{"_id":"624987d68901503f35230e2a","slug":"40-chulhas-vandalized-in-jagannath-temple-of-puri-which-were-used-for-preparing-mahaprasad-news-in-hindi","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुरी: जगन्नाथ मंदिर में अज्ञात लोगों ने 40 चूल्हे क्षतिग्रस्त किए, 'महाप्रसाद' तैयार करने में होता था उपयोग","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
पुरी: जगन्नाथ मंदिर में अज्ञात लोगों ने 40 चूल्हे क्षतिग्रस्त किए, 'महाप्रसाद' तैयार करने में होता था उपयोग
Sun, 03 Apr 2022 05:11 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुरी
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Sun, 03 Apr 2022 05:11 PM IST
सार
पुरी के जगन्नाथ मंदिर में महाप्रसाद तैयार करने के लिए केवल मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रक्रिया में लगभग 400 रसोइये और 200 सहायक काम करते हैं। अब चूल्हों के साथ तोड़फोड़ के बाद श्रद्धालुओं को कुछ दिन तक महाप्रसाद पाने में दिक्कत हो सकती है।
विज्ञापन
जगन्नाथ पुरी
- फोटो : फाइल
विस्तार
ओडिशा के पुरी में स्थित विश्वविख्यात जगन्नाथ मंदिर में मिट्टी के 40 चूल्हे रविवार को क्षतिग्रस्त अवस्था में पाए गए। इन चूल्हों का इस्तेमाल 'महाप्रसाद' तैयार करने में किया जाता था जो भगवान को अर्पित किया जाता है। ये चूल्हे दुनिया की सबसे बड़ी रसोई 'रोसा घर' में थे। जानकारी के अनुसार लगभग 300 कुंतल चावल इस रसोई में रोज पकाया जाता है।
विज्ञापन
मंदिर में तोड़फोड़ की जानकारी मिलने के बाद जिला कलेक्टर समर्थ वर्मा ने पुलिस अधीक्षक वीके सिंह के साथ घटनास्थल का दौरा किया था। जिला कलेक्टर ने कहा, 'रोसा घर में लगभग 40 चूल्हों के साथ तोड़फोड़ की गई है। हमने इस संबंध में एक रिपोर्ट मांगी है और इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।'
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि घटना में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही हैं। पुलिस और मंदिर के अधिकारियों की ओर से एक संयुक्त जांच का आदेश भी जारी किया गया है। जिला कलेक्टर ने कहा कि इस घटना से फिलहाल श्रद्धालुओं को महाप्रसाद मिलने में असर पड़ेगा, लेकिन दो दिन के अंदर हालात सामान्य हो जाएंगे।
विज्ञापन
रिकॉर्ड्स ऑफ राइट्स (आरओआर) के अनुसार 12वीं शताब्दी के इस मंदिर की रसोई में 240 पंजीकृत चूल्हे हैं। इनमें से 40 को नुकसान पहुंचा है। रसोई में प्रवेश की अनुमति केवल सुआराओं (रसोइये) को होती है। शक है कि शनिवार रात हुई इस घटना में कुछ सेवकों का हाथ हो सकता है। इस घटना ने मंदिर की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए हैं।