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8th Pay Commission: 100 दिन में कैसे लागू होगा वेतन आयोग? न हुआ गठन, न कर्मियों संग बैठक; पहले लगते थे दो साल

Tue, 16 Sep 2025 07:28 PM IST
हिमांशु चंदेल डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: हिमांशु चंदेल Updated Tue, 16 Sep 2025 07:28 PM IST
सार

केंद्र सरकार ने जनवरी में आठवें वेतन आयोग की घोषणा की थी, लेकिन सौ दिन शेष रहने के बावजूद इसका गठन नहीं हुआ है। अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति लंबित है। ऐसे में कर्मचारी संगठन चिंतित हैं कि सिफारिशें समय पर लागू होंगी या नहीं।

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8th Pay Commission How will be implemented in 100 day did not meet with employees earlier take two years
आठवां वेतन आयोग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र सरकार ने इस वर्ष जनवरी में आठवें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की थी। यह भी कहा कि वेतन आयोग की सिफारिशें, पहली जनवरी 2026 से प्रभावी होंगी। तब यह माना गया कि केंद्र सरकार इस बार नया रिकॉर्ड बनाएगी। वजह, इससे पहले जितने भी वेतन आयोग गठित हुए हैं, उनकी सिफारिशें तैयार होने और उन्हें लागू करने में लगभग दो-ढाई साल का समय लगता था। इस बार सरकार के पास एक वर्ष से भी कम समय था। अब तो महज सौ दिन ही शेष बचे हैं, लेकिन अभी तक वेतन आयोग का गठन तक नहीं हो सका। अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति नहीं हुई। जब आयोग गठित ही नहीं हुआ तो फिर कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक भी कैसे होती। आयोग के सदस्य कहीं भ्रमण पर नहीं जा सकेंगे। कर्मचारी संगठनों को इस माह वेतन आयोग के गठन की उम्मीद है। 
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'नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत' के अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल का कहना है कि सरकार की तरफ से कहा गया है कि आठवें वेतन आयोग के लिए जरूरतमंद स्टाफ की भर्ती शुरू हो गई है। हालांकि अभी तक आयोग के सदस्यों की नियुक्ति का एलान नहीं किया जा सका। संभव है कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने में देरी हो जाए। अभी तक जितने भी वेतन आयोग गठित हुए हैं, उनके मुकाबले इस बार सरकार के पास बहुत कम समय है। लगभग सौ दिन ही बचे हैं। तकनीकी रूप से बात करें तो इतनी कम अवधि में आयोग का गठन और उसकी सिफारिशें लागू होना, संभव नहीं लगता। ऐसे में सरकार यह काम कर सकती है कि वह फिटमेंट फैक्टर को 'बेसिक पे' से रिप्लेस कर दे। सातवें वेतन आयोग के दौरान जो 'पे मेट्रिक्स' तैयार किया गया था, इस बार भी सरकार उसी का इस्तेमाल कर ले। उसमें केवल डेटा ही बदलना होगा। 
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कितना हो सकता है फिटमेंट फैक्टर?
बतौर डॉ. पटेल, पे मेट्रिक्स, 'डॉ. एक्राय्ड' फॉर्मूले के आधार पर तय किया गया है। अब केवल फिटमेंट फैक्टर पर काम होना है। फिटमैंट फैक्टर 2.0 आता है तो न्यूनतम बेसिक सेलरी जो अब 18 हजार रुपये है, वह बढ़कर 36 हजार के आसपास हो जाएगी। यदि फिटमेंट फैक्टर 1.9 रखा गया तो बेसिक सेलरी 18 हजार की जगह 34200 रुपये होगी। हालांकि यह सरकार की मर्जी पर है कि वह कितना फिटमेंट फैक्टर रखती है। पे मेट्रिक्स में अब 18 लेवल हैं। संभव है कि सरकार, आठवें वेतन आयोग के जरिए कुछ लेवल को आपस में मर्ज कर दे।  
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आयोग को लेकर कोई घोषणा नहीं
ऐसा पहली बार होगा, जब एक वर्ष से कम समय में वेतन आयोग से जुड़े सारे काम होंगे। हालांकि अभी तक आयोग का चेयरमैन कौन होगा, कितने सदस्य होंगे, यह घोषणा नहीं हो सकी है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने कुछ समय पहले ही आठवें वेतन आयोग के कामकाज के लिए 35 पदों का ब्यौरा जारी किया है। इन पदों को प्रतिनियुक्ति के जरिए भरने की प्रक्रिया शुरु की गई है। इन कार्मिकों की पांच साल की एपीएआर और विजिलेंस क्लीयरेंस आदि को लेकर भी दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। 

