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भ्रष्टाचार के मामले में 80 वर्षीय सेवानिवृत्त मेजर जनरल को जेल, तहलका ने किया था स्टिंग ऑपरेशन
Mon, 16 Sep 2019 07:54 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 16 Sep 2019 07:54 PM IST
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रिश्वतखोरी के एक मामले में 80 वर्षीय सेवानिवृत्त मेजर जनरल को तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाते हुए यहां एक अदालत ने कहा कि भारतीय सेना में भ्रष्टाचार पूरे समाज के विश्वास को झकझोर देता है और दोषी को उचित दंड मिलना चाहिए।
मामला तहलका समाचार पोर्टल द्वारा 2001 में किये गये एक स्टिंग ऑपरेशन में सामने आये भ्रष्टाचार के मामले से जुड़ा है।
विशेष सीबीआई न्यायाधीश शैलेंद्र मलिक ने 22 अगस्त के अपने आदेश में मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) एस पी मुरगई को भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम की धारा 8 और 9 के तहत दोषी ठहराया और उन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। उन्हें एक रक्षा सौदे में 70 हजार रुपये की घूस लेने के मामले में दोषी ठहराया गया था।
न्यायाधीश ने अदालत की वेबसाइट पर हाल ही में डाले गये अपने आदेश में कहा, ‘‘किसी भी विभाग में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता लेकिन जब भारतीय सेना में भ्रष्टाचार की बात आती है तो यह तथ्य समाज के विश्वास को ही झकझोर देता है और इसलिए दोषी को उचित सजा दी जानी चाहिए।’’
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तहलका के ‘ऑपरेशन वेस्ट एंड’ के दौरान इसके पदाधिकारियों ने सरकारी कर्मियों, सेना के कर्मियों, कारोबारियों तथा नेताओं समेत अनेक लोगों से मुलाकात की थी। रक्षा उपकरणों की आपूर्ति का ऑर्डर हासिल करने के लिए यह किया गया था।
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मामला तहलका समाचार पोर्टल द्वारा 2001 में किये गये एक स्टिंग ऑपरेशन में सामने आये भ्रष्टाचार के मामले से जुड़ा है।
विशेष सीबीआई न्यायाधीश शैलेंद्र मलिक ने 22 अगस्त के अपने आदेश में मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) एस पी मुरगई को भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम की धारा 8 और 9 के तहत दोषी ठहराया और उन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। उन्हें एक रक्षा सौदे में 70 हजार रुपये की घूस लेने के मामले में दोषी ठहराया गया था।
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न्यायाधीश ने अदालत की वेबसाइट पर हाल ही में डाले गये अपने आदेश में कहा, ‘‘किसी भी विभाग में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता लेकिन जब भारतीय सेना में भ्रष्टाचार की बात आती है तो यह तथ्य समाज के विश्वास को ही झकझोर देता है और इसलिए दोषी को उचित सजा दी जानी चाहिए।’’
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तहलका के ‘ऑपरेशन वेस्ट एंड’ के दौरान इसके पदाधिकारियों ने सरकारी कर्मियों, सेना के कर्मियों, कारोबारियों तथा नेताओं समेत अनेक लोगों से मुलाकात की थी। रक्षा उपकरणों की आपूर्ति का ऑर्डर हासिल करने के लिए यह किया गया था।