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चिंता: एंटीबायोटिक के नियंत्रण पर 42 फीसदी मेडिकल कॉलेजों ने साधी चुप्पी; एनएमसी ने जारी किए सर्वे के परिणाम

Thu, 20 Jun 2024 06:05 AM IST
शिव शरण शुक्ला परीक्षित निर्भय
परीक्षित निर्भय Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 20 Jun 2024 06:05 AM IST
सार

नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) की सर्वे रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है, जिसके चलते आयोग ने रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) मॉड्यूल जारी किया है। 175 पन्नों के इस मॉड्यूल में स्पष्ट कहा है कि एंटीबायोटिक्स डॉक्टरों के लिए अंतिम हथियार हैं, जिनका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर को बार बार सोचना-समझना चाहिए।

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42 percent medical colleges maintain complete silence on antibiotic control NMC released survey results
एंटीबायोटिक के इस्तेमाल पर चिंता। - फोटो : WHO

विस्तार

मरीजों को लिखी जाने वाली एंटीबायोटिक दवाओं पर अधिकतर मेडिकल कॉलेजों में गंभीरता से काम नहीं किया जा रहा। डॉक्टरों की इस प्रैक्टिस पर 42 फीसदी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों ने चुप्पी साधी है। इसका मतलब है कि मरीजों की पर्ची पर कम से कम एंटीबायोटिक दवाएं लिखने के लिए उन्होंने कुछ नहीं किया।

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नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) की सर्वे रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है, जिसके चलते आयोग ने रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) मॉड्यूल जारी किया है। 175 पन्नों के इस मॉड्यूल में स्पष्ट कहा है कि एंटीबायोटिक्स डॉक्टरों के लिए अंतिम हथियार हैं, जिनका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर को बार बार सोचना-समझना चाहिए। दरअसल, चिकित्सा में एंटीबायोटिक दवाओं को शक्तिशाली माना है। जब बैक्टीरिया या फिर वायरस समय के साथ बदल जाते हैं और इन शक्तिशाली दवाओं पर प्रतिक्रिया नहीं करते तब मरीज रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) की चपेट में आता है। एएमआर की वजह से भारत में साल 2019 में ही 2,97,000 मौतें हुईं, जबकि 10,42,500 लोगों की मौत में एएमआर की सहायक भूमिका रही है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने 2011 से 2023 के बीच जारी 12 रिपोर्ट में रोगाणुरोधी प्रतिरोध को देश के लिए भविष्य की एक बड़ी महामारी बताया है।
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सर्वे के परिणामों में दिखी बेरुखी 
एनएमसी के मुताबिक, 2022 से 2023 के बीच देश के 606 मेडिकल कॉलेजों से सर्वे के जरिये यह पूछा गया कि एंटीबायोटिक दवाओं के खिलाफ स्वास्थ्य कर्मचारियों में जागरूकता के लिए क्या क्या किया जा रहा है? केवल 350 कॉलेजों ने ही जानकारी उपलब्ध कराई, जिनमें से 43 फीसदी ने बताया कि वे साल में एक बार इस पर काम करते हैं। वहीं, 256 मेडिकल कॉलेजों ने इनकी रोकथाम को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की।
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प्रत्येक पंजीकृत डॉक्टर पर लागू
वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, कॉलेजों की ऐसी बेरुखी के चलते रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर राष्ट्रीय कार्य योजना का मॉड्यूल जारी किया है। यह मेडिकल कॉलेजों के साथ देश के प्रत्येक पंजीकृत डॉक्टर पर भी लागू होता है। जल्द ही एमबीबीएस छात्र, नर्स व पैरामेडिकल स्टाफ के लिए दो मॉड्यूल जारी किए जाएंगे।


सुस्ती के पीछे एंटीबायोटिक लॉबी
देश की आबादी को ई. कोलाई, के. न्यूमोनिया, एस. ऑरियस, ए. बमनी, एस. न्यूमोनिया और एम. ट्यूबरक्लोसिस के साथ-साथ सुपर बग संक्रमण से बचाने के लिए सरकार एएमआर पर गंभीरता बरत रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुस्ती के पीछे देश में एंटीबायोटिक लॉबी के सक्रिय होना भी एक कारण माना जा रहा है, जिसके चलते सरकार ने जल्द इस लॉबी की निगरानी शुरू करने की योजना बनाई है। सूत्रों के मुताबिक, इसकी शुरुआत मेडिकल कॉलेजों से ही की जा सकती है। सरकारी और निजी सभी मेडिकल कॉलेज इसके दायरे में लाए जा सकते हैं।

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