इमाम नियुक्त किया है।
दीपक के बेटे पार्थ सारथी बोस ने कहा कि अब तक किसी ने भी हम हिंदुओं द्वारा मस्जिद की देखभाल करने पर आपत्ति नहीं जताई है। हम सालों से मस्जिद की देखभाल कर रहे हैं। दरअसल, दो किमी के दायरे में कोई मस्जिद नहीं है इसलिए अलग-अलग इलाकों के मुसलमान यहां इबादत करने आते हैं।
इमाम शराफत अली ने कहा कि मुझे स्थानीय लोगों से कोई खतरा महसूस नहीं हुआ है। 1992 से मैं लगातार लोगों से अज़ान के लिए आने के लिए कह रहा हूं। हम एकता और शांति में विश्वास रखते हैं।