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सरकार ने सभी हितधारकों से मांगी थी सिफारिशें
बता दें कि वेतन आयोग के गठन से पहले सरकार ने सभी हितधारकों से 'टर्म ऑफ रेफ्रेंस' के लिए सिफारिशें मांगी थी। राष्ट्रीय परिषद-जेसीएम की स्थायी समिति के कर्मचारी पक्ष और अन्य सदस्यों की 10 फरवरी को बुलाई गई बैठक में आठवें सीपीसी की संदर्भ शर्तों पर चर्चा की गई थी। कर्मचारी संगठनों ने कई मांगों को 'टर्म ऑफ रेफ्रेंस' का हिस्सा बनाने के लिए केंद्र सरकार के पास अपनी सिफारिशें भेज दी थीं। हालांकि अभी तक सरकार ने 'टर्म ऑफ रेफ्रेंस' की घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ केंद्र सरकार यह घोषणा पहले ही कर चुकी है कि आठवें वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा। कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के महासचिव एसबी यादव का कहना है कि वेतनमान रिवाइज, 10 नहीं, बल्कि पांच साल में होना चाहिए। 

पहले रिपोर्ट को लागू करने में लगते थे दो वर्ष
मुद्रास्फीति का स्तर बढ़ रहा है, ऐसे में दस साल का वर्तमान संशोधन कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए अनुकूल नहीं है। आयोग का चेयरमैन एवं सदस्य कब नियुक्त होंगे, अभी तक मालूम नहीं है। इस घोषणा का 'टर्म आफ रेफरेंस' क्या है, अभी इस बारे में कोई नहीं जानता। जब ये सब बातें सार्वजनिक होंगी, तब इस संबंध में ठोस आधार पर अहम बातें सामने आ सकेंगी। इस बार सरकार चाहे तो यह एक रिकार्ड बन सकता है। अतीत में ऐसा कम ही देखने को मिलता है, जब आयोग के गठन और उसकी रिपोर्ट को लागू करने में दो वर्ष से कम वक्त लगा हो। 

बतौर यादव, पहले यह होता था कि वेतन आयोग के सदस्य, विभिन्न तरह की जानकारी एकत्रित लेने के लिए विदेशों के टूर करते थे। कई देशों के कर्मचारी संगठनों का वेतनमान देखा जाता था। अध्ययन भ्रमण में बहुत समय लगता था। अब सब कुछ डिजिटल हो गया है। 

मनमोहन सरकार में कितना समय लगता था?
किसी भी देश के कर्मचारियों के वेतनमान से जुड़ी जानकारी आनलाइन मिल सकती है। दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था एवं वित्त मंत्रालयों के नए कदमों का अध्ययन भी डिजिटल माध्यम से हो सकता है। ऐसे में संभव है कि इस बार कम समय लगे। दो दशक पहले डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान वेतन आयोग के गठन से लेकर उसे लागू करने तक, इस प्रक्रिया में 18 महीने लगते थे। उससे पहले दो ढाई साल लगते थे। सरकार को रिपोर्ट पर विचार करने और इसे लागू करने में ही छह महीने या उससे अधिक समय लगता रहा है। 

