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ऑनर किलिंग में दोषी 92 वर्षीय को जाना होगा जेल: सुप्रीम कोर्ट
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 17 Jun 2016 06:59 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Reuters
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ऑनर किलिंग के मामले में दोषी ठहराए गए 92 वर्षीय एक बुजुर्ग को सुप्रीम कोर्ट ने किसी तरह की राहत देने से इनकार करते हुए उसे समर्पण कर सजा भुगतने के लिए कहा है। उत्तर प्रदेश स्थित उन्नाव निवासी यह बुजुर्ग फिलहाल बिस्तर पर है। चिकित्सकीय आधार पर बुजुर्ग ने समर्पण से छूट मांगी थी।
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न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अवकाशकालीन पीठ ने पुत्ती नामक इस बुजुर्ग के आवेदन को खारिज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के समक्ष समर्पण करने के लिए कहा है। बुजुर्ग की ओर से दलील दी गई कि वह बिस्तर पर है। वह लाचार है। उसे किसी वक्त भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जा सकता है। लेकिन शीर्ष अदालत ने उसकी दलीलों को नकार दिया। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 24 फरवरी को पुत्ती की दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखते हुए उसे पुलिस के समक्ष समर्पण करने के लिए कहा था।
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बुजुर्ग ने साथ ही दोषसिद्धि और सजा के हाईकोर्ट के फैसले को भी चुनौती दी थी। दीपेश द्विवेदी के माध्यम से दाखिल याचिका में कहा गया था कि हाईकोर्ट का आदेश गलत और अतार्किक है। हाईकोर्ट ने आरोपी की उम्र पर गौर नहीं किया। इस मामले में दो अन्य आरोपियों फीक्का और स्नेही की मौत हो चुकी हैं और ये दोनों भी रिश्ते में पुत्ती के भाई थे।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक, दिसंबर 1979 में फीक्का के शादीशुदा बेटी नान्हाकू के भाई सोहन के साथ भाग गई थी। इस बात से नाराज पुत्ती, फीक्का और स्नेही ने 22 अगस्त 1980 को नान्हाकू की हत्या कर दी।
28 मई 1982 को ट्रायल कोर्ट ने तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में तीनों को जमानत मिल गई थी। निचली अदालत के आदेश के इस फैसले को तीनों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के दौरान फीक्का और स्नेही की मौत हो गई। करीब 34 वर्ष बाद गत 24 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी याचिकाओं को खारिज करते हुए उनकी सजा बहाल रखी थी।