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Hindi News ›   India News ›   51 Doctors Dismissed in Andhra Pradesh Some Had Not Reported for Duty for Six Three or Even Seven Years

आंध्र प्रदेश में 51 डॉक्टर बर्खास्त: छह वर्ष, तीन वर्ष तो कोई सात वर्ष ने नहीं आया काम पर, मंत्री का एक्शन

Wed, 06 May 2026 06:25 PM IST
Sandhya Kumari न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Sandhya Kumari Updated Wed, 06 May 2026 06:25 PM IST
सार

आंध्र प्रदेश सरकार ने बिना अनुमति लंबे समय से अनुपस्थित रहने पर 51 सरकारी डॉक्टरों को बर्खास्त कर दिया। इनमें 8 एसोसिएट प्रोफेसर, 41 असिस्टेंट प्रोफेसर और 2 ट्यूटर शामिल हैं। स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने कहा कि लापरवाही किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं होगी।

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51 Doctors Dismissed in Andhra Pradesh Some Had Not Reported for Duty for Six Three or Even Seven Years
आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आंध्र प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने आज घोषणा की कि चिकित्सा शिक्षा निदेशक (डीएमई) के तहत कार्यरत 51 डॉक्टरों को काम से बिना की कारण या जानकारी के अनुपस्थिति के कारण स्थायी रूप से बर्खास्त कर दिया गया है। यह कदम राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। इन डॉक्टरों में एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और ट्यूटर शामिल हैं, जिनमें से कुछ कई वर्षों से अनुपस्थित थे।

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यादव ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि 51 डॉक्टरों को बिना अनुमति के छुट्टी पर रहने के कारण काम से हटा दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि काम में लापरवाही किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 

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आठ एसोसिएट, 41 असिस्टेंट प्रोफेसर और दो ट्यूटर बर्खास्त 

बर्खास्त किए गए डॉक्टरों में आठ एसोसिएट प्रोफेसर, 41 असिस्टेंट प्रोफेसर और दो ट्यूटर शामिल हैं। इनमें से कई डॉक्टर व्यक्तिगत व्यावसायिक हितों के कारण अनुपस्थित थे। इससे रोगी की देखभाल और चिकित्सा सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुईं। डॉक्टरों को एपी सिविल सेवा (आचरण) नियम (उल्लंघन)-3-1964 के तहत सेवा से हटाया गया है। यह नियम सरकार को एक वर्ष से अधिक समय तक अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों को इस्तीफा दिया हुआ मानने का अधिकार देता है। संबंधित डॉक्टरों को स्पष्टीकरण नोटिस जारी किए गए थे और जवाब देने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था। लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिसके बाद बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू की गई।

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एक ट्यूटर लगभग सात वर्षों से अनुपस्थित

बर्खास्त किए गए आठ एसोसिएट प्रोफेसरों में से एक आंध्र मेडिकल कॉलेज से 7 फरवरी, 2020 से अनुपस्थित था। इसी तरह, एक असिस्टेंट प्रोफेसर 22 अगस्त, 2022 से ड्यूटी पर नहीं आया था। अधिकारियों ने यह भी बताया कि एक ट्यूटर लगभग सात वर्षों से अनुपस्थित था। अधिकांश बर्खास्त डॉक्टर कडप्पा, अनंतपुर, ओंगोल, तिरुपति, विजयवाड़ा, काकीनाडा, विशाखापत्तनम, विजयनगरम, राजामहेंद्रवरम, एलुरु, नेल्लोर और मार्कापुरम स्थित मेडिकल कॉलेजों से संबंधित थे। 

अन्य अनुपस्थित डॉक्टरों पर कार्रवाई

अधिकारियों के अनुसार, पांच प्रोफेसर लंबे समय से अनुपस्थित पाए गए थे। उनमें से दो ने अधिकारियों द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद फिर से सेवा में शामिल हो गए। इस बीच, 11 डॉक्टर जो एक वर्ष से कम समय से अनुपस्थित थे, उन्होंने चिकित्सा शिक्षा निदेशक के अधिकारियों द्वारा चार्ज मेमो जारी किए जाने के बाद अपनी ड्यूटी फिर से शुरू कर दी। बचे हुए 33 डॉक्टर, जिनमें दो एसोसिएट प्रोफेसर और 31 असिस्टेंट प्रोफेसर शामिल हैं, अभी तक ड्यूटी पर नहीं लौटे हैं। यदि उनकी अनधिकृत अनुपस्थिति एक वर्ष से अधिक हो जाती है, तो उन्हें भी बर्खास्तगी का सामना करना पड़ सकता है।

स्वास्थ्य सेवा में सुधार के प्रयास

स्वास्थ्य मंत्री यादव ने कहा कि सरकार सरकारी स्वास्थ्य सेवा संस्थानों में कर्मचारियों की संख्या को मजबूत करने के लिए शून्य रिक्ति नीति के तहत एक साथ भर्तियां कर रही है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि स्वास्थ्य सेवाओं में कोई कमी न आए। मरीजों को उचित देखभाल मिल सके। सरकार का लक्ष्य राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक कुशल और जवाबदेह बनाना है।

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