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मानसून सत्र में भी नहीं मिली सटीक सूचना
संसद के मानसून सत्र में आठवें वेतन आयोग को लेकर सवाल पूछे गए थे। इन सवालों में आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने की तिथि, आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों के चयन की संभावित समय-सीमा और आयोग द्वारा अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए कोई विशिष्ट समय-सीमा निर्धारित करना, आदि शामिल हैं। खास बात है कि सरकार ने उक्त सवालों के जवाब में कोई भी एक तिथि निर्धारित नहीं की है। मतलब, कब आधिकारिक अधिसूचना जारी होगी और कब आयोग के अध्यक्ष एवं दूसरे सदस्यों की नियुक्ति होगी, इस बाबत सरकार ने कोई सटीक सूचना नहीं दी। इतना ही नहीं, आयोग द्वारा अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करना, इसके लिए भी कोई विशिष्ट समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई। 


'टर्म ऑफ रेफरेंस' को दिया जा रहा फाइनल रूप
नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड) की ज्वाइंट कन्सलटेटिव मशीनरी फॉर सेंटर गवर्नमेंट एम्पलाइज 'जेसीएम' ने 18 जून को कैबिनेट सचिव को पत्र भेजा था। इसमें जेसीएम की तरफ से यह मांग की गई है कि आठवें वेतन आयोग के लिए जो 'टर्म ऑफ रेफरेंस' (टीओआर) तैयार किए गए हैं, उन्हें सर्कुलेट यानी प्रसारित किया जाए। डीओपीटी ने जेसीएम को सूचित किया था कि सरकार ने आठवें वेतन आयोग का गठन करने का निर्णय लिया है। इसके लिए 'टर्म ऑफ रेफरेंस' को फाइनल रूप दिया जा रहा है। डीओपीटी ने टीओआर के लिए जेसीएम से सुझाव मांगे थे। जेसीएम ने बहुत पहले ही वे सभी सुझाव, डीओपीटी को सौंप दिए थे। टीओआर के लिए सुझाव सौंपे जाने के बावजूद अभी तक सरकार की तरफ से इस मामले में केंद्रीय कर्मचारियों की सर्वोच्च इकाई 'जेसीएम' के साथ कोई भी संचार नहीं हुआ है। 

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क्या बोले जेसीएम के सचिव शिव गोपाल मिश्रा?
जेसीएम के सचिव शिव गोपाल मिश्रा के मुताबिक, इससे कर्मचारियों और पेंशनरों को संशय हो रहा है।, सरकार ने आठवें वेतन आयोग के 'टर्म ऑफ रेफरेंस' में क्या लिखा है, कर्मचारियों द्वारा दिए गए सुझावों को कितनी तव्वजो मिली है, इसे लेकर केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर असमंजस में हैं। उनके सामने अनिश्चितता की स्थिति है। इतना ही नहीं, 'टीओआर' का दस्तावेज, जेसीएम तक नहीं पहुंचने के कारण कर्मचारियों में सरकार की घोषणा और विश्वसनीयता को लेकर संशय बन रहा है। कर्मचारी, आठवें वेतन आयोग की घोषणा को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। 

पेंशनर भी आठवें वेतन आयोग पर आश्वस्त नहीं
सेवारत कर्मियों के अलावा पेंशनर भी आठवें वेतन आयोग पर आश्वस्त नहीं हैं। वजह, उन्हें अभी तक नहीं मालूम कि आठवें वेतन आयोग का पेंशनर को फायदा होगा या नुकसान। फाइनेंस बिल के चलते भी पेंशनर, चिंतित हो गए थे। आठवें वेतन आयोग में उनकी पेंशन बढ़ेगी या उतनी ही रहेगी। महंगाई राहत 'डीआर' का क्या होगा, ऐसे कई सवाल पेंशनरों को परेशान कर रहे हैं। उनमें असुरक्षा का भाव पैदा हो गया है। ऐसे में सरकार को तुरंत प्रभाव से वेतन आयोग का गठन करना चाहिए और टर्म ऑफ रेफरेंस, सार्वजनिक की जाए।

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